रविवार, 18 जनवरी 2026

 आज से 10 वर्ष पूर्व जब मैं इसी धरती से रात में साढ़ेदस बजे रिक्शा पकड़ के  प्रयाग राज स्टेशन के  लिए गया था तब मैं गंगा जी का यही शास्त्री पुल पार करते समय सोच रहा था कि मैं वहाँ क्यों जा रहा हूँ तब जवाब mila था कि शायद मैं जिस lakshya की Kalpana ke साथ चलना चाहता हूँ उसके लिए उसके मार्गदर्शन ke लिए सबसे अच्छे log कोटा में ही मिलेंगे और पूरे 9 वर्ष वहाँ व्यतीत करने ke बाद samay की jo सबसे बड़ी विशेषता है कि वो बदलता ज़रूर है और वो बदला 2 October १९९९ इसी gyan की dharti पे जन्मा एक व्यक्ति जिसने shiksha की दुनिया में क्रांति लाई और हम सभी को परिवार बिछड़ने ke dard से door kiya और जिस गुणवत्ता ke लिए हमें यहाँ 700 -800 kilometre door जाना पड़ता था आज उसी को 7-8 kilometre में बदल diya है वहीं मॉड्यूल वहीं DPP भी वही शिक्षक वही व्यवस्था और उससे अच्छा management आप सभी ke आंगन तक लेकर आए हैं वो कोई और नहीं हमारे ही आंगन में पनपा 1 पौधा jo आज वटवृक्ष बन gaya है जिनका नाम shri ALAKH PANDAEY JI है

ज़ख्म की भरने का इन्तज़ार कौन करे

 ज़ख्म के भरने का इन्तज़ार कौन करे 

वो ख़ूबसूरत है इससे इनकार कौन करे 

सब दे रहे हैं दिलासे की लौट आएगा एक दिन 

समझ कह रही है कि परिंदों का इंतज़ार कौन करेगा



ये दुश्मनी नहीं फ़ितरत है 

मै चराग हूँ जलता रहूंगा


भाग्य हिम्मत के आगे विवश होती है 


जिस तरह उम्मीद कि टूटे हैं सब बांध प्यारे 

 उस तरह तो आसमान से टूटते नहीं है एक भी तारे


ज़रा साथ रात के आग़ोश में सूरज क्या छुपा 

जुगनूओं  ने  सरदारी का इश्तिहार दे दिया 


दिल को समझा रहा हूँ 

चलो मैं आ रहा हूँ मैं 

आप मुझसे बेवजह ख़फ़ा है 

मैं ये आपको बतला रहा हूँ 


ग़ुब्बारे नहीं हैं जो  चंद हवा से मग़रूर हो जाएंगे 

कुछ दिन इंतज़ार करिए हम भी मशहूर हो जाएंगे


मन्नतों के धागों से पीपल रंगीन हो गया 

तेरे मेरे इश्क़ 💕 का मामला संगीन हो गया


करते हैं प्यार मगर इजहार नहीं करना 

मिलने को बुलाती है मगर मुलाक़ात नहीं करना 

बुरा है दिल का हाल मगर हाल नहीं कहना

बदल गया कैलेंडर तो क्या नया साल नहीं कहना 

जब तक जारी है कोशिशें जीत की 

तब तक हार को हार नहीं कहना


आने वाला वक़्त देखिए 

बाहें अपनी सख़्त देखिए 

आ रहा कि नहीं आ रहा 

आँखों में अपने रक्त देखिए


ज़रा सा रात के आग़ोश में सूरज क्या गया  

 जुगनूओं ने अपनी सरदारी का इश्तहार दे दिया 


जंग में  दुनिया के  साथ  नहीं  लड़ना 

हो जाए कोई बात तो,हाथोहाथ नहीं लड़ना

कुछ वक़्त लेना तैयारी में जंग से पहले 

मिल जाएगी मंजिल इस इंतज़ार में नहीं लड़ना