शनिवार, 4 नवंबर 2023

Bansal speech

 स्वराज्य, स्वयंभू,  स्वामित्व और छत्रपति शिवाजी महाराज कि इस पावन भूमि को मैं प्रणाम करता हूं   

विवेक के देवता भगवान एक दंत को प्रणाम करता हूं और इस मिट्टी में गुथी हुई संस्कृति सभ्यता और संस्कारों को प्रणाम करता हूं 

और आप सभी की उपस्थिति को प्रणाम करता हूं जिनकी उपलब्धता से मेरे मन और आंखों को खुशियों का प्रसाद मिल रहा है


आज हम जिन मुख्य अतिथियों के सानिध्य में अपने इस कार्यक्रम को करने जा रहे हैं उन दोनों का एक मंत्र है कि 

हयात लेकर चलो कायनात लेकर चलो 

चलो तो सारे जमाने को साथ लेकर चलो 


हमारे बीच में आज जो प्रमुख वक्ता हमारे अतिथि हम सभी के ऊर्जा के स्रोत 

जिनके आशीष वचनों से आज हम सभी अभिभूत होने वाले हैं उनका नाम है 

माननीय प्राचार्य विष्णु घुगे सर जो की बंसल क्लासेस महाराष्ट्र के स्टेट हेड हैं तथा उन्हें के साथ कदम से कदम

 मिलाकर शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे कार्यरत माननीय शाकिर कादरी सर आप बंसल क्लासेस महाराष्ट्र के वाइस स्टेट हेड है और हमारे बीच दो और महाविभूति  जिनका स्नेहा पूरे बंसल परिवार को मूर्त - अमूर्त

 रूप में मिलता रहता है जिनमें से एक का नाम अनिल केंदळे सर जो अपने आप में एक प्रसिद्ध इंजीनियर तथा

  एक सफल व्यावसायिक हैं और जो दूसरे सर हैं उनके तो कहने ही  क्या माननीय डॉक्टर अनिकेत बोरगावकर 

सर जो की एमएसएमई महाराष्ट्र के जोनल डायरेक्टर हैं


 मैं आप लोगों से गुजारिश करता हूं कि आप हमारे सभी अतिथियों का एक बार जोरदार तालियां बजाकर स्वागत  करिए 

हम अपने कार्यक्रम को आगे   


 उससे पहले मैं अपने चारों अतिथियों से गुजारिश करता हूं कि विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के सामने दीप प्रज्वलित कर हम सभी के आशीष की कामना करें 


मैं राजेश बोरगांवकर सर से विनती करता हूं कि वह आज के हमारे प्रमुख वक्ता माननीय प्राचार्य विष्णु घुगे सर को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत करें और स्वागत की इसी कड़ी में मैं मोहन बोरगांवकर सर से विनती करता हूं कि हमारे आज के दूसरे प्रमुख वक्ता माननीय शाकिर कादरी सर को पुष्प गुच्छ देकर उनका सम्मान बढ़ाऐ और मैं सुभाष जोशी सर से विनती करता हूं कि माननीय अनिल केंदळे सर को पुष्प  गुच्छ देकर उनका स्वागत करें उनका मान बढ़ाया और माननीय डॉक्टर अनिकेत बोरगांवकर सर को भी पुष्प गुच्छ देकरउनका मान बढ़ाएं  

दीपावली नजदीक आ रही है और बंसल ने जो शिक्षा का दीप इस वाशिम की पावन भूमि में जलाया है 

उसकी रोशनी में आप सभी के बच्चों का भविष्य जरूर और जरूर रोशन होगा…..


क्योंकि ये दिया मेहनत की मिट्टी 

समर्पण के तेल 

और विश्वास की बाती से मिलकर बना है 


जिसके जलने से पूरे वाशिम में ज्ञान का प्रकाश फैल रहा है 


हमारी भगवत गीता कहती है कि 


नहीं ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते  


 इस दुनिया में ज्ञान के समान पवित्र करने वाली कोई भी चीज नहीं है 


और पवित्रता बहुत जरूरी है क्योंकि पवित्रता सरलता की जननी है 


और कौन नहीं चाहेगा। ….  मैं नहीं चाहूंगा कि आप नहीं चाहेंगे         

कि हमारे बच्चों का भविष्य सरल हो उनमें एक संस्कार हो उनमें एक सरलता हो 

 उनके चेहरे पर सौम्यता  का एक नूर हो 

जिससे वो अपनी मिट्टी अपने मानस और अपने माता-पिता का नाम रोशन कर सके   


डर मुझे भी लगा था फासला देखकर

पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर 

मंजिल खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई 

मेरे अंदर का हौसला देखकर


मैं एक बात आप सभी के सामने रखना चाहता हूं


अगर सफलता में शिक्षा एक कारक है तो बंसल उसका आविष्कारक है 


अगर आप पेरेंट्स (अभिभावक) हैं आप अपने बच्चों के लिए कोई भी एक शिक्षण संस्थान का चयन करते हैं तो उसमें पांच चीजों का तो मूल्यांकन जरूर करते हैं


