प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें
किसी दिन वक्त जब मिलाएगा तुमको
तब मैं पूछूंगा तुमसे
प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी
जितनी की साँसें
जितनी की भूख
जितनी की माया
जितनी की समाज की छाया
क्यों मोहब्बत इन सभी की कतारों में सबसे पीछे खड़ी है
जहाँ तक की सिर्फ इंतजार ही जा सकता है
मिलन का उपहार नहीं
क्यों मन पर किसी और का और तन पर किसी और का नाम लिखा है
क्यों मोहब्बत के हिस्से में बस शाम लिखा है
क्यों मोहब्बत के हिस्से में सिर्फ इंतजार लिखा है
क्यों यादों का उपहार देने वाला खुद नहीं मिल जाता
क्यों मन को प्यार देने वाला खुद नहीं मिल जाता
किसी दिन वक्त जब मिलाएगा तमसे
तब मैं पूछूंगा, प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें

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