परख नली से पहले परखा
जीवन के सूखे में बरखा
दुख को काट
सुख को चरखा
ऐसा जीवन योग रहा है
शिक्षक होना संयोग रहा है
वर्तमान की भीड़ मिली तो
हमनें भविष्य के नीड़ बनाए
मन ने जब-जब विचलन माँगा
तो,हमनें कस के जंजीर बनाए
अंधकार की हर दुविधा में
दीपक होना योग रहा है
शिक्षक होना संयोग रहा है
वर्तमान की भीड़ मिली तो
हमनें भविष्य के नीड़ बनाए
मन ने जब जब विचलन माँगा
तो,हमनें कस के जंजीर बनाए
अंधकार की हर दुविधा में
दीपक होना योग रहा है
शिक्षक होना संयोग रहा है
जिन्होंने सिर्फ़ कामना की थी
हमने उनको लक्ष्य दिया है
दुःख के भाले चले कहीं तो
हमनें अपना वक्ष दिया है
जितने उदाहरण माँगे दुनिया ने
हमनें एक एक समक्ष दिया है
युग की हर एक कसौटी पर
कस जाना ही योग रहा है
शिक्षक होना संयोग रहा है
रात हुई थी कब अपनी
कब उजाले अपने थे
जीवन में पीछे सोचा तो
कितने सपने अपने थे
दिन से रात,रात से दिन तक
घुल जाना ही योग रहा है
शिक्षक होना संयोग रहा है

अति उत्तम
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