सफलता ढलान है तो खुद को पानी बना लेना
सफलता बात है तो खुद को कहानी बना लेना
सफलता रात है तो खुद को चांदनी बना लेना
सफलता धुप है तो खुद को आंचल बना लेना
सफलता सुराख है तो खुद को रोशनी बना लेना
सफलता धूल है तो खुद को पाँव बना लेना
सफलता पेड़ है तो खुद को छाँव बना लेना
सफलता सूर्य है तो खुद को light बना लेना
सफलता IIT और NEET है तो खुद को BANSALite बना लेना
अगर शिक्षा सफलता का कारक है तो बंसल उसका अविष्कारक है।
सर्वप्रथम मैं अपनी बात प्रारंभ करूं उससे पहले
हम सभी की आन बान शान मेरी जान तिरंगे को मैं प्रणाम करता हूं
और एक बात कहता हूं कि
दीवानगी जख्म को मलहम बना देती है
किसी अनजान को भी हमदम बना देती है
तुम इस तिरंगे की मासूमियत को तो देखो जरा
इसकी एक झलक दिलों को मातरम बना देती है
आज हम सभी बड़े धूमधाम के साथ आजादी के इस पर्व को मना रहे हैं और मां भारती के वीर सपूतों को याद कर रहे हैं जिनके त्याग और बलिदान से ये आजादी का दिन हम सभी को नसीब हुआ है
और एक बात याद रखना ये आजादी हमें खैरात में नहीं मिली
ये आजादी हमारे बुजुर्गों के संघर्ष उनके खून पसीने की कमाई है , और हम सभी जानते हैं कि..
मोहब्बत रेत को मोती बना देती है
भूख घास को भी रोटी बना देती है
और अगर जज्बा ना हो आजाद रहने का
तो दुनिया हर शख्स को कैदी बना देती है
आज हम शारीरिक रूप से गुलाम तो नहीं पर मानसिकता की गुलामी से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाए है
हम आज भी अपने आप को छोटा समझने की भूल करते हैं
हम आज भी अपने लोगों को कमजोर समझने की भूल करते हैं
हम आज भी अपने संसाधनों पे विश्वास नहीं रखते ,
हम आज भी अपने आप से कोई आस नहीं रखते ,
हम आज भी अपने जीवन का लक्ष्य बताने से डरते हैं ,
हम आज भी दूसरों के बहकावें में मरते हैं ,
और इन सभी कमियों को दूर करने का सिर्फ एक ही उपचार है.. वो है शिक्षा
शिक्षा ऐसी जैसे rainbow हो जिसमे जीवन के हर एक पहलू का रंग समाया हो
जिसमे निति हो, जिसमें नैतिकता हो, जिसमें नायक हो , जिसमें नेह हो , जिसमे नम्रता हो , जिसमे निर्णायकता और निर्मलता हो
और मुझे ये कहते हुए ख़ुशी हो रही कि आपके इस विद्यालय में आपके इस स्कूल में जीवन के सभी मूल्यों का वरदान दिया जा रहा हैं
और एक ऐसा ही संस्थान , एक ऐसा ही परिवार
जिसको हम आदर से BANSAL CLASSES के नाम से जानते हैं
जिस परिवार का मैं खुद भी हिस्सा हूँ
वो दिन रात (24x 7) बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए शिक्षा का प्रकाश लिए विद्यार्थियों साथ-साथ चल रहा हैं
और मेरी एक बात याद रखना आप लोग
" सफलता दौर से नही आती
सफलता तौर से आती ;
उसको पाने का एक तरीका होता है और वो तरीका वही बता सकते है जिनको उसका अनुभव हो
और अनुभव बंसल क्लासेज का , उस वक्त से है जब इस भारत भूमि पर
कोचिंग नाम की चिड़िया उड़ती भी नहीं थी
तब से श्रद्धेय बंसल जी ने अपनी मेहनत और लगन से कोटा को कोचिंग हब बना दिया था
जिसकी आज अनेको नेक शाखाएँ पूरे भारत में इस शिक्षा और मार्गदर्शन देने का काम कर रहीं हैं .....
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें