नए उजालों की दस्तकों से उछल पड़ेंगे ख़्वाब सारे
मैं दरमियां जब रो पडूंगा मचल पड़ेंगे आब सारे
मेरी जवानी की जिंदगी में ये कैसे ख़्वाब लिख रही हो
मैं जिनसे हूँ दूर बैठा तुम उन्हें पास लिख रही हो
घर से बिछड़े हुए मुसाफिर कभी न मंजिल पा सकेंगे
होके दरमियाँ की कहानी घर कभी ना जा सकेंगे
ये तिल तुम्हारे चेहरे पर इस तरह दिखता है
जैसे गूगल मैप में मेरा अपना गांव।
दीवानों की उस गली को छोड़ कर
मैं अपनी जिंदगी से मुंह मोड़ कर
मैं मोहब्बत का हेतराम करने आया हूं।
मैं आप सभी को राम-राम करने आया हूं।
जब से उतर गई है मेेरे पीठ पर से वो ,
तब से जिंदगी का वजन ज्यादा लग रहा है ।
लुत्फ होठों पर सिमट गया है तेरे
बेबसी लफ्जों में नाच रही है मेरी
आँखें रो रो कर कर रही है सबसे
मुझको याद आ रही है तेरी।
सितम की आँख में तो सितारा हो नहीं सकता ;
जहाँ पर प्रेम हो वहाँ किनारा हो नहीं सकता।
दिलों की डोर है जो हम सभी को साथ रखती है ;
यहाँ पर सिर्फ हमारा और तुम्हारा हो नहीं सकता ।।
किनारे पर आकर डूबी है कश्ती मेरी लोग तालियां बजा रहे हैं हौसला देखकर।
नयन के दीप हैं उन बिन उजाला हो नहीं सकता।
जैसे शिव है वैसा जगत में कोई और निराला हो नहीं सकता।
प्रलय को गोद में ठाडे सृजन को साज करते हैं!
वो भोले ही तो है जो हमारे सारे काज करते हैं।
दो बातें क्या कर ली, मां से
दुख उदास हो गए हैं।
ना हो ख्वाहिशों की तिजारत कभी तमन्नाएं पूरी हो सब अभी।
मिले दिल सभी से दिलकशी हो जैसे।मिले साथ सबका हमनशी हो जैसे।
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