गुरुवार, 21 मई 2020

नयी कविता ( Nayi kavita ...

नयी कविता ( Nayi kavita ...
https://prankeparinde.blogspot.com/2020/05/rubai.html







सुमित्रानंदन पंत  जी के जन्म दिवस (20 may )पर उनकी एक प्रमुख रचना -
जग-जीवन में जो चिर महान,
सौंदर्य-पूर्ण औ सत्‍य-प्राण,
मैं उसका प्रेमी बनूँ, नाथ!
जिसमें मानव-हित हो समान!
जिससे जीवन में मिले शक्ति,
छूटे भय, संशय, अंध-भक्ति;
मैं वह प्रकाश बन सकूँ, नाथ!
मिट जावें जिसमें अखिल व्‍यक्ति!
दिशि-दिशि में प्रेम-प्रभा प्रसार,
हर भेद-भाव का अंधकार,
मैं खोल सकूँ चिर मुँदे, नाथ!
मानव के उर के स्‍वर्ग-द्वार!
पाकर, प्रभु! तुमसे अमर दान
करने मानव का परित्राण,
ला सकूँ विश्‍व में एक बार
फिर से नव जीवन का विहान! 


मेरी लिखी कुछ रचनाये - 





सच  कहूँ  तो  खोजो  मत 
आनन्द  कहाँ  से  होता  है
फूल  के  यौवन  का  सुंदर
विस्तार  कहाँ  से  होता  है 

नदियों  का ये  बहता  पानी 
बेताब  किस  लिए  होता है
मृत्यु  सत्य  है  तो  जन्म का
अधिकार किस लिए होता है

सच   है  यही  की  कस्तूरी 
हर  मृग  के  अंदर होता है
पर नाजाने  क्यूँ  दुविधा में 
वो जंगल-जंगल  ढूँढता  है

बाहर की खुशियों के पीछे
अंदर का आनन्द मर जाता है
राम को राम बनने से पहले

घर का दशरथ मर जाता है






साँस की ये चुभन कुछ कहती हमें 
दिल का मंजर विराना हुआ है अभी 
मेहंदीओं की कहानी लिखी थी कभी  
डोलीयों से रवाना, कोई हुआ है अभी।

मन के उलझे तपन कि ये कोमल हवा 
बन आंधी बुलाने गई है अभी 
तुमने धोया है गेसु सुना है अभी 
रात इतनी दीवानी हुई है तभी 

सर्द मौसम की भीगी हुई रात में 
उस टूटी-फूटी पड़ी खाट में 
मैं तो चादर संभाले पड़ा हूं अभी 
तेरी यादें मनाने पड़ा हूँ अभी
साँस की ये चुभन कुछ कहती हमें 

दिल का मंजर विराना हुआ है अभी







तिनका-तिनका जोड़ लिया फिर 
कुछ ऐसा बंधन जोड़ दिया फिर 
सपनों की गांठ बांधने से पहले 
दुनिया दारी को छोड़ दिया फिर 

यह नीरवता जो आज बंधी है 
पहले गूँज हुआ करती थी। 
हर एक के चेहरे पर खुशियों की 
बूंद बन बरसा करती थी। 

ये कलरव गुंजन विहगों के 
पहले मुझसे बात किया करते थे 
स्वप्न का मतलब क्या होता है 

ये हमशे पूछा करते थे ।।


धन्यवाद कविताओ को पढ़ने के लिए | 

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