पहले पहल नहीं पता था
इश्क़ इतना भी होता है,
जब बिछड़े महबूब किसी का
आंखें भर-भर रोना होता है।
हम तो पहली बार निकल कर
घर से तन्हा हो गए जब
मां को याद किया पल पल में
हर पल मां को रोए जब ,
तब हमको विश्वास नहीं था,
ना ही पता था दिलदारी का
अबकी जब वो दूर हुई तो
पता चला इस दुनियादारी का ,,
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