शनिवार, 18 मार्च 2023

गुलामी की हर सोच से मुक्ति

 


वयसराय गया छोड़कर पर राय हमारी वही रही 

आजादी हर नाम में थी पर हाय गुलामी वही रही 


वही रंग और भेद  दिलों में 

वही द्वेष  का खेल जिलों में 

वहीं जहां में वही जहन में 

ये कैसा अंतर है बहन में  


अपनी मिट्टी अपनी काया 

अपना सूरज अपनी छाया 

अपने में ही जप्त रहे हम 

अपने से ही तृप्त रहे हम  


कहा उन्होंने छुद्र हमी हैं 

कहा उन्होंने कायार है 

कहां है हमें ज्ञान की बातें 

कहां हममें शायर हैं 

उनकी हर क गाली पर

हमने चुप की हांमी दे दी 

अपनी जहन को देखो हमने 

सोच की गुलामी दे दी 


हाँ माना ये सब दोष हमारे 

अज्ञानता के हैं सहारे 

पर यही समय है 

यहीं युक्ति होगी 

गुलामी की हर सोच से मुक्ति होगी 


नहीं बनेगा राजा कोई 

नहीं किसी का हक खाएगा 

जो जितना अच्छा कर्म करेगा 

उतना अच्छा फल पाएगा 





मोहब्बत रेत को मोति बना देती है

भूख घांस को भी रोटी बना देती है 

अगर जज्बा ना हो आजाद रहने का 

तो दुनिया हर शख्स को कैदी बना देती है 



और पत्थरों से नहीं फूलों से बनेगी 

हमारी कहानी उसूलों से बनेगी

गुरुवार, 9 मार्च 2023

देते हैं इम्तिहान दिल मगर फेल नहीं होते...

 


लफ्जों की सड़क से कहीं दूर आ मिले। 

आ सांसो की दहक से कहीं दूर आ मिले। 

आ मिले वहां की जहां जुदाई के खेल नहीं होते। 

देते हैं इम्तिहान दिल मगर फेल नहीं होते।

जहां रूह पर पर्दे की चमक नहीं होती, 

उजाले में अंधेरों की धमक नहीं होती 

नहीं होती निगाहों से बाहर की दुनिया 

नहीं होती जहां शहादत की दुनिया 

जहां झूठ के कोई जादू नहीं होते। 

जुल्म के मजबूत बाजू नहीं होता। 

आ मिले वहां जहां झरने निकलते हैं 

आ मिले वहां जहां लम्हे संभालते हैं।


भर दिया है कान हवाओं का गूलों ने 

अब हर जगह फैल जाएगा अफसाना प्यार का।

तू इस तरह न देख किसी चेहरे की याद को 

बुरा मान जाएगा हर लम्हा इंतजार का।।




मंगलवार, 7 मार्च 2023

अपने रँग में मिला दो मोहन

सुख और दुख का भेद नहीं हो

लगे जो मन पे तो खेद नहीं हो 

वैसा रंग लगे मेरे मोहन 

जैसा लगा है मीरा को जग में 

जैसा चेतक के था हर पग में 

जैसा राम का भूमि में है 

जैसा शंकर का धूमी में है

हो इतना चटक की सूरज जैसे 

हो इतना सहज की मूरत जैसे 

हो इतना अच्छा की राम लिखा हो 

हो इतना सच्चा की धाम लिखा हो 

हो इतना गूढ़ की शाम हो जैसे 

हो इतना सरल की आम हो जैसे

जिसमें द्वंद नहीं हो कोई 

जिसमें रंज नहीं हो कोई 

वैसा रंग लगा दो मोहन 

अपने रँग में मिला दो मोहन 



रविवार, 5 मार्च 2023

धर्मों के सुलझे किस्से

 धर्मों के सुलझे किस्से अब 

पहेली बन सर पर छाये हैं   

जिनको धर्म का पता नहीं वो 

सबको धर्म सिखाने आए हैं 

ममतामयी प्रणाम ही है वो 

जो सब धर्मों का मूल मन्त्र है 

मातृ-पितृ ही सब पंथों में 

सबसे ऊँचे मूल मन्त्र है 


खुद के शौक शखावन खातिर 

निज उर तक को बेंच दिए हैं 

हमने इस जीवन को कितने 

आड़े तिरछे पेंच दिए हैं 


सहज नहीं जीवन का मोति 

सहज नहीं यश का ये मोति 

हमको इतना भान हुआ है 

डरकर जीने वालों का कब 

इस जग में सम्मान हुआ है  


किस्मत पर ही आ टिकी सारे कर्मों की रेस  

अपना नाम फकीर था हम जाते किस देश


ना तो किसी से चाहिए गम का तराजू 

ना तो किसी से खुशी का बाट चाहिए 

बस एक ही ख्वाहिश है मेरी जमाने में 

मुझे बस आप सभी का साथ चाहिए

शुक्रवार, 3 मार्च 2023

दिल वाले सांचे में स्याही चल नहीं पाई।

हजारों गम में होते हम अगर इजहार ना होता। 

अभी तक मर गए होते अगर इकरार ना होता ; 

जुबाँ की शाख से तितली कब की उड़ गई होती। 

अगर इस जीभ पर हर वक्त तेरा नाम ना होता ।


अब और किसी दिए की जरूरत क्या है !

एक चेहरा बहुत है कमरे में रोशनी के लिए।


दिल वाले सांचे में स्याही चल नहीं पाई। 

जहां लिखना था उसे किसी और का नाम संग तेरे।


तू कुछ भी कर ले मगर आदत छूट नहीं सकती 

जो रस्सी समा गई तने में कभी टूट नहीं सकते।


इसके साथ ही बँट रहा है तेरी बेवफाई का सबूत , 

 ये कार्ड सिर्फ तेरी शादी का नहीं है।


लफ्जों को तमीज का जामा लगा कर भेज 

जहां लिखा है तूने हम तुम वहां कॉमा लगा कर भेज 

अब मैं वो नहीं जो तेरी हसरतों पर कर्जदार हो जाऊं 

तू घड़ी भर बिना देखे तो मैं बेजार हो जाऊं। 

मोहब्बत इस रास्ते तक ले आई है मुझे 

मैं एक कदम भी आगे रखूँ तो बेकार हो जाऊं।


हाँ माना मैं रिश्ते में तेरा कुछ नहीं लगता 

मगर फिर भी मेरे बगैर तेरा मन क्यों नहीं लगता?


आओ तुम्हारे साथ जमाना देखें। 

अब क्या कहती हो, बहाना देखें।


चूमना इस दुनिया की सबसे नाजुक कला है।


नजर के सामने धूपों का घर है 

मगर मन में तो बस सूपों का घर है। 

हमारे वक्त की दुनिया यही है। 

यहाँ नजर में बस रूपों का घर है।