मेरा घर जमी पे है मगर मैं जन्नत में रहता हूँ
बहुत खुशनशीब हूँ की मैं भारत में रहता हूँ
एक सांस भरिए और कहिए आजादी
एक सांस और भरिए और कहिए भारत माता की जय
और मह्सूस करिए अपने रगों में आजादी की खुशबू,
क्योंकि ये खुशबू किसी फूल के मकरंद से नहीं फैली
ये फैली है आजादी की चाह रखने वाले वीरों से
क्रांतिकारीयों से सूरमाओं से हमारी सभ्यता हमारी संस्कृति से
सिंधु से हिन्दू से
आ सिंधु-सिंधु पर्यन्ता, यस्य भारत भूमिका।
पितृभू-पुण्यभू भुश्चेव सा वै हिंदू रीती स्मृता ।।
ये खुशबू अहिंसा के दुबले मंत्र पर नहीं बल्कि
अपने आप का सब कुछ न्योछावर करने वाले
यज्ञ की खुशबू है जिसकी वजह से हम ये राष्ट्र और स्वधर्म पताका
पूरी आन बान शान से फहरा पा रहे है
और पूरी दुनिया को ये सन्देश दे रहा है की
दया और करुणा को ह्रदयाश्थ रखने वाला ये देश
अपने अधिकार के लिए लड़ना जानता है
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा (सुभाष चंद्र बोस)
इंकलाब जिंदाबाद (शहीद भगत सिंह)
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है....(रामप्रसाद बिस्मिल)
सत्यमेव जयते (पंडित मदन मोहन मालवीय)
स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है- लोकमान्य बालगंगाधर तिलक
23 जून 1757 प्लासी के युद्ध से लेकर 19 दिसंबर 1961 गोवा मुक्ति दिवस तक आजादी का
संघर्ष चला और इस शुभ दिन के लिए हमारे कितने क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी
आज उनके नाम की जय बोलने का दिन है
जला अस्थियां बारी-बारी,
चटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर,
लिए बिना गर्दन का मोल।
कलम, आज उनकी जय बोल।
जो अगणित लघु दीप हमारे,
तूफ़ानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन,
मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल।
कलम, आज उनकी जय बोल।
पीकर जिनकी लाल शिखाएं,
उगल रही सौ लपट दिशाएं,
जिनके सिंहनाद से सहमी,
धरती रही अभी तक डोल।
कलम, आज उनकी जय बोल।
आज लोकमान्य तिलक विनोबा भावे विनायक दामोदर सावरकर वासुदेव बलवंत फड़के का जय बोलने का दिन है। आज दिन है इस महाराष्ट्र की भूमि को जय बोलने का, जिसने स्वराज का पहला मंत्र दिया।
रण में लाशों की गिनती
हम तुम्हें सिखाने आए हैं
हम भारत की गौरवगाथा
तुम्हें सुनाने आए हैं
ये देश वही जो त्यागों को
रखता है अपने मस्तक पर
राम कृष्ण जन्म लेते यहां
राणा आते चेतक पर
पाप पुण्य का लेखा जोखा
सिखाया है विद्वानों को
जिसकी कहानी ने जिदचूमा है
फांसी और बलिदानों को
जिस धरती पर हुए वीर
आजाद भगत सिंह सुखदेव यहां
मित्रता की कहानी में फैले
बिस्मिल और अस्फाक यहां
तुम्हारी एक किताब जिस पर तुम
इतना घमंड दिखलाते हो
कभी समय निकाल कर क्यों नहीं
वेद पुराण पढ़ जाते हो
नवरस का सिंगार यहां है
ममता का हर भाव यहां है
महिला को देवी कहने का
सूथरा सा संस्कारणयहाँ हैं
जहां कलाई से फैलती है
बहन के रिश्तो की खुशबू
तुम्हें समझ नहीं आएगी
तूमने तो फैलाई है बदबू
जहां कहानी राममय होकर
आदर्श की बात बताती है
जहां की राधा बिटिया मोहन को
उंगली पर नाच नाचाती है
जहां का बेटा कान्हा बनकर
चंचलता के छाप छोड़ता
जहां का क्रांतिवीर अंग्रेजों की
दाढ़ी की ना नाप छोड़ता
हम ऐसी पावन भूमि के
लाल नहीं झुकने वाले
कितना भी कोशिश कर ले बैरी
हम नहीं मिटने वाले
हम नहीं झुकने वाले
दीवानगी जख्म को मलहम बना देती है
किसी अनजान को भी हमदम बना देती है
तुम इस तिरंगे की मासूमियत तो देखो जरा
इसकी एक झलक दिलों को मातरम बना देती है
शक्ति और उत्साह, सामर्थ्य और संवेदना का
जवाब देंहटाएंमिश्रण प्राण के परिंदे