छोड़ना ही है जिसे उसे मंजूर मत करो ,
मोहब्बत के नाम पे ये कुसूर मत करो ,,
अब लगी है चोट दिल पे तो रोते क्यूँ हो ,
मैंने तो पहले ही कहा था हुजूर मत करो ,,
आ रही है याद तो उसकी तसवीर मत देखो,
बैठ जाएगा ये ज़ख्म इसे नासूर मत करो ,,
बहुत ज़्यादा दूरी का मैं तरफदार तो नहीं ,
पर बहुत पास आकर भी उसे दूर मत करो,,
चल जाता है काम तो बस कॉल से चला लो ,
यूँ रोज-रोज मिलने के लिए मजबूर मत करो,,
मिला है जिश्म तो फूलों से सलाहियत लो ,
खामखाँ इस लहर पर बहुत गुरूर मत करो ,,
वैसे तो एक मुझसा दीवाना बहुत है शहर में ,
यूँ हर जगह मुश्कुरा के खुद को हूर मत करो,,
#prankeparinde
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