रविवार, 29 जनवरी 2023

खुशामद

अगर जमाने में कहीं हम 

चिड़िया हो जाते....

तो एक डाल पर बैठे होते

 एक से उड़ कर जाते  

दुनिया वालों की आंखों में 

हद से ज्यादा हम भाते  

कहीं आसमां के साए में 

खुद को उड़ता हम पाते 

कहीं नदी के साथ दौड़ में 

खुद को पिछड़ा हम पात


पर ना जाने किस पाप-पुर्ण्य के 

लेखे में हम दूर हुए 

इस मानव जीवन जीने को 

हद से ज्यादा मजबूर हुए 


उफनती नदी की नाव में एक आशिक की कहानी हो तुम 

जो पूछ रहा है दरिया से क्या सचमुच में पानी हो तुम 


काँटों की खुशामद में लग गईं वो तितलियां जो फूल की हकदार थी 

जिंदगी इस कदर  बाँट देती है मोहब्बत को जैसे वो भी इसमें हिस्सेदार थी


तुम्हारे रूप के सदके हैं हजारों 

तुम्हारा बदन कयामत में शुमार होगा 

तुम इस तरफ न करो अपनी नजरों की छोरी 

ये तो मेरे दिल के आर पार होगा


लबों की खास मेहरबानी से पहले 

मैं लेता हूँ तुम्हारा नाम पानी से पहले।


सूखे हुए गुलाब को सफाई दे रहा हूँ। 

मैं आज अपने इश्क को दुहाई दे रहा हूँ।


नए रँग की इस कहानी में हो, 

तुम मेरे साथ मेरी जवानी में हो। 

मैं तुम्हें देखकर सोचता हूँ यही, 

तुम मेरी आँख के कितने पानी में हो?



मंगलवार, 17 जनवरी 2023

Deshi kahawaten ...

` कहावतें  ..... 

   " कहावत उन शब्द समूहों को कहते हैं ,जिनमें अनुभव की कोई बात संक्षेपतः सुंदर और प्रभावी महिमा मयि ढंग से कही जाती है | "

      इसको सूचित ,प्रवाद वाक्य अथवा लोकोक्ती भी कहते हैं | English में इसे proverb तथा उर्दू में 'मसल ' भी कहते हैं | 

" कहावत का शाब्दिक अर्थ कही हुई बात होता है " पर हर कही हुई बात कहावत नहीं होती , केवल उसी बात को कहावत कहते हैं जो जीवन के अनुभवों को संक्षिप्त तथा विलक्षण ढंग से कहती हो तथा समय की कसौटी पर खरी उतरती हो | 

" लोकोक्ति का अर्थ है जनसाधारण की उक्ति !,

परिभाषा :- अनुभव के सार को व्यक्त करने वाली लोक प्रसिद्ध उक्ति या कथन को लोकोक्ति या कहावत कहते हैं |  


लक्षण :-  
  • कहावत एक वाक्य है 
  • वाक्य का सामान्य अर्थ महत्त्व का होता है | 
  • कहावत का स्वरूप अपरिवर्तित रहता है |    
विशेषता :-    

  • इन्हे मानव ज्ञान का घनीभूत रत्न कहते हैं | इसमें गागर में सागर बंद होता है | 
  • भाषा में इनके प्रयोग से सजीवता ,प्रवाहमयता और लालित्य आ जाता है | 
  • इनसे कार्य व्यपार को स्पष्टता और भाषा को बल मिलता है | 
भाषा में इनका जितना अधिक प्रयोग होगा अभिव्यक्ति क्षमता उतनी ही रोचक होगी | 


