शनिवार, 25 दिसंबर 2021

NEW POETRY

 

सर्वप्रथम मैं अपनी बात प्रारंभ करूँ उससे पहले यहाँ पर अनुभव से लबरेज़ अपनेपन की चासनी में झिलमिलाती आंखें मुझे दिखाई दे रही है मैं इन सभी आंखों को प्रणाम करता हूं आदाब करता हूं नमन करता हूं ,


इन हसीन आंखों को कोई तो काम दे दे

चल न हो कोई और तो मेरा ही नाम दे दे


कफ़स सा ना लगे मेरे दिल का बगीचा  

इसलिए ही बड़प्पन दिखा रहा हूँ। 

तुम हमारी अब नहीं रही फिर भी 

मैं तुम्हें अब भी अपना बता रहा हूँ।


 हमें फूलों की  रंजिशों ने कांटों पे चलना खूब सिखाया , 

जैसे बहारों की गुफ्तगू ने हवा को मचलना खूब सिखाया। 

तुमने तो सिखाया नहीं किसी को हाल-ए-दिल आ करके कहना, 

हमने तो देखो सिखा दिया है हर किसी को अपना प्यार कहना ।


मजबूरियों के पांव तले वादे टूट जाते हैं, 

वजीरो को बचाने में प्यादे छूट जाते हैं। 

ये मोहब्बत की जो सीढ़ी है इसकी रीत ही कुछ और ,

नए  खाड़े पे रखो पाँव तो पुराने छूट जाते हैं।


कफ़स में एक तीर सा चुभ रहा है 

तुम्हारी यादों का घाव लेकर , 

मैं तुम्हारे पास कैसे आऊं 

इन मजबूरियों के पाँव लेकर?


ये काजल नहीं है आंखों में मेरे 

उसकी यादों का धुआं भर रहा है।


शब्द के इन नए ख्वाब को देखकर ,      

हम सहमें रहे आपको देखकर ।

चांद ने हर किसी को ना देखा मगर ,     

सब सहमें रहे चांद को देखकर ।। 


दुखती रग से हथेली हटा लीजिए ,     

अपने संग से सहेली हटा लीजिए । 

ये इशारा हमें भी समझ आ रहा ,

अपने होठों से उंगली हटा लीजिए।।


 फुल कोई सितारा बने ना बने ,

साँस कोई इशारा बने ना बने ।

हम तुम्हारे ही बनकर रहेंगे सदा ,

चाहे रिश्ता कोई फिर बने ना बने ।।

चाहे फिर तुम  हमारे बने ना बने ।।


ख्वाब जख्मों का दिल में भर जाएगा , 

तुम जो कह दो ये पागल वो कर जाएगा । 

तुम इशारा भी करो मोहब्बत में जो ,

ये दीवाना तुम्हारा तो मर जाएगा ।।


हो शहर ये दीवाना तो मैं क्या करूं 

ना जमें कुछ बहाना तो मैं क्या करूं। 

तेरी चूड़ी छुपा कर के रखी थी जो 

बजे उठे अंजुमन में तो मैं क्या करूं?


कीमती था इतना जख्म की सोया नहीं गया। 

हमसे तो उसका दर्द भी खोया नहीं गया। 

तुम हर अंजुमन में फिर रहे हो करते हुए पुकार 

हमसे तो उसका नाम लेकर रोया नहीं गया ।


कशमकश ऐसी कि जता नहीं पाते 

तुम हमें इतने अच्छे लगते हो, कि बता नहीं पाते ।

और ऐसा नहीं है कि हमने कोशिश नहीं की 

मगर कितना भी गौर कर ले कोई खता नहीं पाते।

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बे समय की बरसात का कुछ और मानी हो न सकता
जिंदगी में तेरे बिन मैं कुछ और कहानी हो न सकता


सब समझते हैं जिसे मैं वो कहानी हो रहा हूँ ,
भाव में भीगा हुआ आँखों का पानी हो रहा हूँ ,,
ख़्वाब में भीगी हुई रात की एक कहानी हो रहा हूँ

दिल का एक शहर था जिसमें हम दोनों ही रहते थे
हर दम अपने ख़्वाब के बादल पीछे पीछे चलते थे

तुम जो आँचल लेकर आये धूप भरी इस नगरी में
हम तो समझे बरसात हुई है प्यास भरी इस गगरी में

दिल का नीरव तरुवर फिर से कुसुमों की भाषा बोल रहा है ,

 साथ तुम्हारे बीते उस हर पल को अपना बोल रहा है ,


सब समझती होगी तुम जो ,बात यहाँ मैं बोल रहा हूँ ,
ख़्वाब में भीगा हुआ आँखों का पानी हो रहा हूँ
भाव में भीगा हुआ आँखों का पानी हो रहा हूँ ,,

उर्मिला की विरह वेदना दिनकर का मैं कर्ण बना हूँ ,
तुम्हारी याद में शाख से टूटा मैं एक अदना सा पर्ण बना हूँ,,


दीवानगी के साए में रह रहा हूं 

पर मैं ये बात आपसे क्यूँ कह रहा हूं। 

उसने पूछा था तआरुफ़ मेरा 

मैं उससे ही उसका नाम कह रहा हूं। 

मेरी बातों पर गौर करना 

मैं जो भी कह रहा हूं, सच कह रहा हूं। 

हां, ये सच है कि उससे मोहब्बत बहुत थी 

जिसको आजकल मैं आप कह रहा हूं। 

सिर्फ होठों पर ध्यान मत दो। 

मैं आंखों से भी कुछ कह रहा हूं 

और उसके सांसों की सरहद दिखाऊं। 

 खैर ये बात तो  मैं आपने आप से कह रहा हूं।



उसकी मोहब्बत को ठुकरा आए हैं,

यहां लेकर हम बस दिल का एक टुकड़ा आये हैं । 

वो बात जिससे दिल के जनाजे उठते हैं, 

आज हम वही बात उससे कहके आये हैं।



ऐसे मेरी इकरार के पन्ने पड़े कोई , 

जैसे हो रहा हो आंख में दीदार का सौदा ,,

मेरे मालिक है मेरी जिंदगी में मुफलिसी का दौर,

वरना कब हुआ है ऐसे मेरे किरदार का सौदा ,,



इतनी लानतें कि जिंदगी जहन्नुम हो जाए। 

मैं बताने बैठूं दर्द तो एक तरन्नुम हो जाए।।








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