जिसने दिया हो ज्ञान की गंगा
जहाँ पे धरती माता है
जहाँ भाग्य से कुछ नहीं मिलता
कर्म किया तो पाता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
एक जन्म की बात नहीं है
पुनर्जन्म भी आता है
जिसके कर्म श्रेष्ठ रहे हो
वही यहाँ पर आता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
राणा के भाले से लिपटा
स्वाभिमान का परचम है
तुलसी का रामायण जैसे
मुँह में घुलता चमचम है
ऐसी अनेक कहानी जिसमें
सहज अपनापन आता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
वीर शिवाजी की गाथायें
जहाँ लहू में रची बसी हो
जहाँ पदमिनी अंगारों पर
खिलती जैसे एक कली हो
ऐसी पावन भूमी पर
व्यर्थ नहीं कोई आता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
जहाँ पे बिटिया ख़ानदान की
लक्ष्मी समझ पली बड़ी हो
जहाँ पे माता पुत्रों के संग
विपदाओं में साथ खड़ी हो
ऐसे ही नहीं यहाँ भी जीवन
दुख में भी मुश्काता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
जिसने दिया हो ज्ञान की गंगा
जहाँ पे धरती माता है
जहाँ भाग्य से कुछ नहीं मिलता
कर्म किया तो पाता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
एक जन्म की बात नहीं है
पुनर्जन्म भी आता है
जिसके कर्म श्रेष्ठ रहे हो
वही यहाँ पर आता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
राणा के भाले से लिपटा
स्वाभिमान का परचम है
तुलसी का रामायण जैसे
मुँह में घुलता चमचम है
ऐसी अनेक कहानी जिसमें
सहज अपनापन आता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
वीर शिवाजी की गाथायें
जहाँ लहू में रची बसी हो
जहाँ पदमिनी अंगारों पर
खिलती जैसे एक कली हो
ऐसी पावन भूमी पर
व्यर्थ नहीं कोई आता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
जहाँ पे बिटिया ख़ानदान की
लक्ष्मी समझ पली बड़ी हो
जहाँ पे माता पुत्रों के संग
विपदाओं में साथ खड़ी हो
ऐसे ही नहीं यहाँ भी जीवन
दुख में भी मुश्काता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
जहाँ पिता आदर्श पुत्र का
सरल साँवला भँवर चित्र का
आँखों में आँसू भर भर के
कुल के गीत सहज गाता है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
क्या भारत की गाथा है
और तुम्हें हम क्या बतलाएँ
यही भारत की गाथा है…!!!
🇮🇳 जय हिन्द जय भारत 🇮🇳
✍️प्रणीत मिश्र🙏