सोमवार, 19 अगस्त 2024

कुछ तो है जो गलत हो रहा शिक्षा दाना पानी में वरना इतने दुष्ट न होते घर-घर फैली कहानी में

 मशाल वाले हाथों में बत्ती किसने दे दी रे 

सूनेपन के शोर में किसने हस्ती अपनी दे दी रे 


एक जो चिड़िया पंख लगा कर 

आसमा में उड़ना चाहती थी। 

किसने अपनी हवस की पूरी 

मौत सस्ती दे दी रे 


कर्म काल सब बैरी बन गए। 

देख विडम्बना जीवन की 

जग को जोगी करने वाले 

खुद ही रोगी बन गए रे 


कुछ तो है जो गलत हो रहा 

शिक्षा दाना पानी में 

वरना इतने दुष्ट न होते 

घर-घर फैली कहानी में 


एक या दो की बात नहीं है। 

संख्या की लाचारी है। 

ऐसे कितने जुर्म हुए हैं, 

कितनी बिटिया बेचारी रे।


और अभी यह खत्म नहीं है। 

जुर्म अभी भी जारी रे। 

आज अभी का देख लिया तो 

कल की करो तैयारी रे 


खुद की इच्छा मत रख इतनी 

कि दूसरों का अधिकार छूने रे  

किसी भी गुड़िया के जीवन से 

घर आंगन संसार छूने रे .....




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