मंगलवार, 7 मार्च 2023

अपने रँग में मिला दो मोहन

सुख और दुख का भेद नहीं हो

लगे जो मन पे तो खेद नहीं हो 

वैसा रंग लगे मेरे मोहन 

जैसा लगा है मीरा को जग में 

जैसा चेतक के था हर पग में 

जैसा राम का भूमि में है 

जैसा शंकर का धूमी में है

हो इतना चटक की सूरज जैसे 

हो इतना सहज की मूरत जैसे 

हो इतना अच्छा की राम लिखा हो 

हो इतना सच्चा की धाम लिखा हो 

हो इतना गूढ़ की शाम हो जैसे 

हो इतना सरल की आम हो जैसे

जिसमें द्वंद नहीं हो कोई 

जिसमें रंज नहीं हो कोई 

वैसा रंग लगा दो मोहन 

अपने रँग में मिला दो मोहन 



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