मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

A squirrel in courtyard

A squirrel in courtyard  






QUOTES 4:- दूसरों को अपशब्द कहने वाला पहले मन में खुद को वो शब्द बोलता हैं  ! 



 
          एक गिलहरी ऑंगन में ....
                          कुछ दाना चुनने आती है ,
         चंचलता के दीप जलाकर आँखों में ले आती है ,,

        क्या इरादा क्या रंजिश क्या मिठास है दिल में 
           जो हर रोज सुबह होते ही दिखाने चली आती है ,

         मैंने भी सोच लिया है अब ये ,उसको खूब चिढ़ाऊँगा 
            दाना रखके पास में अपने दूर नहीं मैं जाऊँगा  ,

         किया इरादा बन्दिश भी की पर कुछ हि देर में पिघल गया 
             जब उसने अपने दोनों पैरों को हाथ बनाकर जोड़ लिया, 

          सच में बहुत प्यारी है हम सब की बहुत दुलारी है 
              शादी शुदा जिंदगी है फिर भी लगती एकदम कुवाँरी है ,

          कूलर की नरम घांस से अच्छा बिस्तर बना रखा है
                 जिसकी बनावट देखकर लगता भगवान ने क्यूँ  मुझको                                                     इन्शान बना रखा है  ,

          अगर मै भी होता उसके जैसा खूब मस्तियाँ करता  
                  सुबह-सुबह आँगन में आकर खूब हठखेलियाँ करता ,


                     प्राण MISHRA की कलम से।

अनमोल वचन :- सेवा ही किसी धर्म के सजीव होने के लक्षण हैं  -मुंशी                प्रेमचंद्र 








गिलहरी पर लिखी अमृत श्रीवास्तव जी की कविता --
रखे हिमालय को कंधे पर,
चली सूर्य की ओर गिलहरी।
कहां खतम है आसमान का,
ढूंढ़ रही है छोर गिलहरी।

अंबर से वह देख रही है,
धरती की ओझल हरियाली।
इसी बात पर जोर-जोर से,
मचा रही है शोर गिलहरी।
श्वांस और उच्छवांस कठिन है,
धरती पर अब जीवन भारी।
यही सोचकर आज हो रही,
है उदास घनघोर गिलहरी।

कण-कण दूषित आसमान का,
मिट्टी की रग-रग जहरीली,
यही बताने आज रही है,
सबको ही झखझोर गिलहरी।
आंखों में आंसू आते हैं,
दशा देखकर भारत मां की,
कल क्या होगा सोच-सोच कर,
होती भाव-विभोर गिलहरी।


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