रविवार, 24 अगस्त 2025

आँखे दुख से फटी रहती है उम्मीद के धागे सी जाएँगे

 एक साथ मिला तो मर जाएंगे 

सपना देखो जी जाएँगे 

जो एक जगह बैठे रहते हो

जीवन लम्हें पी जाएंगे

आँखे दुख से फटी रहती है

उम्मीद के धागे सी जाएँगे 

अब ये कैसी ज़िद है तुम्हारी 

साथ तुम्हारे ही जाएँगे




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