तू जो हो सामने तो पलकों को झपकने नहीं देता,
साँसें पूछतीं हैं इशारों में मगर झूमने नहीं देता।
हाँ देता हूँ धड़कनों को थोड़ी सी इजाजत
फिर दिल को हौले से तेरा होने नहीं देता।
मौसम है हिज्र का तो बरसने दो आँसू ;
मैं आँखों को लबालब कभी होने नहीं देता।
एक दिन मैंने देखा था तेरे हाथों में लहू ;
तब से ही रगों में इसे दौड़ने नहीं देता।
इस बात पर हुई है जमानत मोहब्बत की;
कि मैं जिंदगी भर रहूँगा अमानत मोहब्बत की।
तू रुठी है तो एक बार मनाने मोहब्बत जाए,
मैं भी तो जरा देखूँ शयानत मोहब्बत की।
जख्म दर जख्म की मुझको कहानी होने दो।
प्यास का क्या है मुझको तो बस पानी होने दो।
पक्की मिट्टी से बने ईटों की कब्र में लोग
ना जाने क्यों जिंदगी दफन कर रहे हैं?
स्त्रियां नदी की कोमल धाराएं जैसी होती हैं जो पुरुष के कठोर पत्थर जैसे मन पर।इतनी कोमलता से वार करती हैं कि पुरुष को पता ही नहीं चलता कि कब उसके बीच में एक प्रेम की धारा बहने का सही मार्ग बन गया?
एक छोटी आँख से रूह की दिवार तक।
आदमी मजदूर है मौत के दीदार तक।
जिंदगी के खराबे की मिशाल ये है की
खुदखुशी में भी हमारे कभी खुशी नहीं रही
अभी अभिशाप के बस शगुन हुए हैं
अभी दुर्दांत होनी है कहानी!
स्वार्थ की जिह्वा पर देखो,
चुप है कई नितांत कहानी।
मानवीय मूल्यों को तुमने तोड़ करके
जियो हो धर्म से मुंह मोड़ कर के।
भला क्या धर्म उसका साथ देगा
जो जमाने भर को हरदम त्रास देगा?
तुम्हें ना नर ना नारी में दिखा है।
ना फूलों भरी किसी क्यारी में दिखा है।
तुम्हें तो शोर करना है जहाँ में
बस हर दम होड़ करना है जहाँ में।
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