शुक्रवार, 4 मार्च 2022

रसिया और यूक्रेन युद्ध

 आइए थोड़ा समझते हैं रसिया और यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध के बारे में….






युद्ध का ये मोड़ कहीं ना कहीं यूक्रेन का नाटो में मिलन अथवा मिलन की इच्छा का परिणाम दिखाई देता है अतः हमें नाटो के बारे में जानना अहम हो जाता है ,

नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन(North Atlantic Treaty Organization) यह एक इंटरगवर्नमेंटल मिलिट्री एलायंस है जो कि 4 अप्रैल 1949 को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बना इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स बेल्जियम में है |  यह संगठन या कहें इस संगठन का कार्य सदस्य देशों के ऊपर बाहरी आक्रमण की स्थिति में राजनीतिक और  सैन्य शक्तियों का सहयोग देना है | इसमें अब तक 30 सदस्य शामिल हो चुके हैं मैसिडोनिया  इसमें  शामिल होने वाला सबसे आखरी देश है द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दो महा शक्तियां बनी पहली सोवियत संघ तथा दूसरी अमेरिका | अतः सोवियत संघ द्वारा यूरोप पर साम्यवाद की स्थापना का प्रयास तथा अन्य ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए NATO संघ का निर्माण किया गया |  अतः हम कह सकते हैं NATO का उद्देश्य स्वतंत्र देश की रक्षा के लिए और युद्धस्थ साम्यवाद को पराजित करने के लिए नाटो का निर्माण किया गया |  अतः जब रसिया का पड़ोसी देश यूक्रेन नाटो का सदस्य बनना चाहता है तो रसिया इसका विरोध कर रहा है |  उसका मानना है कि अमेरिका या कहे नाटो के सदस्य देश की मिलीजुली सैनिक व्यवस्था उसकी  सीमा तक पहुंच जाएगी जिसकी वजह से उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है अतः उसने युक्रेन को NATO  से जुड़ने के लिए मना कर दिया है पर युक्रेन भी अपनी स्वतंत्र होने की पुष्टि तथा संकट की स्थिति में सहयोग पाने की लालसा से  NATO से जुड़ना चाहता है|

      यही कारण है कि यूक्रेन तथा रसिया के बीच में यह युद्ध चल रहा है| 

                  इस पूरे ब्लॉग  को पढ़ने के लिए बहुत-बहुत                                                     शुक्रिया आप हमारे साथ जुड़े रहिए धन्यवाद ….. 

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