आँसुओं सा तरल बनना ही पड़ेगा
तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा
जब धरा की गूंज फैलेगी दिशा में
जब विकटता आके बैठेगी निशा में
तब सजाकर भाल जलना ही पड़ेगा
तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा
तुम वो नहीं जो कोख को श्रापित करोगे
बैठकर बस भाग्य को जापित करोगे
तुम्हें बन ज्योति जलना ही पड़ेगा
तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा
ये घड़ी मिट्टी की कायल हो रही है
पांव की हर गूँज पायल हो रही है
देखना इस राह को जलना ही पड़ेगा (देखना इस धुंध को हटना ही पड़ेगा)
तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा
ये कंटकों का रास्ता, कितने दिन बचेगा
जब जख्म से उद्दत ये तेरा तन सजेगा
देखना लोहा जलाकर जंग हो तो
दिक्क्त तुम्हें किस बात की जो संग हो तो
इस जगत के जाल को गलना ही पड़ेगा
तुमको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा
ह्रदय में इस गगन के चाँद है तो
कहाँ उन्मुक्तता का बाँध है तो
इस निशा में एक दीपक पल रहा है ( इस निशा मे हर ओर दीपक पल रहा है
साथ मेरे कदम मिलाकर चल रहा है….

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