रविवार, 5 फ़रवरी 2023

तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा

 आँसुओं सा तरल बनना ही पड़ेगा 

तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा 


जब धरा की गूंज फैलेगी दिशा में 

जब विकटता आके बैठेगी निशा में 

तब सजाकर भाल जलना ही पड़ेगा 

तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा 


तुम वो नहीं जो कोख को श्रापित करोगे 

बैठकर बस भाग्य को जापित करोगे 

तुम्हें बन ज्योति जलना ही पड़ेगा 

तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा 


ये घड़ी मिट्टी की कायल हो रही है 

पांव की हर गूँज पायल हो रही है 

देखना इस राह को जलना ही पड़ेगा (देखना इस धुंध को हटना ही पड़ेगा)

तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा 


ये कंटकों का रास्ता, कितने दिन बचेगा 

जब जख्म से उद्दत ये तेरा तन सजेगा 

देखना लोहा जलाकर जंग हो तो 

दिक्क्त तुम्हें किस बात की जो संग हो तो 

इस जगत के जाल को गलना ही पड़ेगा 

तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा 


ह्रदय में इस गगन के चाँद है तो 

कहाँ उन्मुक्तता का बाँध है तो 

इस निशा में एक दीपक पल रहा है ( इस निशा मे हर ओर दीपक पल रहा है

साथ मेरे कदम मिलाकर चल रहा है…. 




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