कुछ कहावतें -

 हम त बनतऊ काम बिगड़बई | 
               रानी कैकेई के समझऊबई  ||  


          सूते से कपासे से भेटइ नाइ 
          जोलहान से मटकऊबल || 

        पाल - पाल गोसइयाँ मोके 
             कल होबई तोके || 
  
         पइसवा धरावई  तीन  नाम 
             परशु , पुरूषोत्तम परशुराम || 

         जब पेट में जइहैं चारा 
             तब हँस के बोलिहैं बेचारा || 
   
           राग रसोईं पागड़ी 
                कभी-कभी जम जाई ||  

          माई न जानइ नइहर 
             गदेलए पूछईं  ननियाउर || 

          सासु से बैर पतोहू से नाता || 

         गवने घोड़ न थवने  घोड़
                पहिल पठौनी घोडई घोड़ || 

           बड़ा शौखिन पिछौरी में जेबा ||   

         सात घरी भर फूहड़ सोवइ 
             लइ बढ़नी अँगना में रोवइ || 

           हमार माइ गोड़हरा दिहिन 
                भैया हमार पेड़हरा || 

        भूली गवा भजन भाव भूल गवा कजरी 
           तीन चीज़ यद् रहिग नून तेल लकड़ी|| 









शनिवार, 14 जनवरी 2023

मन पसंद

 मुझ जैसे को तड़पाने से पहले तुझे एक बार तो सोचना था।

तुझे किसी और के होने से ज्यादा मेरा होना था।


तेरा चेहरा मुझे किताब लगता है। 

अंधेरे में उगा हुआ महताब लगता है।

कैसे बताऊं मैं हसरते दिल की 

तू इसे कितना लाजवाब लगता है?


अधूरा ख्वाब को रख दिया है ताक पर , 

अब मैं उसे पूरा होकर उतारूंगा ।


इस रास्ते में कोई दाँव नहीं लगेगा। 

मोहब्बत का कोई छांव नहीं लगेगा। 

भले रहीस हो जमाने में तुम मगर 

इश्क किसी के पाँव नहीं लगेगा।


ख्वाब को तामीर करते हुए रो दिए , 

हम अपने आप को जागीर करते हुए रो दिए। 

वो इतना दूर चला गया मेरी बाहों से , 

कि हम उसको आवाज लगाते हुए रो दिए। 

एक ही तो हुनर सीखा था हमने मोहब्बत में , 

सो उसकी याद आयी और हम हुए रो दिए।


सुकून का एक कतरा भी हमारे नाम नहीं आया | 

तुम्हारी याद का मौसम हमारे कोई काम नहीं आया || 

मैंने घोल कर आंसू कुछ फीके किये मगर ,

ये जज्बात का फीकापन भी कोई काम नहीं आया ||  

उलझ गई दर्द की कहानी खुद मुझसे ,

मेरा किरदार का सीधापन कोई काम नहीं आया || 

ले जाए जिसे जरूरत हो इस बेतुक की चीज को ,

ये दिल तो मेरे कभी कोई काम नहीं आया ||


तट पर पटक-पटक कर माथा 

सागर खारे हो जाते हैं | 

पंछी उड़ कर पिजरे से अपने 

और भी प्यारे हो जाते हैं ||



नंदी की ज्ञानवापी प्रतीक्षा!!


 दुख के दिन अब दूर हुए 

ये कष्ट के मोती झड़ जाने दो । 


हुई तपस्या पूर्ण तुम्हारी 

घर में फिर से शिव आने दो। 


मूद लो अब इंतजार की आँखें 

सच को अब कोई डर नहीं है। 


पर तेरे जैसा निरखने वाला 

माना कोई सर नहीं है। 


इतने वर्षों से तूने हाँ 

बेईमानों को कैसे झेला।


जहाँ सत्य जिंदा हो जल में 

वहॉं झूठ का कैसा मेला। 


इतने विवश! अगर हम होते 

तो सच में पत्थर हो जाते!!


या तो खींच जुबान झूठ की 

ख़ालिस कट्टर हो जाते हैं!


सच कहती है माँ की वाणी,  

शिव से सुंदर कुछ भी नहीं है!!

 

झूठ के अंदर बहुत राज हैं! 

