बुधवार, 25 अक्टूबर 2023

वफा नहीं ना हीं बेवफाई याद आई मुझे जब भी याद आई बस तेरी याद आई

 चंद कांटो से घिरे और फूल हो गए

हम दिल की गुफ्तगू में मशग़ूल हो गए 

उसने इस कदर पुकार महफिल में हमें 

हम बिना कुछ किये ही मशहूर हो गए


अभी सुकून है जिंदगी में मगर 

तेरा दर्द सहने को जी चाहता है 

बहुत दिन हो गए तन्हाई में रहते हुए 

अब तेरे संग रहने को जी चाहता है


झुकी पलकों से कहा था मुबारक हो 

इस मोहब्बत की अब ना कोई तिज़ारत हो 

मैं तो किनारा हूं मुझे छूटना है पीछे 

देखना आगे फिर ना कोई शरारत हो 


जब भी होगा तेरे सामने मोहब्बत का जिक्र 

तू हर बार मेरा नाम सोच कर रोएगी


बस एक बार उसे गले लगा कर देख लूँ  

मेरा दिल धड़कता कैसे हैं


खुद के सीने से अपना कान नहीं लगा सकता 

मैं सिर्फ तेरे होने का इमकान नहीं लगा सकता 

मुझे एक मौका तो दे अपने गले लगने का 

मैं दूर से अपनी धड़कनों का अनुमान नहीं लगा सकता


जख्म ए उल्फत का नजारा देखिए 

किस हाल में है ये बेचारा देखिए


ये बेहतर से बेहतरीन होने का सफर है 

ये जहां से जहीन होने का सफर है 

ये महत से महीन होने का सफर है 

ये ख्वाब से आमीन होने कासफर है


साथ में उलझनओं की बारातें लिए मैं 

उदासी भरी कई रातें लिए मैं 

कभी गिर के रोया कभी उठ हंसा मैं   

मगर ना रुका ना कभी फंसा मैं  

है नहीं इसमें सिर्फ त्याग की बस कहानी 

मेरे साथ लड़ी है मेरी हर कदम जवानी 

मैं भाई की चाहत का पैगाम लिखता 

जो कुछ मिला है उसका अंजाम लिखता 

लिखता कभी रात की कोई धून मैं  

कभी सुबह की चह चह भी लिखता 

 पर हारा नहीं हूं ना ही थका हूं 

अभी तो मैं बस कुछ ही कर सका हूं



मेरे इस दौर में जिंदगी की आस होते तो 

मैं इस कदर बेचैन ना होता अगर तुम पास होते तो


मिले अगर जख्म तो फिर मलहम की बात होनी चाहिए

अगर चमके ना कोई सितारा मगर रात होनी चाहिए


बहुत कुछ कह नहीं सकता जुबाने जंग करती हैं 

दिलों की बात करता हूं तो निगाहें तंग करती हैं 

मैं मुकम्मल हो नहीं सकता जिसका कहानी में नहीं हो तुम 

मैं उस दिन सो नहीं कर सकता जिस दिन नाराज हो तुम


हम ऐसे ही नहीं चल रहे उम्मीद के ज़वाल पर 

हमने ये  सफर शुरू किया है अपने कमल पर 


अपना भारत अपने राम सारे बोलो जय श्री राम 


पलकों को तीर आबरू को शमशीर कहा 

झूलती लटों को जिगर की जंजीर कहा


अपने आप को बदलकर मैं तुझे अच्छा लगूँ   

इससे अच्छा है कि मैं अच्छा ना लगूँ 


वफा नहीं ना हीं बेवफाई याद आई 

मुझे जब भी याद आई बस तेरी याद आई


संभल के लगा मेरी तलब खुद को 

मैं वो जायका हूं जो भुलाया नहीं जाएगा


दूर होकर भी किस्सा छोड़ गए हो  

तुम मुझमें कुछ हिस्सा छोड़ गए हो गया


कैसे कर लेते हैं लोग नफरत किसी से 

मैं तो अब भी तुझसे प्यार करता हूं 

हालांकि इस प्यार को करने के लिए कोई वजह नहीं है 

बस वजह एक ही है 

कि जब तक तू साथ थी चांदनी ठंडक थी  

रातों में शांति थी 

बातों में क्रांति थी 

हवाएं पास से गुजरती थी 

