सोमवार, 19 अगस्त 2024

तुम्हें इस वाले में ही रहना पड़ेगा।

 जिंदगी के सफर की दूरी समझतीं हैं, 

बहने सबसे पहले भाई की मजबूरी समझतीं हैं।



ये जुर्माना तो भरना पड़ेगा। 

किराएदार हो तो सहना पड़ेगा। 

अभी रहता है कोई बगल के कमरे में 

तुम्हें इस वाले में ही रहना पड़ेगा।


इतना तो उसने हमको अधिकार दे दिया है।

 ये रास्ता कट जाए, जितना प्यार दे दिया है, 

अब इससे ज्यादा और क्या दे सकता है बच्चा 

मां-बाप के लिए उसने अपना यार दे दिया है।


इतनी सी बात समझ नहीं आती, 

वो जा सकती है तो चली क्यों नहीं आती? 

मैं तो मुकद्दर हुँ मेरा क्या है, 

वो तो वक्त है बदल क्यूँ नही जाती ?


जिसे निभाना है, वो निभा देगा।  

नहीं तो कुछ बहाना बना देगा।।


पहले तो सिर्फ खुद था जब रूबरू था, 

जब से बिछड़ है, खुदा हो गया है।


किताब और इतर दोनों साथ रखता हूं। 

ज़रूरतें जैसी हूं वैसा अंदाज रखना।


वक्त बदल जाए तो मुकद्दर बदल जाता है। 

नदी के धार से समुंदर बदल जाता है। 

जमाने की हरकतों पर ऐतबार मत करना, 

यहां फकीर क्या कलंदर दोनो बदल जाता है।


मिठास के इतने आदी हुए की 

नमकीन वाले हिस्से को कभी अपना नहीं कहा। 

ऐसा नहीं की लोगों की पहचान नहीं मुझे, फिर भी 

मतलब वाले यार को भी मतलब ही नहीं।





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