रविवार, 5 मार्च 2023

धर्मों के सुलझे किस्से

 धर्मों के सुलझे किस्से अब 

पहेली बन सर पर छाये हैं   

जिनको धर्म का पता नहीं वो 

सबको धर्म सिखाने आए हैं 

ममतामयी प्रणाम ही है वो 

जो सब धर्मों का मूल मन्त्र है 

मातृ-पितृ ही सब पंथों में 

सबसे ऊँचे मूल मन्त्र है 


खुद के शौक शखावन खातिर 

निज उर तक को बेंच दिए हैं 

हमने इस जीवन को कितने 

आड़े तिरछे पेंच दिए हैं 


सहज नहीं जीवन का मोति 

सहज नहीं यश का ये मोति 

हमको इतना भान हुआ है 

डरकर जीने वालों का कब 

इस जग में सम्मान हुआ है  


किस्मत पर ही आ टिकी सारे कर्मों की रेस  

अपना नाम फकीर था हम जाते किस देश


ना तो किसी से चाहिए गम का तराजू 

ना तो किसी से खुशी का बाट चाहिए 

बस एक ही ख्वाहिश है मेरी जमाने में 

मुझे बस आप सभी का साथ चाहिए

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें