` कहावतें .....
" कहावत उन शब्द समूहों को कहते हैं ,जिनमें अनुभव की कोई बात संक्षेपतः सुंदर और प्रभावी महिमा मयि ढंग से कही जाती है | "
इसको सूचित ,प्रवाद वाक्य अथवा लोकोक्ती भी कहते हैं | English में इसे proverb तथा उर्दू में 'मसल ' भी कहते हैं |
" कहावत का शाब्दिक अर्थ कही हुई बात होता है " पर हर कही हुई बात कहावत नहीं होती , केवल उसी बात को कहावत कहते हैं जो जीवन के अनुभवों को संक्षिप्त तथा विलक्षण ढंग से कहती हो तथा समय की कसौटी पर खरी उतरती हो |
" लोकोक्ति का अर्थ है जनसाधारण की उक्ति !,
परिभाषा :- अनुभव के सार को व्यक्त करने वाली लोक प्रसिद्ध उक्ति या कथन को लोकोक्ति या कहावत कहते हैं |
लक्षण :-
सूते से कपासे से भेटइ नाइ
जोलहान से मटकऊबल ||
पाल - पाल गोसइयाँ मोके
कल होबई तोके ||
पइसवा धरावई तीन नाम
परशु , पुरूषोत्तम परशुराम ||
जब पेट में जइहैं चारा
तब हँस के बोलिहैं बेचारा ||
राग रसोईं पागड़ी
कभी-कभी जम जाई ||
माई न जानइ नइहर
गदेलए पूछईं ननियाउर ||
सासु से बैर पतोहू से नाता ||
गवने घोड़ न थवने घोड़
पहिल पठौनी घोडई घोड़ ||
बड़ा शौखिन पिछौरी में जेबा ||
सात घरी भर फूहड़ सोवइ
लइ बढ़नी अँगना में रोवइ ||
हमार माइ गोड़हरा दिहिन
भैया हमार पेड़हरा ||
भूली गवा भजन भाव भूल गवा कजरी
तीन चीज़ यद् रहिग नून तेल लकड़ी||
" कहावत उन शब्द समूहों को कहते हैं ,जिनमें अनुभव की कोई बात संक्षेपतः सुंदर और प्रभावी महिमा मयि ढंग से कही जाती है | "
इसको सूचित ,प्रवाद वाक्य अथवा लोकोक्ती भी कहते हैं | English में इसे proverb तथा उर्दू में 'मसल ' भी कहते हैं |
" कहावत का शाब्दिक अर्थ कही हुई बात होता है " पर हर कही हुई बात कहावत नहीं होती , केवल उसी बात को कहावत कहते हैं जो जीवन के अनुभवों को संक्षिप्त तथा विलक्षण ढंग से कहती हो तथा समय की कसौटी पर खरी उतरती हो |
" लोकोक्ति का अर्थ है जनसाधारण की उक्ति !,
परिभाषा :- अनुभव के सार को व्यक्त करने वाली लोक प्रसिद्ध उक्ति या कथन को लोकोक्ति या कहावत कहते हैं |
लक्षण :-
- कहावत एक वाक्य है
- वाक्य का सामान्य अर्थ महत्त्व का होता है |
- कहावत का स्वरूप अपरिवर्तित रहता है |
विशेषता :-
- इन्हे मानव ज्ञान का घनीभूत रत्न कहते हैं | इसमें गागर में सागर बंद होता है |
- भाषा में इनके प्रयोग से सजीवता ,प्रवाहमयता और लालित्य आ जाता है |
- इनसे कार्य व्यपार को स्पष्टता और भाषा को बल मिलता है |
कुछ कहावतें -
हम त बनतऊ काम बिगड़बई |रानी कैकेई के समझऊबई ||
सूते से कपासे से भेटइ नाइ
जोलहान से मटकऊबल ||
पाल - पाल गोसइयाँ मोके
कल होबई तोके ||
पइसवा धरावई तीन नाम
परशु , पुरूषोत्तम परशुराम ||
जब पेट में जइहैं चारा
तब हँस के बोलिहैं बेचारा ||
राग रसोईं पागड़ी
कभी-कभी जम जाई ||
माई न जानइ नइहर
गदेलए पूछईं ननियाउर ||
सासु से बैर पतोहू से नाता ||
गवने घोड़ न थवने घोड़
पहिल पठौनी घोडई घोड़ ||
बड़ा शौखिन पिछौरी में जेबा ||
सात घरी भर फूहड़ सोवइ
लइ बढ़नी अँगना में रोवइ ||
हमार माइ गोड़हरा दिहिन
भैया हमार पेड़हरा ||
भूली गवा भजन भाव भूल गवा कजरी
तीन चीज़ यद् रहिग नून तेल लकड़ी||
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें