बस्तों का वो मैलापन
जेबों के आकार बदल गए
बच्चों की वो मारा पीटाई
शिक्षक के अधिकार बदल गए
हवा की सोंधी सी खुशबु
फूलों के वो बाग बदल गए
उगता है सूरज पूरब लेकिन
तारों के कुछ माप बदल गए
ज़माने की तो बात करें क्या
देखो पूरे आप बदल गए
सब्ज़ी में धनिए की ख़ुशबू
थाली के आकार बदल गए
सुनने में तो बुरा लगेगा
पर आपस के सब प्यार बदल गए
जीवन का तो ठीक है लेकिन
यार पुराने यार बदल गए

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें