रविवार, 5 अक्टूबर 2025

तुम हिम्मत कर चलते रहना sahab ji

 जब पाँव तुम्हारे रुक जाएं 

आँखों में आँसू चुभ जाए 

मंज़िल  की सारी उम्मीदें 

दिल आग बनें और फूँक जाएँ 


संग्राम अगर हारे भी तो 

सेना साधन वारे भी तो 

तुम मन को छोटा मत करना 

बस हिम्मत कर चलते रहना


जब कहने वाले कहते हों 

 सब घाव पोर से बहते हो 

 हर और निराशा छाई हो 

असफलता हो तनहाई हो तो


सारा सब कुछ बर्बाद रहे 

सब पीड़ा ही आबाद रहे 

दुनिया तुमको समझाएगी 

चलते पाथ से भटकाएगी 


फिर भी अपने मन की करना 

जिद करते थे करते रहना 

तुम हिम्मत कर चलते रहना 


आराम नहीं अपना आसान 

लड़ना ही है जय का साधन 

पर हिम्मत रखना यार मेरे 

लहरों से ना पतवार डरे 


तूफ़ान का रास्ता मोड़ेंगे 

मौजों की बाँह मरोड़ेंगे 

सूरज का माथा चूमेंगे 

हम भी मस्ती में झूमेंगे 


संघर्षों के ये सब किस्से 

आगे नशीन दुहराएँगी 

एक नाम तुम्हारा ले लेकर 

ज़िद का परचम लहराएँगी 


एक दिन वो भी आएगा  

जब सारे ग़म धूल जाएँगें 

ये निंदा करने वाले ही 

तब जय जय कार लगाएँगें 


ये पीड़ा ताज बनेगी तब 

ये ज़ख्म लिखेंगे तहरीरें 

रणधीर भले मर जाता है 

ज़िंदा रहती हैं शमशीरें 


से जीत हर की उलझन सें 

आगे बढ़ना बढ़ते रहना 

बस हिम्मत केआर चलते रहना 





……..रितेश _रजवाड़ा