उछाली नेकियां और सारे सबाब आ गए
सवाल की फहरिश्त में जवाब आ गए
हमें देखना था कुदरत का करिश्मा अभी
और देखो ; सामने से चलके आप आ गए
मैं प्रणीत मिश्र आप सभी को प्रणाम करता हूं नमस्कार करता हूं
हमारे आदरणीय सर ने जिस सोच और संकल्प के साथ इस बंसल परिवार की नींव रखी थी
आज उसको 1 वर्ष से अधिक हो गए हैं हमारे सदस्यों ने अपनी मेहनत में 1 तिनके की भी कसर नहीं छोड़ी और उसका परिणाम यह रहा कि
हमने एक वर्ष में सफलता की वो ऊंचाई प्राप्त की जिसकी सोच सिर्फ ख्वाब बनकर रह जाती है
और मैं इस मंच से अपनी और अपने परिवार की सफलता का श्रेय सबसे पहले आप सभी को देना चाहता हूं क्योंकि आपके विश्वास के बिना आपकी सहायता के बिना
यह कहीं से भी संभव नहीं हो पाता
इसलिए मैं बारंबार आप सभी को प्रणाम करता हूं धन्यवाद व्यक्त करता हूँ
आज का यह कार्यक्रम हम पहले अपने विद्यार्थियों की सफलता के उत्साह के लिए करने वाले थे परंतु हमारे आदरणीय सर ने कहा कि शिक्षा में सफलता सिर्फ एक ही नहीं होती बल्कि वह पूरे समाज की सफलता होती है हर एक इंसान की सफलता होती है जिन्होंने शिक्षा के लिए हर एक दूसरे को प्रोत्साहित किया और उन्हें किसी न किसी शिक्षण संस्थान से जुड़कर विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया इसलिए आज हम उन सभी विद्यार्थियों की सफलता का उत्साह मनाने यहां इकट्ठा हुए हैं जिन्होंने अपनी मेहनत अपनी लगन से इस मुकाम को हासिल किया है और इसके लिए आप सभी पलकजन अभिभावक और आदरणीय उपस्थित सभी महानुभावों को मैं बहुत-बहुत बधाइयां देता हूं और आभार व्यक्त करता हूं कि आप सभी ने बंसल परिवार के स्नेह निमंत्रण को स्वीकार किया और यहां अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई इसके लिए आप सभी को बहुत-बहुत शुक्रिया बहुत-बहुत धन्यवाद
अब मैं जिस शख्स से आप सभी को रूबरू कराना चाहता हूं उनके बारे में तो क्या
बेबसी बेताबी हर अंदाज में अच्छा लगता है
उनका लहजा ऐसा है की हर बात में अच्छा लगता है
नजर को नजर की नजर ना लगे
कोई अच्छा भी इस कदर ना लगे
मैंने देखा है आपको इस नजर से की
आपको मेरी नजर की नजर ना लगे
साहसों की दौड़ में दुख हार गया
डूबने की फिराक में था पर पार गया
बहुत अज़ीज़ है मुझको गुरूर अपना
उसने सौ बार बुलाया तो एक बार गया