मिटाकर चेहरा आजाद कर दिया हूँ
वो लम्हा जो रूक गया था तेरी तस्वीर में
इस मुंतशिर को जान से जाने नहीं देना
तुम ख्वाब में भी मुझे कुछ पाने नहीं देना
उबलते हुए खून की भाप हैं आंखें
इस दिल के समुंदर की नाप हैं आंखें
वैसे तो मैं सब कुछ हूं अपने बदन का
मगर मेरे बदन की आप हैं आंखें
मरकर भी बदन के वो जिंदा रहेगा
ये दिल है आशिक का ताबिंदा रहेगा
तुम ढूंढ रही हो जिसे वो कब का मर गया
तुम पा रही हो जिसे वो शर्मिंदा रहेगा
होके रुसवा तेरी कहानी से नहीं जाना
सूख जाना मगर रवानी से नहीं जाना
तुम पुकारते हो जिसे दिद की दीवारों से
उस शख़्स को उतर कर पानी से नहीं जाना
मेरी बातें सुनकर सहम जाने वालों
मेरी ख्वाहिशों का दीदार क्या करोगे
जिंदगी इतनी तेजी से बढ़ रही है आगे
तुम रुक कर मेरा इंतजार क्या करोगे
जुनूँ के समुंदर से कहीं पार मिल
यार जब भी मिल पहली बार मिल
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