बुधवार, 9 नवंबर 2022

9 Nov speech

 


देश के वर्तमान में इतिहास की गौरवमयी मुस्कान घोलने वाली वीरों की भाषा बोलने वाली राजस्थान की भूमि को मैं प्रणाम करता हूं| और यहां पर उपस्थित निर्णायक महानुभावों , विदुषी नारी शक्ति तथा मेरी आत्मा के दर्पण पर बनने वाली आप सभी की मनोहर छवि को मैं प्रणाम करता हूं|  

और मैं अपनी बात को एक पंक्ति से शुरू करता हूं कि… 

बीते हुए दिनों के घाव देखने से अच्छा है हम भविष्य के रास्ते से कांटे हटाए !!!! 

हम सभी जानते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जिसका सबसे बड़ा गुण यह है कि, वह भविष्य और समय की मांग को नजरअंदाज नहीं करता बल्कि भविष्य के नएपन के लिए तथा समय के  पैनेपन के लिए खुद को तैयार करता है|  जैसे प्रकृति अपने उद्विकास के रथ पर नए जीव तथा उनकी उन्नतशील प्रजातियों को लेकर आती है| 

 वैसे ही मनुष्य अपने जीवन में नए यंत्र और तंत्र खोज निकालता है जिससे उसके जीवन में सुख और सहजता की मिठास फ़ैल सके मल्टीमीडिया उसी एक सहजता का नाम है जिसमें हम लगभग मीडिया के सभी आयामों को मिलाकर  अपने विषय को और अधिक रोचक दीर्घ प्रभावी और सहज अधिगम के योग्य बनाते हैं|

 वर्तमान समय भारत की नींव में पड़ी विचारधारा "वसुधैव कुटुंबकम" को अपना लेने की ओर इशारा करती है जिसे पूरा करने के लिए हमें एक ऐसे साधन की आवश्यकता है जिससे हम क्षेत्र देश विदेश की दूरी को कम कर सके और हम उनके विचारों से जुड़ सकें उनकी बातों को समझ सके और अपनी बात उन तक पहुंचा सके|

 अतः इन सभी बातों की कसौटी पर जो सबसे अधिक उत्कृष्ट और प्रभावी साबित होता है उसका नाम है मल्टीमीडिया जो व्यवसाय, शिक्षा, मनोरंजन, घर, सार्वजनिक स्थान की उन्नति के लिए अपने इमेजेस, ऑडियोज, वीडियोस, ग्रैफिक्स, टेक्स्ट, एनीमेशन जैसे सभी अंगों द्वारा कार्यरत है|

मैं विद्या के पावन मंदिर में खड़ा हूं तो मेरी बात का झुकाव शिक्षा की ओर होना लाजमी है, आज शिक्षा किसी व्यक्ति वर्ग विशेष की नहीं, बल्कि समाज के आखिरी व्यक्ति की चाहत और जरूरत है | अतः शिक्षा के अंत्योदय के लिए जिन कारकों का उपयोग सबसे अधिक प्रभावी रूप से किया जा रहा है, उसका प्रमुख नाम मल्टीमीडिया है|  जब कोई एक अच्छा शिक्षक अपने ज्ञान को टेक्स्ट वॉइस एनिमेशन के माध्यम से विद्यार्थी तक पहुंचाता है तो उस शिक्षा का प्रभाव चिरंजीवी रहता है और इस ज्ञान से पूर्ण बच्चा देश को एक नई दिशा देने का सामर्थ्य रखता है| 



ठाट बाट के धौंस तुम्हारे होंगे तुम ही जानो यहां भूख से खुलती आंखें और भूख पे बंद होती मानो


तारीफों में सिर्फ यही नहीं मुसलसल कि तुम उसकी आंखों की बात करो 

मैंने उसे देखा है जाते हुए तुम उसके आने की बात करो


मन के आंगन में कुंठाओं का राग न उपजे तो अच्छा है 

आंशु से धुले इन चेहरों पर कोई दाग न उपजे तो अच्छा है 

कोमल कुंचित पंखुड़ियों पर आज आया है पहला मधुकर 

स्वाद मोहब्बत का लेकर उड़ जाए तो अच्छा है


मन के आंगन में कुंठाओं का राग न उपजे तो अच्छा है आंशु से धुले इन चेहरों पर कोई दाग न उपजे तो अच्छा है कोमल कुंचित पंखुड़ियों पर आज आया है पहला मधुकर स्वाद मोहब्बत का लेकर उड़ जाए तो अच्छा है

बहुत देर से सोच रहा हूं तेरी तस्वीर देख कर यह मुस्कान तेरे चेहरे से पिघल क्यों नहीं जाती मैं तो चलो परदेस में हूं तन्हा हूं मजबूर हूं तुम मेरे जहन से निकलकर कर क्यों नहीं जाती

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