खुशबू हर लफ्जों से बात करती थी 

दीवारें सजीव लगती थी 

पानी में प्यास नहीं थी 

किसी से कोई आस नहीं थी 

अपने में खोए रहते थे 

तेरे ख्वाबों में सोये रहते थे 

तेरे छूने की याद थी मुझमे 

और कोई नहीं फरियाद थी मुझमे 

 अब तो वक्त का पता चलता है 

रात का होना बद्दुआ लगता है 

कुछ भी अच्छा नहीं लगता 

मैं हरकतों से बच्चा नहीं लगता 

लोग कहते हैं कि बड़ा हो गया हूं मैं 

अपने पैरों पर खड़ा हो गया हूं 

पर मुझे पता है टूट  गया हूं मैं 

हर-हर्फ़ से रूठ गया हूं मैं 

अब मुझे कोई मना नहीं सकता 

कोई कुछ भी कर ले बना नहीं सकता 

ये मिट्टी अब खराब हो गई है 

तेरी चिट्ठी और शराब हो गई है 

मैं इसमें तेरा चाहने वाला नहीं लिख सकता

जुल्म  सकता हूं पर इंसाफ नहीं लिख सकता 


जहाँ था सुकून वहां तुम लिख दिया  

आस पास फूलों की धुन लिख दिया 

और जहां था चिन्ह  प्रश्नवाचक लगा  

वहां अपनी हामी का हम्म लिख दिया 

और थी कुछ निचे इबादत की बातें 

साथ ही लिखी थी शहादत की बातें 

मैं बातों ही बातों में सब लिख दिया 

मैने तुझे अपना रब  लिख दिया


हम भारतीयों की एक कमी है कि 

हमें मोहब्बत करना आता है। 

हमें मोहब्बत बताना भी आता है। 

हमें मोहब्बत निभाना भी आता है। 

हमें मोहब्बत पढ़ना भी आता है। 

हमें मोहब्बत से लड़ना भी आता है। 

हमें मोहब्बत से झगड़ना भी आता है। 

हमें मोहब्बत समझना भी आता है। 

हमें मोहब्बत पे फिसलना भी आता है। 

हमें मोहब्बत से संभालना भी आता है, 

पर हमें नहीं आता तो सिर्फ मोहब्बत जताना 

बस यही एक कमी है हम सभी में


सहज हो तेरा निशा और जिंदगी बस खूब नजर आए। 

मैं जब भी नाम लूँ तेरा मुझे बस तू नजर आए।

फ़िज़ा की रँगतों में भी शामिल हो एक रंग तुम्हारा 

मैं जब भी आँख खोलू तो मुझे बस तू नजर आए।



मन की भावों को जिसने शब्दों का वरदान दिया हो 

ज्ञान के निर्गुण दीप को जिसने सगुणता का सम्मान दिया हो, 

जिसने दिया हो धमनियों में देश प्रेम का अतुलित बंधन 

और हमारी सोच में जलती बनकर विचारों का ईंधन ; 


हाँ हम उस माता के लाल हैं जिसके माथे पर एक बिंदी है। 

गर्व से कहो, हमारी भाषा प्यारी-प्यारी हिंदी है।


विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ।


सितम की आँख में तो सितारा हो नहीं सकता ;

जहाँ पर प्रेम हो वहाँ किनारा हो नहीं सकता।

दिलों की डोर है जो हम सभी को साथ रखती है ; 

यहाँ पर सिर्फ हमारा और तुम्हारा हो नहीं सकता ।।


सहज हरदीप की अपनी रवानी हो न पाती 

तुम्हारे बिन जीवन की कहानी हो न पाती।

महज सब किस्मत की रेखा से उलझते 

तुम्हारे बिन कोई और निशानी होना पाती!


हो कहीं जख्म तो दीदार करना चाहिए। 

मांगे कोई मोहलत तो इंतजार करना चाहिए।  

लौटकर गया है अभी साहिलों से दरिया मगर 

आने वाली लहरों से खबरदार रहना चाहिए।


गर्म हुए दूध को जैसे मलाई बॉंधती है, बहन उस तरह ही भाई की कलाई बाँधती है।






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