मोहब्बत को आप कह रहा हूँ
यानि मैं पूण्य को पाप कह रहा हूँ
यानि सलीक़े से पाप कह रहा हूँ
इससे सीधा कोई और रास्ता नही हो सकता ,
मेरा अब किसी और से, कोई वास्ता नही हो सकता ,,
जीने दीजिए बेरूखी से हमें ,
यूँ मुश्कुरा के दिल को न आबाद करिए ,,
हजारों फूल की मासूमियत कुर्बान हुई ,
तब जाके वो लड़की मेरे घर मेहमान हुई ,,
इससे आगे की दुनिया नहीं देखी जाती ,
मुझसे किसी शक़्स की कमियाँ नहीं देखी जाती,,
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