शुक्रवार, 30 जून 2023

घर से बिछड़े हुए मुसाफिर

 


नए उजालों की दस्तकों  से उछल पड़ेंगे ख़्वाब सारे 

मैं दरमियां जब रो पडूंगा मचल पड़ेंगे आब सारे 

मेरी जवानी की जिंदगी में ये कैसे ख़्वाब  लिख रही हो 

मैं जिनसे हूँ दूर बैठा तुम उन्हें पास लिख रही हो 

घर से बिछड़े हुए मुसाफिर कभी न मंजिल पा सकेंगे 

होके दरमियाँ  की कहानी घर कभी ना जा सकेंगे


ये तिल तुम्हारे चेहरे पर इस तरह दिखता है 

जैसे गूगल मैप में मेरा अपना गांव।


दीवानों की उस गली को छोड़ कर 

मैं अपनी जिंदगी से मुंह मोड़ कर 

मैं मोहब्बत का हेतराम करने आया हूं। 

मैं आप सभी को राम-राम करने आया हूं।


जब से उतर गई है मेेरे पीठ पर से वो , 

तब से जिंदगी का वजन ज्यादा लग रहा है ।


लुत्फ होठों पर सिमट गया है तेरे 

बेबसी लफ्जों में नाच रही है मेरी 

आँखें रो रो कर कर रही है सबसे 

 मुझको याद आ रही है तेरी।


सितम की आँख में तो सितारा हो नहीं सकता ;

जहाँ पर प्रेम हो वहाँ किनारा हो नहीं सकता।

दिलों की डोर है जो हम सभी को साथ रखती है ; 

यहाँ पर सिर्फ हमारा और तुम्हारा हो नहीं सकता ।।


किनारे पर आकर डूबी है कश्ती मेरी लोग तालियां बजा रहे हैं हौसला देखकर।


नयन के दीप हैं उन बिन उजाला हो नहीं सकता।

जैसे शिव है वैसा जगत में कोई और निराला हो नहीं सकता।

प्रलय को गोद में ठाडे सृजन को साज करते हैं!

वो भोले ही तो है जो हमारे सारे काज करते हैं।


दो बातें क्या कर ली, मां से 

दुख उदास हो गए हैं।


ना हो ख्वाहिशों की तिजारत कभी तमन्नाएं पूरी हो सब अभी। 

मिले दिल सभी से दिलकशी हो जैसे।मिले साथ सबका हमनशी हो जैसे।



रविवार, 25 जून 2023

जख्म दर जख्म की मुझको कहानी होने दो।

 ये दहकता नूर जबसे नज़र की जुंबिश में आ गया

  तबसे उजालों से पनाह मांग रहा हूँ मैं


तू जो हो सामने तो पलकों को झपकने नहीं देता, 

साँसें पूछतीं हैं इशारों में मगर झूमने नहीं देता। 

हाँ देता हूँ धड़कनों को थोड़ी सी इजाजत 

फिर दिल को हौले से तेरा होने नहीं देता। 

मौसम है हिज्र का तो बरसने दो आँसू 

मैं आँखों को लबालब कभी होने नहीं देता। 

एक दिन मैंने देखा था तेरे हाथों में लहू ; 

तब से ही रगों में इसे दौड़ने नहीं देता।


जिसने फूल कभी कुदरत को भी नहीं चढ़ाएं। 

वो शख्स तेरे लिए गुलदस्ता लेकर खड़ा था। 

मेरी जिंदगी में मोहब्बत की लड़ाई अलग थी। 

मैं ज़माने से ज्यादा अपने आप से लड़ा था।



आंसुओं से भीग कर बुझ गई है सिगरेट मेरी।

तुम क्या जानोगे कैसी है रिग्रेट मेरी?



 कम खर्चे में जिंदगी जीने वाले 

जा तू हर मोड़ पर आबाद रहेगा। 

संजीदा चेहरा उलझी हुई दाढ़ी कम भौंहें,  

ये चेहरा देख तुझे याद रहेगा।



किसी मुकम्मल ख्वाब के जैसा 

मैं दिखता हूँ बिल्कुल आपके जैसा।


इस कदर झूठ का इंतजाम कर दिया है; 

भाई ने पैजामे को पैगाम कर दिया है । 

जिसे दी थी हमने सच को सम्भालने की जिम्मेदारी , 

उसी ने उसे नीलाम कर दिया है ।


जख्म दर जख्म की मुझको कहानी होने दो।

प्यास का क्या है मुझको तो बस पानी होने दो।


ये जो मिलकियत देकर गई हो तुम मेरी आँखों को

मैं इतनी बड़ी जागीर का हकदार तो नहीं

 तुम्हें देखकर लोग अब अकीदे पढ़ रहे हैं

 तुम्हें पा लेने का अब कोई हकदार तो नहीं


मेरी धड़कनों से रिश्ता है तेरा , 

 तेरी रूह का बयान हूँ मैं ; 

