सोमवार, 27 दिसंबर 2021

जग में जीवन का मूल यही है !


जीवन


देकर खुद को पीड़ाएँ 

जग को दर्द की बात बताओ ,

या इतना काम करो खुद से की

खुद को खुद का फर्ज बताओ। 

काट दो मन की जंजीरे

जीवन का बस शूल यही है । 

जग में जीवन का मूल यही है ।


जब तक चिड़िया रहे बाग में 

जीवन का मधुगान रहेगा ,

जब तक स्वाभिमान जिंदा है

हर सर पर आसमान रहेगा। 

मत हो ऋणी किसी और के 

जीवन का बस भूल यही है। 

जग में जीवन का मूल यही है। 


अगर जगति में नाम करना है 

तो खुद को साज बनाना होगा । 

भूत भविष्य का छोड़ पहले 

खुद को आज बनाना होगा। 

ये दर्द का आँचल नहीं है पगले 

जीवन का बस फूल यही है।

जग में जीवन का मूल यही है !










शनिवार, 25 दिसंबर 2021

NEW POETRY

 

सर्वप्रथम मैं अपनी बात प्रारंभ करूँ उससे पहले यहाँ पर अनुभव से लबरेज़ अपनेपन की चासनी में झिलमिलाती आंखें मुझे दिखाई दे रही है मैं इन सभी आंखों को प्रणाम करता हूं आदाब करता हूं नमन करता हूं ,


इन हसीन आंखों को कोई तो काम दे दे

चल न हो कोई और तो मेरा ही नाम दे दे


कफ़स सा ना लगे मेरे दिल का बगीचा  

इसलिए ही बड़प्पन दिखा रहा हूँ। 

तुम हमारी अब नहीं रही फिर भी 

मैं तुम्हें अब भी अपना बता रहा हूँ।


 हमें फूलों की  रंजिशों ने कांटों पे चलना खूब सिखाया , 

जैसे बहारों की गुफ्तगू ने हवा को मचलना खूब सिखाया। 

तुमने तो सिखाया नहीं किसी को हाल-ए-दिल आ करके कहना, 

हमने तो देखो सिखा दिया है हर किसी को अपना प्यार कहना ।


मजबूरियों के पांव तले वादे टूट जाते हैं, 

वजीरो को बचाने में प्यादे छूट जाते हैं। 

ये मोहब्बत की जो सीढ़ी है इसकी रीत ही कुछ और ,

नए  खाड़े पे रखो पाँव तो पुराने छूट जाते हैं।


कफ़स में एक तीर सा चुभ रहा है 

तुम्हारी यादों का घाव लेकर , 

मैं तुम्हारे पास कैसे आऊं 

इन मजबूरियों के पाँव लेकर?


ये काजल नहीं है आंखों में मेरे 

उसकी यादों का धुआं भर रहा है।


शब्द के इन नए ख्वाब को देखकर ,      

हम सहमें रहे आपको देखकर ।

चांद ने हर किसी को ना देखा मगर ,     

सब सहमें रहे चांद को देखकर ।। 


दुखती रग से हथेली हटा लीजिए ,     

अपने संग से सहेली हटा लीजिए । 

ये इशारा हमें भी समझ आ रहा ,

अपने होठों से उंगली हटा लीजिए।।


 फुल कोई सितारा बने ना बने ,

साँस कोई इशारा बने ना बने ।

हम तुम्हारे ही बनकर रहेंगे सदा ,

चाहे रिश्ता कोई फिर बने ना बने ।।

चाहे फिर तुम  हमारे बने ना बने ।।


ख्वाब जख्मों का दिल में भर जाएगा , 

तुम जो कह दो ये पागल वो कर जाएगा । 

तुम इशारा भी करो मोहब्बत में जो ,

ये दीवाना तुम्हारा तो मर जाएगा ।।


हो शहर ये दीवाना तो मैं क्या करूं 

ना जमें कुछ बहाना तो मैं क्या करूं। 

तेरी चूड़ी छुपा कर के रखी थी जो 

बजे उठे अंजुमन में तो मैं क्या करूं?


कीमती था इतना जख्म की सोया नहीं गया। 

हमसे तो उसका दर्द भी खोया नहीं गया। 

तुम हर अंजुमन में फिर रहे हो करते हुए पुकार 

हमसे तो उसका नाम लेकर रोया नहीं गया ।


कशमकश ऐसी कि जता नहीं पाते 

तुम हमें इतने अच्छे लगते हो, कि बता नहीं पाते ।

और ऐसा नहीं है कि हमने कोशिश नहीं की 

मगर कितना भी गौर कर ले कोई खता नहीं पाते।

.........................................................

बे समय की बरसात का कुछ और मानी हो न सकता
जिंदगी में तेरे बिन मैं कुछ और कहानी हो न सकता


सब समझते हैं जिसे मैं वो कहानी हो रहा हूँ ,
भाव में भीगा हुआ आँखों का पानी हो रहा हूँ ,,
ख़्वाब में भीगी हुई रात की एक कहानी हो रहा हूँ

दिल का एक शहर था जिसमें हम दोनों ही रहते थे
हर दम अपने ख़्वाब के बादल पीछे पीछे चलते थे

तुम जो आँचल लेकर आये धूप भरी इस नगरी में
हम तो समझे बरसात हुई है प्यास भरी इस गगरी में

दिल का नीरव तरुवर फिर से कुसुमों की भाषा बोल रहा है ,

 साथ तुम्हारे बीते उस हर पल को अपना बोल रहा है ,


सब समझती होगी तुम जो ,बात यहाँ मैं बोल रहा हूँ ,
ख़्वाब में भीगा हुआ आँखों का पानी हो रहा हूँ
भाव में भीगा हुआ आँखों का पानी हो रहा हूँ ,,

उर्मिला की विरह वेदना दिनकर का मैं कर्ण बना हूँ ,
तुम्हारी याद में शाख से टूटा मैं एक अदना सा पर्ण बना हूँ,,


दीवानगी के साए में रह रहा हूं 

पर मैं ये बात आपसे क्यूँ कह रहा हूं। 

उसने पूछा था तआरुफ़ मेरा 

मैं उससे ही उसका नाम कह रहा हूं। 

मेरी बातों पर गौर करना 

मैं जो भी कह रहा हूं, सच कह रहा हूं। 

हां, ये सच है कि उससे मोहब्बत बहुत थी 

जिसको आजकल मैं आप कह रहा हूं। 

सिर्फ होठों पर ध्यान मत दो। 

मैं आंखों से भी कुछ कह रहा हूं 

और उसके सांसों की सरहद दिखाऊं। 

 खैर ये बात तो  मैं आपने आप से कह रहा हूं।



उसकी मोहब्बत को ठुकरा आए हैं,

यहां लेकर हम बस दिल का एक टुकड़ा आये हैं । 

वो बात जिससे दिल के जनाजे उठते हैं, 

आज हम वही बात उससे कहके आये हैं।



ऐसे मेरी इकरार के पन्ने पड़े कोई , 

जैसे हो रहा हो आंख में दीदार का सौदा ,,

मेरे मालिक है मेरी जिंदगी में मुफलिसी का दौर,

वरना कब हुआ है ऐसे मेरे किरदार का सौदा ,,



इतनी लानतें कि जिंदगी जहन्नुम हो जाए। 

मैं बताने बैठूं दर्द तो एक तरन्नुम हो जाए।।








शनिवार, 21 अगस्त 2021

चूल्हे पर रोटी पक रही है !




नर्म उपलों और हरी शाखों को चूल्हे के मुंह पर रखती मां , तीखी आवाज में कहती है | प्रगति जा अपने पापा से कह दे नहा लें और कह देना जाँघिया दीवाल की खूँटी में टँगी है और लुंगी उनके सिरहाने पड़ी होगी,  और इतना सुनते ही प्रगति दौड़ पड़ी  उसके दुर जाने से पैरों की मंद होती आवाज मां के कानों तक पहुंच रही है |  , 

      माँ ने धीरे से बगल के चूल्हे से बुझती हुई आग उठाई और उसे लाकर नए चूल्हे की लकड़ियों के बीच रखा और आग जलाने की भरसक कोशिश शुरू कर दी | गांव में पुरानी रीत है कि चूल्हे से आग बुझनी नहीं चाहिए चूल्हे की आग का पूछना अच्छा नहीं माना जाता |  बार-बार माँ की फूंक मारने पर कंडों  का लाल होता चेहरा कौन  नहीं  देख सकता था |  माँ की लगातार फूँक से अब लकड़ी सूख चुकी थी | रसोई में धुआं भर चुका था और मैं यह समझ चुका था कि चूल्हे में सिर्फ लकड़ी नहीं उसके साथ-साथ मां की  साँसें  उसका कलेजा उसका सपना और उसकी उम्मीद भी साथ-साथ जलती हैं  और उसको जलाने वाली हवा कहीं और से नहीं आती बल्कि स्वयं माँ की साँसो से आती है और माँ इतने नुकसान के बाद सिर्फ  रोटी पका पाती है और उसके साथ भविष्य का वो चेहरा जिसे माँ अपना बेटा कहती है | 


    भविष्य संभालने की जो जिद माँ  दिखाती है वह कहीं और नहीं दिखाई देती  धूप ,नमी , ठण्ड , बरसात , सुख-दुख और दुनिया में उस बच्चे की अवस्था के अनुसार जो कुछ भी अति के रुप में उपस्थित हो सकता है वह उन सभी चीजों से उसे बचाती  है ; और उसके बालों में कंघी और आंखों में काजल लगाने के बाद माँ उसके चेहरे को अपने चेहरे के साथ आईने में लाकर कहती है कितना प्यारा है और खुद ही अपनी नजर उतार कर कहती है…..  चल रोटी खायेगा |



The mother, placing soft fruits and green branches on the mouth of the stove, says in a shrill voice. Pragati, tell your father to take a bath and say that the panties are hanging in the peg of the wall and the lungi must have been lying on his head, and on hearing this, Pragati started running, due to her going away, the sound of the feet is reaching the ears of the mother. ,

      The mother slowly picked up the extinguished fire from the adjacent stove and brought it between the wood of the new stove and started trying her best to light the fire. There is an old custom in the village that the fire should not be extinguished by the stove, it is not considered good to ask for the fire of the stove. Who could not see the red face of the candles after repeatedly blowing the mother? Now the wood had dried up due to the constant blows of the mother. The kitchen was full of smoke and I had understood that not only the wood in the stove, but the mother's breath, her heart, her dream and her hope also burn together and the air that burns it does not come from anywhere else but itself. Comes from mother's breath and mother is able to cook only bread after so much loss and with her the future face which mother calls her son.


    The stubbornness that the mother shows to take care of the future is not seen anywhere else, sun, moisture, cold, rain, happiness and sorrow and whatever can be present in the form of extreme according to the condition of that child in the world, it is free from all those things. saves her; And after combing her hair and applying Kajal in her eyes, the mother brings her face with her face in the mirror and says how cute she is and herself takes off her eyes and says…….. let's eat roti.






                      बहुत-बहुत आभार आपका है यहाँ तक पढ़ने के लिए …. 

                         Thank you so much for reading this ….


गुरुवार, 25 मार्च 2021

जिंदगी




 साला जिंदगी में तकलीफें ऐसे जुड़ी हैं जैसे सूरज से रोशनी ,

     जिंदगी ने सांसें  लेना शुरू किया कि तकलीफें घेरनी  शुरू कर दीं ,  जिंदगी  जब तक सांसे लेती  रहेगी तकलीफें  तब तक आपके साथ पलती रहेंगी | 

    हम आप सब इन तकलीफों से लड़ रहे हैं जिंदगी को जी रहे हैं अपने -अपने तरीके से , कोई सांसो में आहें भर कर , कोई सड़क पर भीख मांग कर ,कोई व्यवसाय करके कोई दूसरों को मूर्ख बनाकर पर सब जी रहे हैं और कहे आसान है जीना बस जिये जाने की इच्छा रखो | 

मैं कहता हूं जब तक जीने की इच्छा रखोगे तब तक कोई आपसे आपकी जिंदगी नहीं छीन सकता , बस हो सके तो थोड़ा सा ज्यादा चाहने की इच्छा को कम कर दो बस , बाकी सब तो आपकी किस्मत है और किस्मत वह तय करेगा जिसको तय करना है अब आप यह सोच रहे होंगे कि किस्मत यह कैसा नकारात्मक शब्द बोल दिया मैंने |  किस्मत बताता हूं आपको | 

          कल बाजार के लिए निकला था तो चार पांच बच्चे सड़क पर हर आते जाते से कहते , दे दो ना भैया दे दो ना दीदी कुछ भी दे दो,  ₹5 ही दे दो हम भी इतनी उम्र में थे तो अपने से बड़ों के पैर नहीं छूना चाहते थे | पापा कहते थे तो पैर छूना पड़ता था | इन को देखो हर एक से ये हाथ जोड़ रहे हैं शायद ये वही है जो अगले जन्म में किसी का सम्मान नहीं किए थे | यह जन्म उसी कर्ज को चुकता करने के लिए मिला है उन्होंने इस जिंदगी में ऐसा क्या गलत किया है पर देखो पैदा ही उस मां की कोख से हुए जिसने मांग कर ही अपना जीवन पाला है | 

          ऐसी किस्मत देना ये  सही नहीं है , यह ऊपर वाले का कोई सही न्याय नहीं है | यह अन्याय किया है उसके माता-पिता ने कि जिस उम्र में उसके हाथ में खिलौने होने चाहिए थे उस उम्र में खाली कटोरी पकड़ा दी है | हां मैं मानता हूं कि भगवान तुम्हारा नाम लेने से जिंदगी कट जाती है पर मैं यह भी  मानता हूं कि अगर जिंदगी काटनी नहीं अच्छे से गुजारनी भी है तो भगवान के नाम के साथ आपको अच्छे कर्म भी करने पड़ते हैं| क्योंकि वह जितना ज्यादा समय आपका कुछ अच्छा करने में लगाता है उससे कम समय वह आपके बुरे कर्मों का नतीजा निकालने में लगाता है |

            इसलिए बस मैं कहना चाहता हूं कि कुछ नहीं से अच्छा है कुछ और,  और जहां कुछ है वहां बहुत कुछ है उन बच्चों ने मुझे कुछ तो सीख दी , जिंदगी में कुछ पाने के लिए कितना विनम्र होना पड़ता है | कितने लोगों के पीछे भागना पड़ता है और  कितनी चीजें करनी पड़ती है | इसलिए मैं बोलता हूं दौड़ने , भागने और गिरने की जरूरत नहीं है बस जरूरत है तो संभल कर चलने की और खुद को खुश रखने की |                                                           .......धन्यवाद





बुधवार, 24 मार्च 2021

आकर्षण की कोई तहजीब नहीं होती !

 उसकी नाक पर उगा हुआ एक छोटा सा दाना --- 

आकर्षण की कोई तहजीब नहीं होती ! 

इन आंखों को पता नहीं कब क्या अच्छा लग जाए। 






किसी का बेतरतीब पहनावा किसी की अजीब हंसी , किसी के बिखरे बाल ,

 किसी के गड्ढे बनते गाल कुछ भी ऐसा ही हाल मेरे आकर्षण का था।

उसकी नाक पर उगा हुआ एक छोटा सा दाना। 

उसके चेहरे के आकर्षण का एक नया केंद्र था।

 आज जिस पर मेरी निगाह एक बार पड़ी और मन बस उसी पर टंग गया | 

मैं खुद को रोकता रहा पर फिर भी मन के बहकावे  में आकर निग़ाह  वहां तक चली ही जाती  ,

और आकर्षण को करीब से महसूस करने की जिद ने  मुझे मजबूर कर दिया 

और मेरी उंगलियां उसकी भौतिकता के प्रमाण के लिए उसे स्पर्श कर ली।



 न जाने क्या सुकून था इस बात में जैसे कोई कल्पना सच हुई हो ऐसा सुकून। ....... thanku 


बुधवार, 13 जनवरी 2021

COMMENCEMENT Meet

 

