बुधवार, 24 मार्च 2021

आकर्षण की कोई तहजीब नहीं होती !

 उसकी नाक पर उगा हुआ एक छोटा सा दाना --- 

आकर्षण की कोई तहजीब नहीं होती ! 

इन आंखों को पता नहीं कब क्या अच्छा लग जाए। 






किसी का बेतरतीब पहनावा किसी की अजीब हंसी , किसी के बिखरे बाल ,

 किसी के गड्ढे बनते गाल कुछ भी ऐसा ही हाल मेरे आकर्षण का था।

उसकी नाक पर उगा हुआ एक छोटा सा दाना। 

उसके चेहरे के आकर्षण का एक नया केंद्र था।

 आज जिस पर मेरी निगाह एक बार पड़ी और मन बस उसी पर टंग गया | 

मैं खुद को रोकता रहा पर फिर भी मन के बहकावे  में आकर निग़ाह  वहां तक चली ही जाती  ,

और आकर्षण को करीब से महसूस करने की जिद ने  मुझे मजबूर कर दिया 

और मेरी उंगलियां उसकी भौतिकता के प्रमाण के लिए उसे स्पर्श कर ली।



 न जाने क्या सुकून था इस बात में जैसे कोई कल्पना सच हुई हो ऐसा सुकून। ....... thanku 


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