शुक्रवार, 3 मार्च 2023

दिल वाले सांचे में स्याही चल नहीं पाई।

हजारों गम में होते हम अगर इजहार ना होता। 

अभी तक मर गए होते अगर इकरार ना होता ; 

जुबाँ की शाख से तितली कब की उड़ गई होती। 

अगर इस जीभ पर हर वक्त तेरा नाम ना होता ।


अब और किसी दिए की जरूरत क्या है !

एक चेहरा बहुत है कमरे में रोशनी के लिए।


दिल वाले सांचे में स्याही चल नहीं पाई। 

जहां लिखना था उसे किसी और का नाम संग तेरे।


तू कुछ भी कर ले मगर आदत छूट नहीं सकती 

जो रस्सी समा गई तने में कभी टूट नहीं सकते।


इसके साथ ही बँट रहा है तेरी बेवफाई का सबूत , 

 ये कार्ड सिर्फ तेरी शादी का नहीं है।


लफ्जों को तमीज का जामा लगा कर भेज 

जहां लिखा है तूने हम तुम वहां कॉमा लगा कर भेज 

अब मैं वो नहीं जो तेरी हसरतों पर कर्जदार हो जाऊं 

तू घड़ी भर बिना देखे तो मैं बेजार हो जाऊं। 

मोहब्बत इस रास्ते तक ले आई है मुझे 

मैं एक कदम भी आगे रखूँ तो बेकार हो जाऊं।


हाँ माना मैं रिश्ते में तेरा कुछ नहीं लगता 

मगर फिर भी मेरे बगैर तेरा मन क्यों नहीं लगता?


आओ तुम्हारे साथ जमाना देखें। 

अब क्या कहती हो, बहाना देखें।


चूमना इस दुनिया की सबसे नाजुक कला है।


नजर के सामने धूपों का घर है 

मगर मन में तो बस सूपों का घर है। 

हमारे वक्त की दुनिया यही है। 

यहाँ नजर में बस रूपों का घर है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें