शनिवार, 29 अप्रैल 2023

खून का कतरा

 एक दिन जमे हुए खून के कतरे से बात कर रहा था मैं 

बहुत खुश था बदन के थका देने वाले सफ़र से परे 

धूल की इस बेनाम दुनिया में आकर 

हालांकि अभी भी उसका पैतृक नाम जिंदा है उसमें  

पर वो नहीं चाहता कि कोई उसे उठाए और नाम लगी कांच की पट्टी पर चिपका दें

 वो तो अभी खून का कतरा भी नहीं रहना चाहता , सुबूत तो बहुत दूर की बात है |

 दुनिया की सारी चीखों  को पिघलाकर अगर एक शब्द बनाया जाए तो

उसका रूप हूबहू बेबसी से मिलेगा 

क्योंकि चीखें बेवजह के सितम की कोख से जन्म लेती हैं 

और इस दुनिया के कमजोर लोगों के बदन से चिपक जातीं है 

जो परिस्थितियों के मारे हैं 

जिन्हें वक्त ने अपनी नाव से नीचे उतार दिया है 

और वे बेबस है इस दुख के समुंदर में डूब जाने के लिए।… 




शनिवार, 22 अप्रैल 2023

अन्न ब्रह्म है...

 अन्नब्रह्मा रसोविष्णुः

भोक्ता देवो महेश्वरः।

एवम् ज्ञक्त्व तु यो भुन्क्ते

अन्न दोषो न लिप्यते॥

अन्नब्रह्मा रसोविष्णु:

भोक्ता देवो महेश्वर: ।

एवम ज्ञातत्व तू यो भुंक्तते

अन्न दोषो न लिप्यते..

अन्न ब्रह्म है, उसमें सार विष्णु है, और जो उसका उपभोग करता है (भोगता है) वह स्वयं महेश्वर है। अगर आप यह जान लें तो खाने में कोई भी अशुद्धता आपका हिस्सा नहीं बनेगी।

अन्नपूर्णा

विवरण

खाने से पहले की जाने वाली प्रार्थना या आह्वान। भोजन ग्रहण करने की क्रिया को यज्ञ (यज्ञ) माना जाता है और यह प्रसाद जटाराग्नि नामक दैवीय अधिकार को जाता है, जो पेट में पाचक अग्नि है। यह वह सिद्धांत है जो खाए गए भोजन को एक ऐसे रूप में तोड़ता है जिसे पूरे शरीर के लिए रक्त के माध्यम से आपूर्ति की जा सकती है। अन्न (अन्नम) में जो रचनात्मक ऊर्जा है वह ब्रह्म है। शरीर में पोषक ऊर्जा (रस) विष्णु हैं। भोजन का शुद्ध चेतना में परिवर्तन ही शिव है। यदि आप यह जानते हैं, तो आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन में कोई भी अशुद्धता कभी भी आपका हिस्सा नहीं बनेगी।

इस श्लोक का उच्चारण भोजन करने से पहले किया जाता है ताकि भोजन करते समय भी हमारा ध्यान भोजन पर केन्द्रित रहे और हम भोजन के महत्व को समझकर ही भोजन करें।


अपना भोजन करते समय, हमें "अन्नम ब्रह्म" (भोजन ईश्वर है) शब्दों का उच्चारण करना चाहिए; रासो विष्णुहु (अन्न का सार विष्णु है)। अन्न ईश्वर है। यह शरीर में जाकर शरीर के सभी अंगों को अपना सार प्रदान करता है। यह वास्तव में रक्त और ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। भोक्तोदेवो महेश्वरः (अन्न ग्रहण करने वाला महेश्वरः है)। यह सिद्धांत पूरे विश्व को ज्ञान सिखाता है। अन्नं ब्रह्म, रासो विष्णुहु, भोक्तोदेवो महेश्वरः- ये तीनों क्रमशः शरीर, मन और कर्म के अनुरूप हैं।

मनस्येक वाचस्येकम कर्मण्येकम महात्मानाम

(जिनके विचार, शब्द और कर्म पूर्ण सामंजस्य में हैं, वे महान हैं।)

विचार, वचन और कर्म की एकता रीथम है ।

वे ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर की त्रिमूर्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। अत: इन तीनों की पवित्रता के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए।


भगवान को भोग लगाकर भोजन को शुद्ध करें।

अन्नम ब्रह्म । अन्न को ही ब्रह्म का रूप समझो।

रासो विष्णुहु। आपके शरीर के सभी भागों में फैलने वाले भोजन का सार विष्णु स्वरूप है।

भोक्ता देवो महेश्वरः। भोजन का भागी शिव सिद्धांत का अवतार है। जब मनुष्य ऐसी पवित्र भावनाओं को विकसित करता है, तो वह स्वयं शिव बन जाता है -   


ॐ सहनाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवाव है।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषाव है।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।।

भावार्थ:
ओम!
हे परमेश्वर!
हम छात्र और शिक्षक दोनों की एक साथ रक्षा करें,
हम छात्र और शिक्षक दोनों का एक साथ-साथ पोषण करें,
हम दोनों साथ मिलकर महान ऊर्जा और शक्ति के साथ कार्य करें एवं विद्या प्राप्ति का सामर्थ्य प्राप्त करें,
हमारी बुद्धि तेज हो,
हम एक दूसरे से ईर्ष्या न करें।


