रविवार, 16 अप्रैल 2023

प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें

 प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें   


किसी दिन वक्त जब मिलाएगा तुमको 

तब मैं पूछूंगा तुमसे 

प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी 

जितनी की साँसें   

जितनी की भूख 

जितनी की माया 

जितनी की समाज की छाया 

क्यों मोहब्बत इन सभी की कतारों में सबसे पीछे खड़ी है 

जहाँ तक की सिर्फ इंतजार ही जा सकता है 

मिलन का उपहार नहीं 

क्यों मन पर किसी और का और तन पर किसी और का नाम लिखा है 

क्यों मोहब्बत के हिस्से में बस शाम लिखा है 

क्यों मोहब्बत के हिस्से में सिर्फ इंतजार लिखा है 

क्यों यादों का उपहार देने वाला खुद नहीं मिल जाता 

क्यों मन को प्यार देने वाला खुद नहीं मिल जाता 

किसी दिन वक्त जब मिलाएगा तमसे 

तब मैं पूछूंगा,  प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें   





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