जुड़ती है हर उल्लास हर नजर हर कहानी मुझसे
बात करती है पल-पल ये जवानी मुझसे
क्यों एकांत को एकाकी के सांचे में ठालें हम
क्यों कृतघ्न को वफादार समझ पाले हम
क्यों हमारे एक इशारे पर सब कुछ हो जाए
क्यों जो मिला है वो ना खो जाए
क्यूँ हम अपने जीवन से इतना कुछ चाहते हैं
क्यों हम हर वक्त कुछ न कुछ मांगते हैं
ध्यान रखना ..
पहले राह नहीं पहले राही होता है
मटका पानी पाकर ही सुराही होता है

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