उसमें से पहला मूल्यांकन आप ये  करते हैं कि उसे शिक्षण संस्थान के पास ऊर्जा और ज्ञान की कसौटी पर खरे उतरने वाले शिक्षकों का एक समूह है कि नहीं है 


और जो दूसरा चयन आप क्या करते हैं कि आप देखते हैं शिक्षण संस्थान का वातावरण कैसा है उनके क्लासरूम अच्छे हैं कि नहीं है 


और तीसरी कसौटी जो आप देखते हैं कि शिक्षण संस्थान के पास उसे फील्ड का अनुभव है कि नहीं है


चौथी बात ज्ञान की संजीवनी अर्थात उसे संस्था के पास अपना study material  है की नहीं है 


और जो आखिरी बात आप चयन करते हैं जो सबसे जरूरी  है कि संस्था आपके शहर में आपकी आंखों के तले हो 

जिससे आपका बच्चा बीमारी और अलगाव के दुख को ना छेले बल्कि आपकी ममता और प्रेम के आंचल तले पलता रहे  


इन पांचो कसौटियों को अगर इस वॉशिंग की पावन भूमि पर कोई भी संस्थान पूर्ण करता है तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं  वह सिर्फ एक नाम है जिसका नाम आप स्वयं लेंगे और वो नाम है बंसल क्लासेस। ….. 


मेडल और अपनी  मेहनत के सम्मान से अभिभूत इन बच्चों को देखकर मैं एक बात कहना चाहता हूं कि 

तू शाहीन है परवाज है काम तेरा 

तेरे सामने आसमान और भी है 


और मैं आप लोगों को शुभकामनाएं देना चाहता हूं 


क्योंकि हमारे वेद कहते हैं कि विद्वान वही हैं जो वर्तमान में भविष्य को देख ले और आप लोग इन बच्चों के मुस्कुराते चेहरे ही नहीं बल्कि आप भारत के उज्जवल भविष्य को देख रहे हैं। ….. 



हयात लेकर चलो कायनात लेकर चलो 

चलो तो सारे जमाने को साथ लेकर चलो


प्यासे रहो ना दस्त में बारिश के मुंतज़िर 

मारो जमी पे पांव की पानी निकल पड़े


यूं ही नहीं मिल जाती रही तो मंजिलें 

एक जुनून दिल में जागना पड़ता है 

जब पूछा किसी ने चिड़िया से कैसे बना आशियाना

तो कहती है  बार-बार उड़कर तिनका उठाना पड़ता है


मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है

हर पहलू में जिंदगी का इम्तिहान होता है 

डरने वालों को मिलता नहीं कुछ भी जिंदगी में 

लड़ने वालों के कदमों में जहां होता है


दिल से लिखी बात दिल को छू जाती है 

ये अक्सर अनकही बात कह जाती है 

कुछ लोग दोस्ती के मायने बदल देते हैं 

कुछ लोगों की दोस्ती से दुनिया बदल जाती है


दरिया में अपनी कब्र बनने चला गया 

सूरज को डूबने से बचाने चला गया 

तमन्ना तो सबसे आगे निकलने की थी मगर 

जो गिरे थे उनको उठाने में चला गया 

अपनों की चाहतों में मिलावट थी इस कदर 

तंग आकर दुश्मनों को मनाने चला गया


रास्ते कहां खत्म होते हैं जिंदगी के सफर में 

मंजिले तो वही है जहां ख्वाहिश थम जाए


खुद से जीतने की जिद है मुझे खुद को ही हराना है 

मैं भीड़ नहीं हूं दुनिया की मेरे अंदर एक जमाना है


वो खुद पर इतना गुरुर करते हैं तो इसमें हैरत की बात नहीं 

जिन्हें हम चाहते हैं वो आम को ही नहीं सकते


सफर में मुश्किलें आए तो हिम्मत और बढ़ती है 

कोई अगर रास्ता रोके तो जुर्रत और बढ़ती है 

अगर बिकने पर आ जाओ तो घट जाते हैं दाम अक्सर

न बिकने का हो इरादा तो कीमत और बढ़ती है


ये राहें ले ही जाएंगी मंजिल तक हौसला रखो 

कभी सुना है कि अंधेरों ने सवेरा होने नहीं दिया


हौसले की तरकश में कोशिशों का वो तीर जिंदा रखो 

हार जाओ चाहे जिंदगी में सब कुछ लेकिन फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रखो











कतरा मेरे लहू का इनाम बना लेना 

मानकर सब इसे ही अंजाम बना लेना 

मैं लड़ रहा हूं नफरतों के खिलाफ शहर में 

तुम भी इस घर घर में इंतगाम बना लेना