रविवार, 28 मई 2023

संसद




 लिखो हर आँख में सपनों की दुनिया 

बजे हर कान में जयघोष ध्वनियाँ  

तुम्हारी जीत का स्वर्णिम पल है अब तो 

उठो जागो यही कल है अब तो 

नहीं संकट का कोई वर है अब तो 

हमारे कल का नया घर है अब तो 


यहीं उम्मीद की कलियों पे फिर से बात होगी 

हर दीद में सुकून की फिर रात होगी 

हां उसी दर को ठिकाना मिल गया है 

हमारे संघर्ष को जमाना मिल गया है 


खेत की मेड़ों पर चलता हो जो कोई 

किसी बेचारगी में पलता हो जो कोई 

हर एक दीन के कंधे को बंधु मिल गया है 

हमारे मंथन को सिंधु मिल गया है 


ये ईंटों का नहीं त्यागो का भवन है 

ये सुभाषित भगत का बस चंद्र वन है 

इसी में पलके हम सब राम होंगे 

इसी में धन्य सारे काम होंगे 


देखो,  हर आँख में यही ख्वाब थे ना 

किसी ने तू बनाया पर सहज में आप थे ना

ये तुम्हारे पौरुष का ही तो फल है 

जो तुमने सोचा था वही तो कल है


जय हिंद जय भारत जय संसद







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