रविवार, 2 जनवरी 2022

पहले-पहल

 पहले पहल नहीं पता था 

इश्क़ इतना भी होता है, 

जब बिछड़े महबूब किसी का 

आंखें भर-भर रोना होता है। 


हम तो पहली बार निकल कर 

घर से तन्हा हो गए जब 

मां को याद किया पल पल में 

हर पल मां को रोए जब ,


तब हमको विश्वास नहीं था, 

ना ही पता था दिलदारी का 

अबकी जब वो दूर हुई तो 

पता चला इस दुनियादारी का ,,







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