जाड़ा में आके घरवा में हमरे गट्टा बनावेला
सैंयाँ हमरा दिल्ली में जाके काला खट्टा बनावेला
चार पहर की रात में सैंयाँ
तीन में भिगो वेला चीनी हो
एक पहर में बीन बजावे
कितना लहर हम गिनी हो
पूरा बदन में लिसा लपेटे जब गट्टा बना वेला
सैंयाँ हमरा दिल्ली में जाके खट्टा बना वेला
नई-नई जब आईनी हम गवने खूब भइल खातिरदारी हो
सैंयाँ हमका खूब लुभावें नाहीं करावें बेगारी हो
एक-एक चुम्मा पे दस-दस चुम्मा आइसन रहे तैयारी हो
सैंयाँ हम का खूब लुभावें का का बताई तेवारी हो।
चोली लियावईं लहंगा लियावईं बीता से नापईं रजाई हो
पहिन के निकली जब हम बहरे जरईं सभई हरजाई हो
घरवा में हमरे पसंद के कितना चीज पडल बा सवाई हो
सैंया हमारे दरद से पहले खूब लियावईं दवाई हो।
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