नेहरू हुए गुलजार कभी तो कभी शास्त्री भी गुलजार हुए। इंदिरा जब जब मोर बनी तो चरणों में उनके वार हुए
राजीव हुआ जब देश हमारा
V P बढ़ गया सबका यारा चंद्रशेखर पीवी अटल रहे जब एचडी देवा गुजराल रहे तब
तब से अटल है देश हमारा मनमोहन मोदी का प्यारा
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नेहरू हुए गुलजार कभी तो कभी शास्त्री भी गुलजार हुए। इंदिरा जब जब मोर बनी तो चरणों में उनके वार हुए
राजीव हुआ जब देश हमारा
V P बढ़ गया सबका यारा चंद्रशेखर पीवी अटल रहे जब एचडी देवा गुजराल रहे तब
तब से अटल है देश हमारा मनमोहन मोदी का प्यारा
चंद कांटो से घिरे और फूल हो गए
हम दिल की गुफ्तगू में मशग़ूल हो गए
उसने इस कदर पुकार महफिल में हमें
हम बिना कुछ किये ही मशहूर हो गए
अभी सुकून है जिंदगी में मगर
तेरा दर्द सहने को जी चाहता है
बहुत दिन हो गए तन्हाई में रहते हुए
अब तेरे संग रहने को जी चाहता है
झुकी पलकों से कहा था मुबारक हो
इस मोहब्बत की अब ना कोई तिज़ारत हो
मैं तो किनारा हूं मुझे छूटना है पीछे
देखना आगे फिर ना कोई शरारत हो
जब भी होगा तेरे सामने मोहब्बत का जिक्र
तू हर बार मेरा नाम सोच कर रोएगी
बस एक बार उसे गले लगा कर देख लूँ
मेरा दिल धड़कता कैसे हैं
खुद के सीने से अपना कान नहीं लगा सकता
मैं सिर्फ तेरे होने का इमकान नहीं लगा सकता
मुझे एक मौका तो दे अपने गले लगने का
मैं दूर से अपनी धड़कनों का अनुमान नहीं लगा सकता
जख्म ए उल्फत का नजारा देखिए
किस हाल में है ये बेचारा देखिए
ये बेहतर से बेहतरीन होने का सफर है
ये जहां से जहीन होने का सफर है
ये महत से महीन होने का सफर है
ये ख्वाब से आमीन होने कासफर है
साथ में उलझनओं की बारातें लिए मैं
उदासी भरी कई रातें लिए मैं
कभी गिर के रोया कभी उठ हंसा मैं
मगर ना रुका ना कभी फंसा मैं
है नहीं इसमें सिर्फ त्याग की बस कहानी
मेरे साथ लड़ी है मेरी हर कदम जवानी
मैं भाई की चाहत का पैगाम लिखता
जो कुछ मिला है उसका अंजाम लिखता
लिखता कभी रात की कोई धून मैं
कभी सुबह की चह चह भी लिखता
पर हारा नहीं हूं ना ही थका हूं
अभी तो मैं बस कुछ ही कर सका हूं
मेरे इस दौर में जिंदगी की आस होते तो
मैं इस कदर बेचैन ना होता अगर तुम पास होते तो
मिले अगर जख्म तो फिर मलहम की बात होनी चाहिए
अगर चमके ना कोई सितारा मगर रात होनी चाहिए
बहुत कुछ कह नहीं सकता जुबाने जंग करती हैं
दिलों की बात करता हूं तो निगाहें तंग करती हैं
मैं मुकम्मल हो नहीं सकता जिसका कहानी में नहीं हो तुम
मैं उस दिन सो नहीं कर सकता जिस दिन नाराज हो तुम
हम ऐसे ही नहीं चल रहे उम्मीद के ज़वाल पर
हमने ये सफर शुरू किया है अपने कमल पर
अपना भारत अपने राम सारे बोलो जय श्री राम
पलकों को तीर आबरू को शमशीर कहा
झूलती लटों को जिगर की जंजीर कहा
अपने आप को बदलकर मैं तुझे अच्छा लगूँ
इससे अच्छा है कि मैं अच्छा ना लगूँ
वफा नहीं ना हीं बेवफाई याद आई
मुझे जब भी याद आई बस तेरी याद आई
संभल के लगा मेरी तलब खुद को
मैं वो जायका हूं जो भुलाया नहीं जाएगा
दूर होकर भी किस्सा छोड़ गए हो
