बुधवार, 9 मार्च 2022

धरती और चाँद

 कल रात चाँद को देख 

धरती खुशी से झूम उठी 

जैसे रस का स्वाद जानकर 

नाच उठती है मधुमक्खी , 

जैसे माँ के पल्लू में छुपकर 

अदृश्य हो जाने की बात करती एक बच्ची , 

कल रात वैसा ही दृश्य बना था। 

आसमा से जब सफेदी बरस रही थी, 

चकोर की आँखों में प्रेम की सिल्ली पिघल रही थी।

पेड़ों की शाखाएं ऐसी झुकी थी जैसे 

दादाजी की कमर जीवन का बोझ उठाते-उठाते झुक गई हो।

मैंने अब चादर हटा दिया था अपने सर के नीचे से 

और अपने कानों को रख दिया था जमीन पर 

और मैंने महसूस किया ..............

धरती अपनेपन का मधुर गीत धीरे-धीरे  मेरे कानों में घोल रही थी, 

जिसकी मिठास और शीतलता 

आत्मा की बेचैनी भरी कड़वाहट को 

ऐसे काट रही थी जैसे चाक पर मिट्टी के बर्तन को धागा।

जिसकी अलगाव से अधूरापन नहीं बल्कि समग्रता का बोध एहसासों की दीवारों से टकराकर कर पूर्ण होने का इशारा दे रहा था। 

धरती आपकी थकान और प्रेम के अनुरूप ही अपनी कोमलता जाहिर करती है। 

आपके भावनाओं के अनुरूप!    ना कि एक सूत ज्यादा ना कि एक सूत कम।



शुक्रवार, 4 मार्च 2022

रसिया और यूक्रेन युद्ध

 आइए थोड़ा समझते हैं रसिया और यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध के बारे में….






युद्ध का ये मोड़ कहीं ना कहीं यूक्रेन का नाटो में मिलन अथवा मिलन की इच्छा का परिणाम दिखाई देता है अतः हमें नाटो के बारे में जानना अहम हो जाता है ,

नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन(North Atlantic Treaty Organization) यह एक इंटरगवर्नमेंटल मिलिट्री एलायंस है जो कि 4 अप्रैल 1949 को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बना इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स बेल्जियम में है |  यह संगठन या कहें इस संगठन का कार्य सदस्य देशों के ऊपर बाहरी आक्रमण की स्थिति में राजनीतिक और  सैन्य शक्तियों का सहयोग देना है | इसमें अब तक 30 सदस्य शामिल हो चुके हैं मैसिडोनिया  इसमें  शामिल होने वाला सबसे आखरी देश है द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दो महा शक्तियां बनी पहली सोवियत संघ तथा दूसरी अमेरिका | अतः सोवियत संघ द्वारा यूरोप पर साम्यवाद की स्थापना का प्रयास तथा अन्य ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए NATO संघ का निर्माण किया गया |  अतः हम कह सकते हैं NATO का उद्देश्य स्वतंत्र देश की रक्षा के लिए और युद्धस्थ साम्यवाद को पराजित करने के लिए नाटो का निर्माण किया गया |  अतः जब रसिया का पड़ोसी देश यूक्रेन नाटो का सदस्य बनना चाहता है तो रसिया इसका विरोध कर रहा है |  उसका मानना है कि अमेरिका या कहे नाटो के सदस्य देश की मिलीजुली सैनिक व्यवस्था उसकी  सीमा तक पहुंच जाएगी जिसकी वजह से उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है अतः उसने युक्रेन को NATO  से जुड़ने के लिए मना कर दिया है पर युक्रेन भी अपनी स्वतंत्र होने की पुष्टि तथा संकट की स्थिति में सहयोग पाने की लालसा से  NATO से जुड़ना चाहता है|

      यही कारण है कि यूक्रेन तथा रसिया के बीच में यह युद्ध चल रहा है| 

                  इस पूरे ब्लॉग  को पढ़ने के लिए बहुत-बहुत                                                     शुक्रिया आप हमारे साथ जुड़े रहिए धन्यवाद ….. 

मंगलवार, 1 मार्च 2022

शिवालय

 मुझे तो खिजाँ की कोई फिक्र ही नहीं , 

उसकी एक मुस्कान बहुत है चहु ओर चमन को।


तुम्हारी खुशियां हमें बर्दाश्त है लेकिन 

तुम्हारे गम हमसे देखे नहीं जाते।


युग जुगती के भरोसे छोड़कर कहाँ गए वो मदमस्त दीवाने , 

महज अधूरी रही कहानी जब से चले गए परवाने।


अपनों की नजरों में गिर जाना होता है। 

सच कहने का इतना हर्जाना होता है।


जख्म हो रहा पांव में 

फिर भी मलहम का लेप नहीं है। 

पागल कुत्ते की भनक है फिर भी 

भय का कोई चेत नहीं है। 

इतनी निष्ठुर दुनिया में 

सादे पन की हेठ नहीं है। 

इतना साधु पन ठीक नहीं है।

देश टूट रहा है पल-पल 

विचारों की खाई बढ़ती है। 

जनहित की अगर बात करो तो 

अंगड़ाई पड़ती है। 

स्वार्थपने का अफीम चढ़ाकर 

शख़्स बेहोशी वाला है 

जो देश के खिलाफ बात करे 

वो शख्स! .... वाला है।


उठे हुए सिर को सभी , 

झुके हुए हृदय को कोई नहीं देखता। 

चाँद को देखते हैं सभी 

कोई आसमा को नहीं देखता।


कैसे जीत हासिल करते हम, हर शय पर दाँव हमारा था। 

जीत तुम्हारी हार हमारी , दिल तो बस बेचारा था।


नाहक ही वो टूट गया। वो तो बस दीवाना था। 

चाल चली थी आँख ने मिलकर ,वो तो बस परवाना था।


उसकी आंखें मौन हुई जब, 

हम आँशु की धड़कन सुनते थे। 

सांस की हर एक करवट पर 

पलटकर उसका माथा चूमते थे। 

समाँ बुझा दी जाए अब तो 

ख़ालिक का ये फरमान हुआ है। 

मुझे बनाने वाला देखो, 

आज मेरे घर मेहमान हुआ है। 

वो तेरे हाथों का हर स्पंदन , 

धीरज दिल का चुन लेता था। 

पर मेरा मन ना जाने क्यूँ 

आशा के धागे बुन लेता था। 

उन फ़कत कांपते होठों पर 

बस सारी विवश पहेली थी ।

वैसे तो आंखें दो होती हैं 

पर उस वक्त अकेली थी ।


होठों के वरक पर लिखीं हों सारी खुशियाँ ,  

न कमी की कोई शिनाख्त हो कहीं से ।। 

रहे सलामत ये जोड़ी तुम्हारी  , 

न हो गमों की तिजारत कहीं से।।



दे दे नए कृपाँण मुझे 

जीवन के दुर्दस बाण मुझे 

ये नई कहानी होने दे 

मुझको अपना कुछ खोने दे

मैं रसिक नही की रसपान करूँ

जीवन का लोभ में दान करूँ

मुझे अड़िग हिमालय बनने दे

सच का एक शिवालय होने दे

मैं करूणा की थाल का दीपक हूँ

सच के माथे का पीतक हूँ ।