रविवार, 30 जनवरी 2022

30 jan

 मोहब्बत को आप कह रहा हूँ

यानि मैं पूण्य को पाप कह रहा हूँ

यानि सलीक़े से पाप कह रहा हूँ



इससे सीधा कोई और रास्ता नही हो सकता ,

मेरा अब किसी और से, कोई वास्ता नही हो सकता ,,


जीने दीजिए बेरूखी से हमें ,

यूँ मुश्कुरा के दिल को न आबाद करिए ,, 

हजारों फूल की मासूमियत कुर्बान हुई ,

तब जाके वो लड़की मेरे घर मेहमान हुई ,,


इससे आगे की दुनिया नहीं देखी जाती ,

मुझसे किसी शक़्स की कमियाँ नहीं देखी जाती,, 



मंगलवार, 25 जनवरी 2022

25 jan

 अपराधों की बात नहीं

माया की कोई काट नहीं 

छोड़ विषय को खुद में डूबे 

ऐसा कोई व्यापार नहीं  , 


यहां धड़ों पर सर दिखतें हैं 

जो झूठों के आगे झुकतें हैं 

इनकी आंखों में गौर से देखो 

स्वार्थ भरे कुछ दीप दिखतें हैं। 


ऐसी दुर्दश दुनिया में 

अच्छी सोच को सोचने वाले 

मिलेंगे तुमको फूल तो लेकिन 

नहीं मगर वह खिलने वाले।



सच  कहूँ  तो  खोजो  मत 

आनन्द  कहाँ  से  होता  है

फूल  के  यौवन  का  सुंदर

विस्तार  कहाँ  से  होता  है 


नदियों  का ये  बहता  पानी 

बेताब  किस  लिए  होता है

मृत्यु  सत्य  है  तो  जन्म का

अधिकार किस लिए होता है


सच   है  यही  की  कस्तूरी 

हर  मृग  के  अंदर होता है

पर नाजाने  क्यूँ  दुविधा में 

वो जंगल-जंगल  ढूँढता  है


बाहर की खुशियों के पीछे

अंदर का आनन्द मर जाता है

राम को राम बनने से पहले

घर का दशरथ मर जाता है।



कर्तव्य की गूँगी राहों पर 

कर्म का गूंजता विधान रहे

हर मानव के झुकते कँधे पर

सम्बल का उजला परिधान रहे


ये वीर भूमी ये प्रणय वात

ये सूरज की उजली आभा

सम्मलित हो हर आँखों में

इज्जत की एक ऊँची साफा


बलिदान वही उच्च रहेगा 

जो मिट्टी को दिया गया हो

वही दूध बन अमृत रहेगा

जो वीरों द्वारा पिया गया हो।


मोहब्बत  रेत  को  मोती  बना देती है

भूख  घाँस  को  भी  रोटी  बना  देती है

अगर  जज्बा  न  हो  आजाद  रहने का

तो ये दुनिया हर शख्स को कैदी बना देती है



इतिहास नहीं पुराण लिखेंगे 

फूल नही मुश्कान लिखेंगे

इन दर्द की ऊँची चट्टानों को 

मलहम का वरदान लिखेंगे


सुबह झरोखे से आती

सूरज की मुश्कान लिखेंगे

बेरँग हुई तितली को भी

बस रँगों से अंजान लिखेंगे


सोमवार, 24 जनवरी 2022

24 jan

 छोड़ना ही है जिसे उसे मंजूर मत करो ,

मोहब्बत के नाम पे ये कुसूर मत करो ,,


अब लगी है चोट दिल पे तो रोते क्यूँ हो ,

मैंने तो पहले ही कहा था हुजूर मत करो ,,


आ रही है याद तो उसकी तसवीर मत देखो,

बैठ जाएगा ये ज़ख्म इसे नासूर मत करो ,,


बहुत ज़्यादा दूरी का मैं तरफदार तो नहीं ,

पर बहुत पास आकर भी उसे दूर मत करो,,


चल जाता है काम तो बस कॉल से चला लो ,

यूँ रोज-रोज मिलने के लिए मजबूर मत करो,,


मिला है जिश्म तो फूलों से सलाहियत लो ,

खामखाँ इस लहर पर बहुत गुरूर मत करो ,,


वैसे तो एक मुझसा दीवाना बहुत है शहर में ,

यूँ हर जगह मुश्कुरा के खुद को हूर मत करो,,


#prankeparinde




रविवार, 23 जनवरी 2022

23jan नेता जी जयंती

