मंगलवार, 17 जनवरी 2023

Deshi kahawaten ...

` कहावतें  ..... 

   " कहावत उन शब्द समूहों को कहते हैं ,जिनमें अनुभव की कोई बात संक्षेपतः सुंदर और प्रभावी महिमा मयि ढंग से कही जाती है | "

      इसको सूचित ,प्रवाद वाक्य अथवा लोकोक्ती भी कहते हैं | English में इसे proverb तथा उर्दू में 'मसल ' भी कहते हैं | 

" कहावत का शाब्दिक अर्थ कही हुई बात होता है " पर हर कही हुई बात कहावत नहीं होती , केवल उसी बात को कहावत कहते हैं जो जीवन के अनुभवों को संक्षिप्त तथा विलक्षण ढंग से कहती हो तथा समय की कसौटी पर खरी उतरती हो | 

" लोकोक्ति का अर्थ है जनसाधारण की उक्ति !,

परिभाषा :- अनुभव के सार को व्यक्त करने वाली लोक प्रसिद्ध उक्ति या कथन को लोकोक्ति या कहावत कहते हैं |  


लक्षण :-  
  • कहावत एक वाक्य है 
  • वाक्य का सामान्य अर्थ महत्त्व का होता है | 
  • कहावत का स्वरूप अपरिवर्तित रहता है |    
विशेषता :-    

  • इन्हे मानव ज्ञान का घनीभूत रत्न कहते हैं | इसमें गागर में सागर बंद होता है | 
  • भाषा में इनके प्रयोग से सजीवता ,प्रवाहमयता और लालित्य आ जाता है | 
  • इनसे कार्य व्यपार को स्पष्टता और भाषा को बल मिलता है | 
भाषा में इनका जितना अधिक प्रयोग होगा अभिव्यक्ति क्षमता उतनी ही रोचक होगी | 


कुछ कहावतें -

 हम त बनतऊ काम बिगड़बई | 
               रानी कैकेई के समझऊबई  ||  


          सूते से कपासे से भेटइ नाइ 
          जोलहान से मटकऊबल || 

        पाल - पाल गोसइयाँ मोके 
             कल होबई तोके || 
  
         पइसवा धरावई  तीन  नाम 
             परशु , पुरूषोत्तम परशुराम || 

         जब पेट में जइहैं चारा 
             तब हँस के बोलिहैं बेचारा || 
   
           राग रसोईं पागड़ी 
                कभी-कभी जम जाई ||  

          माई न जानइ नइहर 
             गदेलए पूछईं  ननियाउर || 

          सासु से बैर पतोहू से नाता || 

         गवने घोड़ न थवने  घोड़
                पहिल पठौनी घोडई घोड़ || 

           बड़ा शौखिन पिछौरी में जेबा ||   

         सात घरी भर फूहड़ सोवइ 
             लइ बढ़नी अँगना में रोवइ || 

           हमार माइ गोड़हरा दिहिन 
                भैया हमार पेड़हरा || 

        भूली गवा भजन भाव भूल गवा कजरी 
           तीन चीज़ यद् रहिग नून तेल लकड़ी|| 









कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें