सोमवार, 28 अप्रैल 2025

यार पुराने यार बदल गए



 बस्तों का वो मैलापन 

जेबों के आकार बदल गए 

बच्चों की वो मारा पीटाई 

शिक्षक के अधिकार बदल गए 

 हवा की सोंधी सी खुशबु 

फूलों के वो बाग बदल गए 

उगता है सूरज पूरब लेकिन 

तारों के  कुछ माप बदल गए 

ज़माने की तो बात करें क्या 

देखो पूरे आप बदल गए 

सब्ज़ी में धनिए की ख़ुशबू 

थाली के आकार बदल गए  

सुनने में तो बुरा लगेगा 

पर आपस के सब प्यार बदल गए 

 जीवन का तो ठीक है लेकिन 

यार पुराने यार बदल गए 




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