ओम सहाना वावतु यजुर्वेद से से लिया गया एक मंत्र है। यह एक शांति मंत्र है। इस मंत्र को हमेशा योग सत्रों की शुरुआत से पहले या स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना के रूप में भक्ति के साथ पढ़ने की परंपरा हैं।



अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे!।

ज्ञान वैराग्य-शिद्ध्‌यर्थं भिक्षां देहिं च पार्वति॥11॥


Annapurne sada purne shankr pranavallabhe |

gyan veragya shiddhayartham bhiksham dehi cha parvati ‖ 11 ‖


अर्थ:- हे अन्नपूर्णे! तुम्हीं सर्वदा पूर्ण रूप से हो, तुम्हीं महादेव की प्राणों के समान प्रियपत्नी हो। हे पार्वति! तुम्हीं ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के निमित्त भिक्षा प्रदान करो, जिसके द्वारा मैं संसार से प्रीति त्याग कर मुक्ति प्राप्त कर सकूं, मुझको यही भिक्षा प्रदान करो।


ॐ ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। 

ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्म समाधिना।। 4.24।।


brahmarpanam brahm havira brahmagno brahamnahutam

brahmev ten gantavyam brahmkarm samadhinaam


अर्थ:- अर्पण (करना) ब्रह्म है, हवि (हवन में प्रयोग होने वाला द्रव्य) ब्रह्म है, अग्नि ब्रह्म है, हवि देने वाला भी ब्रह्म है .. (इस प्रकार जानते हुये) जो ब्रह्म में रचा-बसा रहते हुये (मन में रखते हुये) कर्म करता है वह ब्रह्म को जाता है

'युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु। युक्तस्वप्नाव बोधस्य योगो भवति दु:ख।।

युक्त आहार -

यह संतुलित भोजन से जुड़ा है। ऐसी बैलेंस डाइट जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, मिनरल्स, विटामिन और पानी जैसे छह तत्व होते हैं। हालांकि खानपान में इन पोषक तत्वों को शामिल करना या नहीं करना व मात्रा व्यक्ति विशेष के किसी रोग से पीड़ित होने पर निर्भर करती है। यदि किसी को डायबिटीज है तो उसे कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें चीनी, आलू आदि खाने से मना किया जाता है और अगर यूरिक एसिड ज्यादा है तो प्रोटीन डाइट जैसे पनीर, दूध आदि से परहेज करना होता है।


युक्त विहार -

इसका तात्पर्य संतुलित व्यायाम से है। इसके अनुसार व्यक्ति को सुबह खाली पेट 40 मिनट और रात के भोजन के बाद 20 मिनट टहलना चाहिए। साथ ही विशेषज्ञ की सलाहानुसार योगासन और प्राणायाम करना चाहिए।

सामान्य युक्त आहार -

मोटे आटे की रोटी, उबली हुई सब्जियां (जिसमें नमक, मिर्च-मसाले बेहद कम मात्रा में हों), अंकुरित अनाज, सलाद, छाछ या दही। लेकिन इस आहार के साथ चिकनाई, खटाई मैदे से बनी चीजें, ठंडी चीजें, अधिक मात्रा में मसालों के प्रयोग से परहेज करें।

पानी : प्रत्येक व्यक्ति को रोजाना कम से कम सवा तीन लीटर (८-10 गिलास) पानी जरूर पीना चाहिए।




रविवार, 16 अप्रैल 2023

प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें

 प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें   


किसी दिन वक्त जब मिलाएगा तुमको 

तब मैं पूछूंगा तुमसे 

प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी 

जितनी की साँसें   

जितनी की भूख 

जितनी की माया 

जितनी की समाज की छाया 

क्यों मोहब्बत इन सभी की कतारों में सबसे पीछे खड़ी है 

जहाँ तक की सिर्फ इंतजार ही जा सकता है 

मिलन का उपहार नहीं 

क्यों मन पर किसी और का और तन पर किसी और का नाम लिखा है 

क्यों मोहब्बत के हिस्से में बस शाम लिखा है 

क्यों मोहब्बत के हिस्से में सिर्फ इंतजार लिखा है 

क्यों यादों का उपहार देने वाला खुद नहीं मिल जाता 

क्यों मन को प्यार देने वाला खुद नहीं मिल जाता 

किसी दिन वक्त जब मिलाएगा तमसे 

तब मैं पूछूंगा,  प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें   





शुक्रवार, 14 अप्रैल 2023

मुबहम बातें


मैं बैठा चुपचाप यहाँ तेरी याद में खोया हूँ। 

तेरी मुबहम बातों में बिन जागा बिन सोया हूँ।


 इस दुनिया में मर्जी की बातें और कभी तुम कर लेना, 

 पहले बताओ इस दिल के बदले में क्या पाया क्या खोया हूँ?




अपनी किस्मत पर कभी ऐतबार नहीं करते। 

हम जमाने में किसी से एतराज नहीं करते।


कोई आ जाए तो खुशामद में लग जाते हैं।

कोई ना आए तो कभी इंतजार नहीं करते।


कभी लगता है कि करते हैं तुमसे प्यार 

कभी लगता है यार!!!! नहीं करते।





इश्क की बारिश में डूबकर मर गए। 

हम तुम्हारी याद में ऊबकर मर गए।


क्या दौर है जमाने में मोहब्बत का 

हम अपनी ही जात से जूझकर मर गए?