तुम मुझमें कुछ हिस्सा छोड़ गए हो गया
कैसे कर लेते हैं लोग नफरत किसी से
मैं तो अब भी तुझसे प्यार करता हूं
हालांकि इस प्यार को करने के लिए कोई वजह नहीं है
बस वजह एक ही है
कि जब तक तू साथ थी चांदनी ठंडक थी
रातों में शांति थी
बातों में क्रांति थी
हवाएं पास से गुजरती थी
खुशबू हर लफ्जों से बात करती थी
दीवारें सजीव लगती थी
पानी में प्यास नहीं थी
किसी से कोई आस नहीं थी
अपने में खोए रहते थे
तेरे ख्वाबों में सोये रहते थे
तेरे छूने की याद थी मुझमे
और कोई नहीं फरियाद थी मुझमे
अब तो वक्त का पता चलता है
रात का होना बद्दुआ लगता है
कुछ भी अच्छा नहीं लगता
मैं हरकतों से बच्चा नहीं लगता
लोग कहते हैं कि बड़ा हो गया हूं मैं
अपने पैरों पर खड़ा हो गया हूं
पर मुझे पता है टूट गया हूं मैं
हर-हर्फ़ से रूठ गया हूं मैं
अब मुझे कोई मना नहीं सकता
कोई कुछ भी कर ले बना नहीं सकता
ये मिट्टी अब खराब हो गई है
तेरी चिट्ठी और शराब हो गई है
मैं इसमें तेरा चाहने वाला नहीं लिख सकता
जुल्म सकता हूं पर इंसाफ नहीं लिख सकता
जहाँ था सुकून वहां तुम लिख दिया
आस पास फूलों की धुन लिख दिया
और जहां था चिन्ह प्रश्नवाचक लगा
वहां अपनी हामी का हम्म लिख दिया
और थी कुछ निचे इबादत की बातें
साथ ही लिखी थी शहादत की बातें
मैं बातों ही बातों में सब लिख दिया
मैने तुझे अपना रब लिख दिया
हम भारतीयों की एक कमी है कि
हमें मोहब्बत करना आता है।
हमें मोहब्बत बताना भी आता है।
हमें मोहब्बत निभाना भी आता है।
हमें मोहब्बत पढ़ना भी आता है।
हमें मोहब्बत से लड़ना भी आता है।
हमें मोहब्बत से झगड़ना भी आता है।
हमें मोहब्बत समझना भी आता है।
हमें मोहब्बत पे फिसलना भी आता है।
हमें मोहब्बत से संभालना भी आता है,
पर हमें नहीं आता तो सिर्फ मोहब्बत जताना
बस यही एक कमी है हम सभी में
सहज हो तेरा निशा और जिंदगी बस खूब नजर आए।
मैं जब भी नाम लूँ तेरा मुझे बस तू नजर आए।
फ़िज़ा की रँगतों में भी शामिल हो एक रंग तुम्हारा
मैं जब भी आँख खोलू तो मुझे बस तू नजर आए।
मन की भावों को जिसने शब्दों का वरदान दिया हो
ज्ञान के निर्गुण दीप को जिसने सगुणता का सम्मान दिया हो,
जिसने दिया हो धमनियों में देश प्रेम का अतुलित बंधन
और हमारी सोच में जलती बनकर विचारों का ईंधन ;
हाँ हम उस माता के लाल हैं जिसके माथे पर एक बिंदी है।
गर्व से कहो, हमारी भाषा प्यारी-प्यारी हिंदी है।
विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ।
सितम की आँख में तो सितारा हो नहीं सकता ;
जहाँ पर प्रेम हो वहाँ किनारा हो नहीं सकता।
दिलों की डोर है जो हम सभी को साथ रखती है ;
यहाँ पर सिर्फ हमारा और तुम्हारा हो नहीं सकता ।।
सहज हरदीप की अपनी रवानी हो न पाती
तुम्हारे बिन जीवन की कहानी हो न पाती।
महज सब किस्मत की रेखा से उलझते
तुम्हारे बिन कोई और निशानी होना पाती!
हो कहीं जख्म तो दीदार करना चाहिए।
मांगे कोई मोहलत तो इंतजार करना चाहिए।
लौटकर गया है अभी साहिलों से दरिया मगर
आने वाली लहरों से खबरदार रहना चाहिए।
गर्म हुए दूध को जैसे मलाई बॉंधती है, बहन उस तरह ही भाई की कलाई बाँधती है।