इतना गहरा उतर गया दिल में की
आँखों से इश्क़ के ख़ज़ाने निकल आए!
किसी चुप मत कराओ एक दिन सब ख़ामोश हो जाएंगे
कई आए हैं कई आएंगे मगर एक दिन सब चले जाएंगे!
हूँ नहीं हुंकार बनो
दोस्त नहीं यार बनों
इससे पहले कि वक़्त आ जाएँ
वक़्त से पहले तैयार बनो !
नज़रिया नज़र से अलग हो रहा है
पड़ा है बिस्तर पर पलंग रो रहा है
इक मर्तबा सिमट कर चली क्या गयी हो
बदन से बिछड़ कर अलंग रो रहा है !
वो जो तूफ़ान के दरिया को बंजर कर दे
ज़ंग लगी चादर को भी खंजर कर दें
मैं उसी कुनबे की पंचायत का सलाहकार हूँ मैं
ज़रा ग़ौर से देखिए कलाकार हूँ मैं !
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