सच के अंदर कुछ भी नहीं है।।


🕉️सत्यम शिवम सुंदरम🕉️✍🏻🙏


दे दे नए कृपाँण मुझे 

जीवन के दुर्दस बाण मुझे 

ये नई कहानी होने दे 

मुझको अपना कुछ खोने दे

मैं रसिक नही की रसपान करूँ

जीवन का लोभ में दान करूँ

मुझे अड़िग हिमालय बनने दे

सच का एक शिवालय होने दे

मैं करूणा की थाल का दीपक हूँ

सच के माथे का पीतक हूँ ।


उसकी आंखें मौन हुई जब, 

हम आँशु की धड़कन सुनते थे। 

सांस की हर एक करवट पर 

पलटकर उसका माथा चूमते थे। 

समाँ बुझा दी जाए अब तो 

ख़ालिक का ये फरमान हुआ है। 

मुझे बनाने वाला देखो, 

आज मेरे घर मेहमान हुआ है। 

वो तेरे हाथों का हर स्पंदन , 

धीरज दिल का चुन लेता था। 

पर मेरा मन ना जाने क्यूँ 

आशा के धागे बुन लेता था। 

उन फ़कत कांपते होठों पर 

बस सारी विवश पहेली थी ।

वैसे तो आंखें दो होती हैं 

पर उस वक्त अकेली थी ।



कोई कुछ भी कह ले, मगर आस नहीं जाती। 

बिना पानी के कभी प्यास नहीं जाती।


हां जाती हैं तुम्हारे जाने के बाद कई बसें 

मगर उनको देखकर मेरी जान नहीं जाती।


बहुत जोर से चिल्लाओगे तो गला फटेगा 

वो जहाँ है वहाँ आवाज नहीं जाती।

रविवार, 8 जनवरी 2023

18 jan ganga nagar kavi sammelan

 लहू जिगर का तेरे माथे पर उड़ेल दिया हमने ,

अब ये लाल रंग ना आए तो मैं क्या करूँ ||

मैं जमाने का दोष  मानता हूं लेकिन ,

मुझे अपना ही नजर आए तो मैं क्या करूँ ||

बेच रहा हूं दिल को दिल के ही भाव में ,

कोई खरीदने ही नहीं आए तो मैं क्या करूँ ||


बेवजह मोहब्बत कर चुका हूँ मैं 

अब मुझे नसीहतओं के अल्फाज मत दो 

मैं पीना चाहता हूँ आंखों से तुम्हारे 

तुम मेरे हाथों में अब ये जाम मत दो 


जब से छुड़ाया है मैंने हाथ तुझसे 

लकीरें जिंदगी की चमक ने लग गईं है


मैं तुझसे मोहब्बत स्वीकार नहीं करता 

पर ऐसा नहीं है कि तुझसे प्यार नहीं करता 


ज्योति बुझे अगर आशा की तो बनदीप निराशा मत जलना 

चलना इस दुनिया में कठिन है लेकिन ये बात समझ कर मत चलना 


बनाकर खुद को तलब जहां में 

जुदा हुआ निखर गया 

मेरी निगाह का तारा मेरा 

होने से पहले बिखर गया 


मेरे लगाए पेड़ अब सूखने लग गए 

तेरे दिए दर्द मुझे दुखने लग गए 

बहुत देर तक यादों की चाहत में बैठा रहा मैं 

फिर जब आई तेरी याद तो हम उठने लग गए


आँसुओं को कागजों पर सुखाया ना करो 

मैं बुलाऊं तो एक बार में आया ना करो ||

मुझे जरूरत है जमाने में मोहब्बत की बहुत 

मैं कुछ बोलूं तो हर बार शर्माया ना करो ||

जब मैं हार कर पुकारूँ तुम्हें तन्हाई में अपनी 

तुम चुपचाप दबे पांव यूँ आया ना करो ||

यह पूछ कर क्या अच्छा है बदन में तुम्हारे 

यूँ सरेआम मोहब्बत में भरमाया ना करो ||


सूने पन के परिभाव से दिल बच्चा हो जाएगा 

हर पल उसको ना याद करो दिल कच्चा हो जाएगा 


तुझ से लिपटे तो मरेंगे ही 

सोच रहे हैं तुम्हें देख कर क्या होगा 

है शिकायत की आरजू बहुत 

मगर ये करके भी क्या होगा


समुंदर से कुछ ज्यादा चाहिए 

मुझे तुझसे एक वादा चाहिए 

