मंगलवार, 25 जनवरी 2022

25 jan

 अपराधों की बात नहीं

माया की कोई काट नहीं 

छोड़ विषय को खुद में डूबे 

ऐसा कोई व्यापार नहीं  , 


यहां धड़ों पर सर दिखतें हैं 

जो झूठों के आगे झुकतें हैं 

इनकी आंखों में गौर से देखो 

स्वार्थ भरे कुछ दीप दिखतें हैं। 


ऐसी दुर्दश दुनिया में 

अच्छी सोच को सोचने वाले 

मिलेंगे तुमको फूल तो लेकिन 

नहीं मगर वह खिलने वाले।



सच  कहूँ  तो  खोजो  मत 

आनन्द  कहाँ  से  होता  है

फूल  के  यौवन  का  सुंदर

विस्तार  कहाँ  से  होता  है 


नदियों  का ये  बहता  पानी 

बेताब  किस  लिए  होता है

मृत्यु  सत्य  है  तो  जन्म का

अधिकार किस लिए होता है


सच   है  यही  की  कस्तूरी 

हर  मृग  के  अंदर होता है

पर नाजाने  क्यूँ  दुविधा में 

वो जंगल-जंगल  ढूँढता  है


बाहर की खुशियों के पीछे

अंदर का आनन्द मर जाता है

राम को राम बनने से पहले

घर का दशरथ मर जाता है।



कर्तव्य की गूँगी राहों पर 

कर्म का गूंजता विधान रहे

हर मानव के झुकते कँधे पर

सम्बल का उजला परिधान रहे


ये वीर भूमी ये प्रणय वात

ये सूरज की उजली आभा

सम्मलित हो हर आँखों में

इज्जत की एक ऊँची साफा


बलिदान वही उच्च रहेगा 

जो मिट्टी को दिया गया हो

वही दूध बन अमृत रहेगा

जो वीरों द्वारा पिया गया हो।


मोहब्बत  रेत  को  मोती  बना देती है

भूख  घाँस  को  भी  रोटी  बना  देती है

अगर  जज्बा  न  हो  आजाद  रहने का

तो ये दुनिया हर शख्स को कैदी बना देती है



इतिहास नहीं पुराण लिखेंगे 

फूल नही मुश्कान लिखेंगे

इन दर्द की ऊँची चट्टानों को 

मलहम का वरदान लिखेंगे


सुबह झरोखे से आती

सूरज की मुश्कान लिखेंगे

बेरँग हुई तितली को भी

बस रँगों से अंजान लिखेंगे


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