 गुफ्तगू अँधेरों की भा जाएगी मुझको ,

लगता है ये उदासी खा जाएगी मुझको ,,

तुम्हें दीवारों से राब्ते की कोई खबर नहीं ,

ये नई दिल लगी  ही तो ढा जाएगी मुझको ,,


चिरागों की सिसकियाँ नहीं देखी जाती मुझसे 

मैं सूरज के इंतजाम पे काम कर रहा हूँ ,

जिंदगी में जितने की हैसियत नहीं है मेरी 

उससे ज्यादा के, घर के काम कर रहा हूँ  ,,


तुम्हें आसान लगती है आजादी की कहानी यारों ,

बदन का लहू नहीं है पानी यारों ,,

कितनों ने घर कितनों ने जवानी छोड़ी ,

तब जाके हर एक की किश्मत में ये निशानी छोड़ी,,



शनिवार, 22 जनवरी 2022

दर्द की दुनिया का पंछी हूँ...




 दर्द की दुनिया का पंछी हूँ

हद की मंजिल जाना है। 

मुझे मुसाफिर बना कर देखो 

मेरे अंदर एक परवाना है।। 


ये जख्म के गहरे दाग देख लो

या लाल आंसुओं की कतार ।

मेरे उन्मुक्त जीवन पर बरसी 

ना जाने कितनी अनंत कटार ।।


पर फिर भी ,

मैं सुबहे अरुण सा चमक रहा हूँ 

अंधेरों पर दमक रहा हूँ । 

तुम तो अपनी आँख खोल लो  

सच क्या है, ये बात बोल लो ।। 

रसना का उपयोग यही है

सच कहूं तो भोग यही है ।


आओ उठाकर शमशीरें 

दे दें तिलिस्म की छाती में ।

या करें वार भीषण उसपे  

जो खेल दिखाए रात्रि में ।।


यहाँ कोई भाग्य नहीं है 

कर्मठता से पहले ।

मानवता का मूल नहीं है 

निर्मलता से पहले।।

शुक्रवार, 21 जनवरी 2022

जवाब

इससे आगे का जवाब नहीं आता, 

मोहब्बत बीच में हो तो हिसाब नहीं आता। 

तुम बुलाते हो तो आ जाते हैं गैर भी कई ,

हम बुलाते हैं तो अहबाब भी नहीं आता।

हमें मंजूर है मोहब्बत में गुलामी क्योंकि,

तुमसे दूर रहकर भी तो इंकलाब नहीं आता!


तुम्हारे न्याय हमें क़ुबूल नहीं हैं ,             

हमें खुद की अदालत खोलनी है ,,            

जो पट्टी आँख पर बाँधी है तुमनें ,          

उसे एक तमाचे से बस खोलनी है ,,


अदम्य साहस की जुबानी , हमी पर अब जवां होने लगी है ,,

दुःखों का दौर अब जा चुका है , कहानी अब दवा होने लगी है,,










रविवार, 16 जनवरी 2022

इनकार नहीं करता .....

 जो अपने होने का एतराज नहीं करता ,

ख़ुदा ऐसे अमीरों पे एतबार नहीं करता ,,


ये कहानी है मेरे दौर के  हर एक शख़्स की  ,

कोई पीछे छूट जाए तो इंतजार नही करता ,,


मैं कलम लेकर माँग रहा हूँ शोहरत अपनी ,

मुझे पता है माँगने से कोई उपकार नहीं करता ,,


बड़ी खुद्दारी से पाला है मुझे मेरे बाप ने,

मेरे पास हो कुछ देने को तो मैं इनकार नही करता ,,

  ....धन्यवाद आप का 🙏

शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

मज़बूरी

तुम्हारी मजबूरियाँ समझ रहा हूँ मैं , 

तुम्हें भी दुनिया जैसा होना है ,,

रविवार, 2 जनवरी 2022

पहले-पहल

 पहले पहल नहीं पता था 

इश्क़ इतना भी होता है, 

जब बिछड़े महबूब किसी का 

आंखें भर-भर रोना होता है। 


हम तो पहली बार निकल कर 

घर से तन्हा हो गए जब 

मां को याद किया पल पल में 

हर पल मां को रोए जब ,


तब हमको विश्वास नहीं था, 

ना ही पता था दिलदारी का 

अबकी जब वो दूर हुई तो 

पता चला इस दुनियादारी का ,,