मेरी हथेलियों की रेखाएं कहती है। 

मोहब्बतों वाला इंसान हूँ मैं । 

मेरी आंखों में दस्तरस है जो , 

उसी सच का निजाम हूँ मैं ; 

तुम जिस दौर में जी रहे हो ना , 

 उसी दौर का अंजाम हूँ मैं।


मेरी तासीर उजालों जैसी है, 

मैं जहां भी रहूंगा, चमकता रहूंगा।


किसी दिन जिम्मेदारियों से हटकर 

जब वक्त की पीठ हौले से थपथपा कर बैठोगी 

तब बीते हुए वक्त के समुंदर से यादों की एक लहर 

तुम्हारे ज़हन से टकराएगी।

फिर तुम अपने दाएं हाथ की हथेली पर चेहरा रखकर 

उस वक्त को याद करोगी 

और अपने चेहरे पर बालों का बिखराव होने दोगी 

क्योंकि तुम्हें पता है। 

मुझे तुम्हारे चेहरे पर बिखरे हुए बाल अच्छे नहीं लगते। 

मैंने कितनी बार तुम्हारे बाल सही किए थे 

और तुमने कितनी बार उसे जान करके खराब 

और हां वो तुम्हारे होंठ जो तुम्हारे मन का दर्पण है। 

अगर वह आगे हैं तो नाराजगी 

पीछे हैं तो कटार 

बीच में है तो बातें 

मेरे पास है तो प्यार 

और भी तो होंगी कई बातें 

जिन्हें सोचने के लिए तुम्हारी मर्यादाएं इजाजत नहीं देंगी 

और ना ही तम्हारी धड़कन संगीत।


सोमवार, 5 जून 2023

जुनूँ के समुंदर से कहीं पार मिल, यार जब भी मिल पहली बार मिल

 


मिटाकर चेहरा आजाद कर दिया हूँ 

 वो लम्हा जो रूक गया था तेरी तस्वीर में 


इस मुंतशिर को जान से जाने नहीं देना 

तुम ख्वाब में भी मुझे कुछ पाने नहीं देना



उबलते हुए खून की भाप हैं आंखें 

इस दिल के समुंदर की नाप हैं आंखें 

वैसे तो मैं सब कुछ हूं अपने बदन का 

मगर मेरे बदन की आप हैं आंखें 


मरकर भी बदन के वो जिंदा रहेगा 

ये दिल है आशिक का ताबिंदा रहेगा 

तुम ढूंढ रही हो जिसे वो कब का मर गया 

तुम पा रही हो जिसे वो  शर्मिंदा रहेगा


होके रुसवा तेरी कहानी से नहीं जाना 

सूख जाना मगर रवानी से नहीं जाना 

तुम पुकारते हो जिसे दिद की दीवारों से 

उस शख़्स को उतर कर पानी से नहीं जाना


मेरी बातें सुनकर सहम जाने वालों 

मेरी ख्वाहिशों का दीदार क्या करोगे 

जिंदगी इतनी तेजी से बढ़ रही है आगे 

तुम रुक कर मेरा इंतजार क्या करोगे 


जुनूँ के समुंदर से कहीं पार मिल 

यार जब भी मिल पहली बार मिल

रविवार, 4 जून 2023

जाड़ा में आके घरवा में हमरे गट्टा बनावेला




जाड़ा में आके घरवा में हमरे गट्टा बनावेला 

सैंयाँ हमरा दिल्ली में जाके काला खट्टा बनावेला 

चार पहर की रात में सैंयाँ 

तीन में भिगो वेला चीनी हो 

एक पहर में बीन बजावे 

कितना लहर हम गिनी हो 


पूरा बदन में लिसा लपेटे जब गट्टा बना वेला 

सैंयाँ हमरा दिल्ली में जाके खट्टा बना वेला 


नई-नई जब आईनी हम गवने खूब भइल खातिरदारी हो 

 सैंयाँ हमका खूब लुभावें नाहीं करावें  बेगारी  हो 


एक-एक चुम्मा पे दस-दस चुम्मा आइसन रहे तैयारी हो 

सैंयाँ हम का खूब लुभावें का का बताई तेवारी हो।


चोली लियावईं लहंगा लियावईं बीता से नापईं रजाई हो 

पहिन के निकली जब हम बहरे जरईं सभई हरजाई हो

घरवा में हमरे पसंद के कितना चीज पडल बा सवाई हो 

सैंया हमारे दरद से पहले खूब लियावईं दवाई हो।