यही ख्वाब-ए-तमन्ना थी हमारी 

यही बेबाक  इरादा था हमारा 

तुम्हें बेचैन करने को बस 

इतना सा इशारा था हमारा 

इन चार लाइनों से आप इशारा समझ गए होंगे कि

 इस सीपीयू वट वृक्ष की एक डाली मैं भी हूं 

जिस की उपस्थिति आप सभी के ज़हन में आप सभी के कानों में शब्दों के फूल पहुँचाती  

मैं आप सभी दोस्तों को नमन करता हूं और अपनी  चार लाइने  आप सभी को सुनाता हूं 


अदम्य जीवन


चंद अँधियारे डरा रहे हैं मुझको अपनी तानों से ।

मैं विप्लव का अदम्य गीत डरता नही सयानों से ।।


सागर होता है कितना गहरा पर लहरें नहीं डूबा करती हैं ।

विनाश के डर से आशा की ज्योति नहीं बुझा करती है ।।


पहाड़ कितना भी ऊँचा हो पर आसमान नही छुआ करते है ।

पंछि सिर्फ़ अपने हौशले से नभ में स्वच्छंद विचरा करते है ।।


वियोग ,विध्वंस या नास हो अपना या सृष्टि समूल नष्ट हो जाए।

पुनः निर्माण का सुत्र हो तो फ़िर ,क्या से क्या न क्या हो जाए ।।


विवश पलों के आँशु गिनकर ,नया सूत्र तुम बनाते जाओ ।

दुनिया नहीं समझेगी तुमको पर तुम खुद को समझते जाओ ।।


नही कर्म अच्छे करते हैं ,अच्छे कर्म अच्छे करते हैं ।

तुम भी समझो इन बातों को अच्छे कर्म कैसे करते हैं ।।


निज की गीता निज का पुराण

       ना तो निज की राय तुम मरने देना ।

दुनिया थोपेगी धर्म तुझपे

        पर ख़ुद का धर्म मत मरने देना ।।।


दिल भी कोई चीज है पता न था ।

मन कैसे बेचैन होता है पता न था ।।

जब तक मैं नहीं बिछड़ा था इस सीपीयू के कैंपस से 

तब तक प्यार क्या होता है  ये  पता ना था


बारिश का मौसम ना होने पर  ..

ये बरसात दिखाई देती है ,

तेरे शहर में ऐसा क्या है ...

जो ये बात दिखाई देती है,,


माथे पर शंका की रेखा ...

कर्म भाव से लज्जित है ,

निज में डूबा नहीं है कोई ...

सब, द्वेष भाव से सज्जित है ,,

 

उठा इनको भी गलियों से ...

जो अनाथ सड़क पर घूम रहे हैं ,

कैसे बनेगा ये देश, सोने की चिड़िया ...

जब पंख भूखमरी से कटे हुए हैं ,,


 (एक बार उन बच्चों के बारे में जरूर सोचें 

       जो सड़क पर रहने को बेबस है )


बिना  तुम्हारे जीवन मेरा, अलग अधूरा लगता है 

एक तुम्हारे मिल जाने से, सबकुछ पूरा लगता है 

अनबोले सब शब्द तुम्हारे, दिल मेरा ये सुनता है 

एक तुम्हारे मिल जाने से, सबकुछ पूरा लगता है 


साथ रहें मिलजुल के हरपल, बनके महज़ इकाई हम 

हर  लम्हें  को  जीना  सीखें, बनकर  अक्षर ढाई हम 

दिल की ये नादानी सारी, एक नादाँ दिल समझ रहा 

मेरा दिल तेरे दिल की हर धुन पर है अब धड़क रहा 

साथ तुम्हारे अब हर लम्हा सहज सवेरा लगता है 

एक तुम्हारे मिल जाने से, सबकुछ पूरा लगता है 



तेरी आंखों के सामने रहा मगर बुत नहीं बना

इसलिए ही तो तेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं बना ,


माना सभी ने तेरे इंसाफ में थी बहुत सी कमियां

फिर भी तो तेरे खिलाफ कोई कानून नहीं बना


रोकेंगे हर किसी को हम इस प्यार की डगर से 

क्या करें अब इससे आगे का कोई रास्ता नहीं बना


ये रस्सी है मेरे प्यार की से तोड़ मत देना 

इसके सिवा मेरे गले का कोई लिबास नहीं बना


जलती है मेरे नाम से तो जलने दे  प्राण 

तू भी तो किसी के प्यार के काबिल नहीं बना


तिरंगा मेरे जिस्म पर कभी लिपटेगा जरूर 

क्योंकि यह मेरे खून से कोई आंसू नहीं बना


पाना नहीं है कुछ अगर किस्मत से मुझे 

तो खुदा हम गरीबों के हाथ में ये लकीरें मत बना


टूटा था इसी राह पर वो कांच का कमल 

खबरदार, तू   इस राह पर कोई  नक्श मत बना 














सोमवार, 4 जनवरी 2021

Pen Portrait

 


 I am a teacher cum learner ,poet

 Born in Sujanganj, a small town in Jaunpur district of Uttar Pradesh

I completed all my schooling in my town and I have been an average student throughout my schooling.

 I am the one who has the desire to know something and questions on the tongue

 I thought it right to come to Kota for NEET preparation after schooling and I have been living in Kota for the last 5 years

 After failing in NEET exam, I enrolled for Career Point University for B.Sc plus B.Ed degree.

 And today I am just 4 months away from getting my degree.  During the preparations, my mind's literature started coming on love tongue and I grew interested in reading books and doing logical thinking and I sometimes started writing some of my poems too.

During this entire graduation, I have become known as the Coordinator of the college's Hindi Sahitya Club and a lover of poetry and a narrator.

 I post my poems on social media account of Pran's Parinde on Instagram Facebook Twitter ID.  Where many intelligent listeners and readers feel happy reading it and post good comments for our motivation.

     Thank You.....