बहुत रंगीनियत मुझे पसंद नहीं 

तेरा किरदार मुझे सादा चाहिए


जब तक मोहब्बत नहीं हुई थी 

मैं टूटे हुए दिल को बेकार कहता था 

तुम्हारे जाने के बाद आँसुओं को 

आँखों में आना श्रृंगार कहता था


अब पढ़ रहा हूं तो अधूरा लग रहा है 

वही खत जो कभी तेरा पूरा होकर लिखा था


आधे दिसंबर में आ गए हम जमीन से अंबर में आ गए


तेरी तस्वीर क्या लगा रखी है मैंने ऊपर के जेब में 

लोग पूछ रहे हैं ये गुलाब कौन सा है 


वफा की है कि जफ़ा की है 

पर मोहब्बत तो इस दफ़ा की है 


सांप दबा रहे और कांटे भी ना 

कुत्ता पास आए और चाहते भी ना 

ऐसा वाक्य बहुत मुश्किल से होता है


जैसे अंधे के लिए नजरिए का कोई कायदा नहीं होता 

वैसे ही शरीफ लोगों को धंधे में कोई फायदा नहीं होता


अंत में सारा इल्जाम प्यार करने वाले पर आएगा 

वो तो बेवफा है वो तो आकर चला जाएगा


गम खत्म हो रहे हैं जिंदगी के 

आइए मुझे बददुआएं दीजिए 


तुम्हारे दिल तोड़ने पर खफा नहीं है 

इससे पहले थे पर इस दफा नहीं है 


सिलवटें चादरों की हटाई नहीं जाती 

वह आ जाए तो यह बात बताई नहीं जाती 

तन्हाई इतनी कि कोई हाल भी नहीं पूछता मुझसे 

और भीड़ इतनी कि मुझे मेरी आवाज भी सुनाई नहीं देती 

मैं रो-रोकर आईने में देखता हूं अपनी आंखें 

क्यों इसमें तेरे सिवा कोई बात दिखाई नहीं देती


वतन की डाल में टांके हैं त्याग के फूल हमने 

हमारे उछाले हुए सिक्के कभी खोटे नहीं होते


तुम किसी और के बिस्तर की चांदनी हो 

तुम मेरी रातों को यूं बदनाम मत करो 

ये जवानी बड़ी पाक साफ चीज है 

तुम इसे हर किसी के नाम मत करो 


शयाशतों के दाँव हमें अच्छे नहीं लगते 

हम अगर दुश्मनी करते तो बच्चे लगते 


बदन से रूह के मिलने का परिणाम है धड़क 

हमारी आंखों से मंजिल का अनुमान है सड़क


लहरों को किनारे आ जाना ही चाहिए 

जब वक्त हो बिछड़ जाने का तो बिछड़ जाना ही चाहिए 

यहां शराफत की कोई उम्मीद नहीं लेकिन

जब कोई मर जाए तो झुक जाना ही चाहिए 


बीते हुए दिनों के घाव देखने से अच्छा है 

हम भविष्य के रास्ते से कांटे हटाएँ 


बहुत देर से सोच रहा हूँ  तेरी तस्वीर देख कर 

यह मुस्कान तेरे चेहरे से पिघल क्यूँ नहीं जाती 

मैं तो चलो परदेश में हूँ  तन्हा हूँ  मजबूर हूँ  

तू मेरे जहन से निकलकर घर क्यों नहीं जाती


बेवजह मोतियों को बर्बाद ना कर 

मैं आ रहा हूं तुझसे मिलने तू याद ना कर 

इन लकीरों को तगाफुल की नजर से देख 

तू हीर है जमाने का एहतराज ना कर 

माना कि जुदाई के वक्त बहुत हैं 

तू खामखाँ शिकायत में वक्त बर्बाद ना कर 

ये कयामत ही तो है जो जुदा है हम दोनों 

अब तो किसी और जलजले का इंतजार ना कर 


जख्म हमारे सिले नहीं और 

नमक का व्यापार बढ़ा है 

दर्द का चेहरा ओढ़े देखो 

सामने से संसार खड़ा है 

इस नीरव रुदन भरी आंखों में 

आंसू का कोई शोर लिखे क्या 

ऐसे डरे बुझे दीपक में 

ज्योति का कोई मेल लिखे क्या


एक दिन तड़पेंगे वो भी हमारी याद में 

एक दिन उनको भी मोहब्बत पे एहतराम होगा