रविवार, 23 जनवरी 2022

23jan नेता जी जयंती

 गुफ्तगू अँधेरों की भा जाएगी मुझको ,

लगता है ये उदासी खा जाएगी मुझको ,,

तुम्हें दीवारों से राब्ते की कोई खबर नहीं ,

ये नई दिल लगी  ही तो ढा जाएगी मुझको ,,


चिरागों की सिसकियाँ नहीं देखी जाती मुझसे 

मैं सूरज के इंतजाम पे काम कर रहा हूँ ,

जिंदगी में जितने की हैसियत नहीं है मेरी 

उससे ज्यादा के, घर के काम कर रहा हूँ  ,,


तुम्हें आसान लगती है आजादी की कहानी यारों ,

बदन का लहू नहीं है पानी यारों ,,

कितनों ने घर कितनों ने जवानी छोड़ी ,

तब जाके हर एक की किश्मत में ये निशानी छोड़ी,,



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