यही ख्वाब-ए-तमन्ना थी हमारी
यही बेबाक इरादा था हमारा
तुम्हें बेचैन करने को बस
इतना सा इशारा था हमारा
इन चार लाइनों से आप इशारा समझ गए होंगे कि
इस सीपीयू वट वृक्ष की एक डाली मैं भी हूं
जिस की उपस्थिति आप सभी के ज़हन में आप सभी के कानों में शब्दों के फूल पहुँचाती
मैं आप सभी दोस्तों को नमन करता हूं और अपनी चार लाइने आप सभी को सुनाता हूं
अदम्य जीवन
चंद अँधियारे डरा रहे हैं मुझको अपनी तानों से ।
मैं विप्लव का अदम्य गीत डरता नही सयानों से ।।
सागर होता है कितना गहरा पर लहरें नहीं डूबा करती हैं ।
विनाश के डर से आशा की ज्योति नहीं बुझा करती है ।।
पहाड़ कितना भी ऊँचा हो पर आसमान नही छुआ करते है ।
पंछि सिर्फ़ अपने हौशले से नभ में स्वच्छंद विचरा करते है ।।
वियोग ,विध्वंस या नास हो अपना या सृष्टि समूल नष्ट हो जाए।
पुनः निर्माण का सुत्र हो तो फ़िर ,क्या से क्या न क्या हो जाए ।।
विवश पलों के आँशु गिनकर ,नया सूत्र तुम बनाते जाओ ।
दुनिया नहीं समझेगी तुमको पर तुम खुद को समझते जाओ ।।
नही कर्म अच्छे करते हैं ,अच्छे कर्म अच्छे करते हैं ।
तुम भी समझो इन बातों को अच्छे कर्म कैसे करते हैं ।।
निज की गीता निज का पुराण
ना तो निज की राय तुम मरने देना ।
दुनिया थोपेगी धर्म तुझपे
पर ख़ुद का धर्म मत मरने देना ।।।
दिल भी कोई चीज है पता न था ।
मन कैसे बेचैन होता है पता न था ।।
जब तक मैं नहीं बिछड़ा था इस सीपीयू के कैंपस से
तब तक प्यार क्या होता है ये पता ना था
बारिश का मौसम ना होने पर ..
ये बरसात दिखाई देती है ,
तेरे शहर में ऐसा क्या है ...
जो ये बात दिखाई देती है,,
माथे पर शंका की रेखा ...
कर्म भाव से लज्जित है ,
निज में डूबा नहीं है कोई ...
सब, द्वेष भाव से सज्जित है ,,
उठा इनको भी गलियों से ...
जो अनाथ सड़क पर घूम रहे हैं ,
कैसे बनेगा ये देश, सोने की चिड़िया ...
जब पंख भूखमरी से कटे हुए हैं ,,
(एक बार उन बच्चों के बारे में जरूर सोचें
जो सड़क पर रहने को बेबस है )
बिना तुम्हारे जीवन मेरा, अलग अधूरा लगता है
एक तुम्हारे मिल जाने से, सबकुछ पूरा लगता है
अनबोले सब शब्द तुम्हारे, दिल मेरा ये सुनता है
एक तुम्हारे मिल जाने से, सबकुछ पूरा लगता है
साथ रहें मिलजुल के हरपल, बनके महज़ इकाई हम
हर लम्हें को जीना सीखें, बनकर अक्षर ढाई हम
दिल की ये नादानी सारी, एक नादाँ दिल समझ रहा
मेरा दिल तेरे दिल की हर धुन पर है अब धड़क रहा
साथ तुम्हारे अब हर लम्हा सहज सवेरा लगता है
एक तुम्हारे मिल जाने से, सबकुछ पूरा लगता है
तेरी आंखों के सामने रहा मगर बुत नहीं बना
इसलिए ही तो तेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं बना ,
माना सभी ने तेरे इंसाफ में थी बहुत सी कमियां
फिर भी तो तेरे खिलाफ कोई कानून नहीं बना
रोकेंगे हर किसी को हम इस प्यार की डगर से
क्या करें अब इससे आगे का कोई रास्ता नहीं बना
ये रस्सी है मेरे प्यार की से तोड़ मत देना
इसके सिवा मेरे गले का कोई लिबास नहीं बना
जलती है मेरे नाम से तो जलने दे प्राण
तू भी तो किसी के प्यार के काबिल नहीं बना
तिरंगा मेरे जिस्म पर कभी लिपटेगा जरूर
क्योंकि यह मेरे खून से कोई आंसू नहीं बना
पाना नहीं है कुछ अगर किस्मत से मुझे
तो खुदा हम गरीबों के हाथ में ये लकीरें मत बना
टूटा था इसी राह पर वो कांच का कमल
खबरदार, तू इस राह पर कोई नक्श मत बना