आज से 10 वर्ष पूर्व जब मैं इसी धरती से रात में साढ़ेदस बजे रिक्शा पकड़ के प्रयाग राज स्टेशन के लिए गया था तब मैं गंगा जी का यही शास्त्री पुल पार करते समय सोच रहा था कि मैं वहाँ क्यों जा रहा हूँ तब जवाब mila था कि शायद मैं जिस lakshya की Kalpana ke साथ चलना चाहता हूँ उसके लिए उसके मार्गदर्शन ke लिए सबसे अच्छे log कोटा में ही मिलेंगे और पूरे 9 वर्ष वहाँ व्यतीत करने ke बाद samay की jo सबसे बड़ी विशेषता है कि वो बदलता ज़रूर है और वो बदला 2 October १९९९ इसी gyan की dharti पे जन्मा एक व्यक्ति जिसने shiksha की दुनिया में क्रांति लाई और हम सभी को परिवार बिछड़ने ke dard से door kiya और जिस गुणवत्ता ke लिए हमें यहाँ 700 -800 kilometre door जाना पड़ता था आज उसी को 7-8 kilometre में बदल diya है वहीं मॉड्यूल वहीं DPP भी वही शिक्षक वही व्यवस्था और उससे अच्छा management आप सभी ke आंगन तक लेकर आए हैं वो कोई और नहीं हमारे ही आंगन में पनपा 1 पौधा jo आज वटवृक्ष बन gaya है जिनका नाम shri ALAKH PANDAEY JI है
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