ये हुनर तुम्हें सिखाना नहीं पड़ेगा,
मोहब्बत है तो फिर बताना नहीं पड़ेगा।
आंखें खुद ही देंगी जवाब सभी को
तुम्हें बार-बार होठ हिलाना नहीं पड़ेगा।
कोई ना दे साथ तो अपने साथ चलो
भीड़ बहुत है जमाने की अपने पास चलो
हो रही है थकान लंबे रास्तों से तो
करके कहीं दो पल इंतजार चलो।
तन्हाइयों का मौसम है जरा साथ चलो
करके मेरा भी जरा इंतजार चलो।
इतना तेज भी नही की साथ छूट जाए मेरा
और इतना धीमा भी नहीं मेरे बाद चलो।
बहुत आ रही थी हिचकी पानी पी लिया तुमने
मुझको करके यूं बर्बाद जिंदगी जी लिया तुमने
मेरा तो चाक दामन है गरीबी झांकती जिससे
पर सुना है मखमली कपड़े का दामन सी लिया तुमने
यहाँ तो अब भी आंखों से वही धार बहती है
पर सुना है मेरे हिस्से का आंसू पी लिया तुमने।
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