रविवार, 18 जनवरी 2026

ज़ख्म की भरने का इन्तज़ार कौन करे

 ज़ख्म के भरने का इन्तज़ार कौन करे 

वो ख़ूबसूरत है इससे इनकार कौन करे 

सब दे रहे हैं दिलासे की लौट आएगा एक दिन 

समझ कह रही है कि परिंदों का इंतज़ार कौन करेगा



ये दुश्मनी नहीं फ़ितरत है 

मै चराग हूँ जलता रहूंगा


भाग्य हिम्मत के आगे विवश होती है 


जिस तरह उम्मीद कि टूटे हैं सब बांध प्यारे 

 उस तरह तो आसमान से टूटते नहीं है एक भी तारे


ज़रा साथ रात के आग़ोश में सूरज क्या छुपा 

जुगनूओं  ने  सरदारी का इश्तिहार दे दिया 


दिल को समझा रहा हूँ 

चलो मैं आ रहा हूँ मैं 

आप मुझसे बेवजह ख़फ़ा है 

मैं ये आपको बतला रहा हूँ 


ग़ुब्बारे नहीं हैं जो  चंद हवा से मग़रूर हो जाएंगे 

कुछ दिन इंतज़ार करिए हम भी मशहूर हो जाएंगे


मन्नतों के धागों से पीपल रंगीन हो गया 

तेरे मेरे इश्क़ 💕 का मामला संगीन हो गया


करते हैं प्यार मगर इजहार नहीं करना 

मिलने को बुलाती है मगर मुलाक़ात नहीं करना 

बुरा है दिल का हाल मगर हाल नहीं कहना

बदल गया कैलेंडर तो क्या नया साल नहीं कहना 

जब तक जारी है कोशिशें जीत की 

तब तक हार को हार नहीं कहना


आने वाला वक़्त देखिए 

बाहें अपनी सख़्त देखिए 

आ रहा कि नहीं आ रहा 

आँखों में अपने रक्त देखिए


ज़रा सा रात के आग़ोश में सूरज क्या गया  

 जुगनूओं ने अपनी सरदारी का इश्तहार दे दिया 


जंग में  दुनिया के  साथ  नहीं  लड़ना 

हो जाए कोई बात तो,हाथोहाथ नहीं लड़ना

कुछ वक़्त लेना तैयारी में जंग से पहले 

मिल जाएगी मंजिल इस इंतज़ार में नहीं लड़ना 




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