शनिवार, 4 नवंबर 2023

Bansal speech

 स्वराज्य, स्वयंभू,  स्वामित्व और छत्रपति शिवाजी महाराज कि इस पावन भूमि को मैं प्रणाम करता हूं   

विवेक के देवता भगवान एक दंत को प्रणाम करता हूं और इस मिट्टी में गुथी हुई संस्कृति सभ्यता और संस्कारों को प्रणाम करता हूं 

और आप सभी की उपस्थिति को प्रणाम करता हूं जिनकी उपलब्धता से मेरे मन और आंखों को खुशियों का प्रसाद मिल रहा है


आज हम जिन मुख्य अतिथियों के सानिध्य में अपने इस कार्यक्रम को करने जा रहे हैं उन दोनों का एक मंत्र है कि 

हयात लेकर चलो कायनात लेकर चलो 

चलो तो सारे जमाने को साथ लेकर चलो 


हमारे बीच में आज जो प्रमुख वक्ता हमारे अतिथि हम सभी के ऊर्जा के स्रोत 

जिनके आशीष वचनों से आज हम सभी अभिभूत होने वाले हैं उनका नाम है 

माननीय प्राचार्य विष्णु घुगे सर जो की बंसल क्लासेस महाराष्ट्र के स्टेट हेड हैं तथा उन्हें के साथ कदम से कदम

 मिलाकर शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे कार्यरत माननीय शाकिर कादरी सर आप बंसल क्लासेस महाराष्ट्र के वाइस स्टेट हेड है और हमारे बीच दो और महाविभूति  जिनका स्नेहा पूरे बंसल परिवार को मूर्त - अमूर्त

 रूप में मिलता रहता है जिनमें से एक का नाम अनिल केंदळे सर जो अपने आप में एक प्रसिद्ध इंजीनियर तथा

  एक सफल व्यावसायिक हैं और जो दूसरे सर हैं उनके तो कहने ही  क्या माननीय डॉक्टर अनिकेत बोरगावकर 

सर जो की एमएसएमई महाराष्ट्र के जोनल डायरेक्टर हैं


 मैं आप लोगों से गुजारिश करता हूं कि आप हमारे सभी अतिथियों का एक बार जोरदार तालियां बजाकर स्वागत  करिए 

हम अपने कार्यक्रम को आगे   


 उससे पहले मैं अपने चारों अतिथियों से गुजारिश करता हूं कि विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के सामने दीप प्रज्वलित कर हम सभी के आशीष की कामना करें 


मैं राजेश बोरगांवकर सर से विनती करता हूं कि वह आज के हमारे प्रमुख वक्ता माननीय प्राचार्य विष्णु घुगे सर को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत करें और स्वागत की इसी कड़ी में मैं मोहन बोरगांवकर सर से विनती करता हूं कि हमारे आज के दूसरे प्रमुख वक्ता माननीय शाकिर कादरी सर को पुष्प गुच्छ देकर उनका सम्मान बढ़ाऐ और मैं सुभाष जोशी सर से विनती करता हूं कि माननीय अनिल केंदळे सर को पुष्प  गुच्छ देकर उनका स्वागत करें उनका मान बढ़ाया और माननीय डॉक्टर अनिकेत बोरगांवकर सर को भी पुष्प गुच्छ देकरउनका मान बढ़ाएं  

दीपावली नजदीक आ रही है और बंसल ने जो शिक्षा का दीप इस वाशिम की पावन भूमि में जलाया है 

उसकी रोशनी में आप सभी के बच्चों का भविष्य जरूर और जरूर रोशन होगा…..


क्योंकि ये दिया मेहनत की मिट्टी 

समर्पण के तेल 

और विश्वास की बाती से मिलकर बना है 


जिसके जलने से पूरे वाशिम में ज्ञान का प्रकाश फैल रहा है 


हमारी भगवत गीता कहती है कि 


नहीं ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते  


 इस दुनिया में ज्ञान के समान पवित्र करने वाली कोई भी चीज नहीं है 


और पवित्रता बहुत जरूरी है क्योंकि पवित्रता सरलता की जननी है 


और कौन नहीं चाहेगा। ….  मैं नहीं चाहूंगा कि आप नहीं चाहेंगे         

कि हमारे बच्चों का भविष्य सरल हो उनमें एक संस्कार हो उनमें एक सरलता हो 

 उनके चेहरे पर सौम्यता  का एक नूर हो 

जिससे वो अपनी मिट्टी अपने मानस और अपने माता-पिता का नाम रोशन कर सके   


डर मुझे भी लगा था फासला देखकर

पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर 

मंजिल खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई 

मेरे अंदर का हौसला देखकर


मैं एक बात आप सभी के सामने रखना चाहता हूं


अगर सफलता में शिक्षा एक कारक है तो बंसल उसका आविष्कारक है 


अगर आप पेरेंट्स (अभिभावक) हैं आप अपने बच्चों के लिए कोई भी एक शिक्षण संस्थान का चयन करते हैं तो उसमें पांच चीजों का तो मूल्यांकन जरूर करते हैं


उसमें से पहला मूल्यांकन आप ये  करते हैं कि उसे शिक्षण संस्थान के पास ऊर्जा और ज्ञान की कसौटी पर खरे उतरने वाले शिक्षकों का एक समूह है कि नहीं है 


और जो दूसरा चयन आप क्या करते हैं कि आप देखते हैं शिक्षण संस्थान का वातावरण कैसा है उनके क्लासरूम अच्छे हैं कि नहीं है 


और तीसरी कसौटी जो आप देखते हैं कि शिक्षण संस्थान के पास उसे फील्ड का अनुभव है कि नहीं है


चौथी बात ज्ञान की संजीवनी अर्थात उसे संस्था के पास अपना study material  है की नहीं है 


और जो आखिरी बात आप चयन करते हैं जो सबसे जरूरी  है कि संस्था आपके शहर में आपकी आंखों के तले हो 

जिससे आपका बच्चा बीमारी और अलगाव के दुख को ना छेले बल्कि आपकी ममता और प्रेम के आंचल तले पलता रहे  


इन पांचो कसौटियों को अगर इस वॉशिंग की पावन भूमि पर कोई भी संस्थान पूर्ण करता है तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं  वह सिर्फ एक नाम है जिसका नाम आप स्वयं लेंगे और वो नाम है बंसल क्लासेस। ….. 


मेडल और अपनी  मेहनत के सम्मान से अभिभूत इन बच्चों को देखकर मैं एक बात कहना चाहता हूं कि 

तू शाहीन है परवाज है काम तेरा 

तेरे सामने आसमान और भी है 


और मैं आप लोगों को शुभकामनाएं देना चाहता हूं 


क्योंकि हमारे वेद कहते हैं कि विद्वान वही हैं जो वर्तमान में भविष्य को देख ले और आप लोग इन बच्चों के मुस्कुराते चेहरे ही नहीं बल्कि आप भारत के उज्जवल भविष्य को देख रहे हैं। ….. 



हयात लेकर चलो कायनात लेकर चलो 

चलो तो सारे जमाने को साथ लेकर चलो


प्यासे रहो ना दस्त में बारिश के मुंतज़िर 

मारो जमी पे पांव की पानी निकल पड़े


यूं ही नहीं मिल जाती रही तो मंजिलें 

एक जुनून दिल में जागना पड़ता है 

जब पूछा किसी ने चिड़िया से कैसे बना आशियाना

तो कहती है  बार-बार उड़कर तिनका उठाना पड़ता है


मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है

हर पहलू में जिंदगी का इम्तिहान होता है 

डरने वालों को मिलता नहीं कुछ भी जिंदगी में 

लड़ने वालों के कदमों में जहां होता है


दिल से लिखी बात दिल को छू जाती है 

ये अक्सर अनकही बात कह जाती है 

कुछ लोग दोस्ती के मायने बदल देते हैं 

कुछ लोगों की दोस्ती से दुनिया बदल जाती है


दरिया में अपनी कब्र बनने चला गया 

सूरज को डूबने से बचाने चला गया 

तमन्ना तो सबसे आगे निकलने की थी मगर 

जो गिरे थे उनको उठाने में चला गया 

अपनों की चाहतों में मिलावट थी इस कदर 

तंग आकर दुश्मनों को मनाने चला गया


रास्ते कहां खत्म होते हैं जिंदगी के सफर में 

मंजिले तो वही है जहां ख्वाहिश थम जाए


खुद से जीतने की जिद है मुझे खुद को ही हराना है 

मैं भीड़ नहीं हूं दुनिया की मेरे अंदर एक जमाना है


वो खुद पर इतना गुरुर करते हैं तो इसमें हैरत की बात नहीं 

जिन्हें हम चाहते हैं वो आम को ही नहीं सकते


सफर में मुश्किलें आए तो हिम्मत और बढ़ती है 

कोई अगर रास्ता रोके तो जुर्रत और बढ़ती है 

अगर बिकने पर आ जाओ तो घट जाते हैं दाम अक्सर

न बिकने का हो इरादा तो कीमत और बढ़ती है


ये राहें ले ही जाएंगी मंजिल तक हौसला रखो 

कभी सुना है कि अंधेरों ने सवेरा होने नहीं दिया


हौसले की तरकश में कोशिशों का वो तीर जिंदा रखो 

हार जाओ चाहे जिंदगी में सब कुछ लेकिन फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रखो











कतरा मेरे लहू का इनाम बना लेना 

मानकर सब इसे ही अंजाम बना लेना 

मैं लड़ रहा हूं नफरतों के खिलाफ शहर में 

तुम भी इस घर घर में इंतगाम बना लेना


बुधवार, 25 अक्टूबर 2023

pm

 नेहरू हुए गुलजार कभी तो कभी शास्त्री भी गुलजार हुए। इंदिरा जब जब मोर बनी तो चरणों में उनके वार हुए 

राजीव हुआ जब देश हमारा 

V P बढ़ गया सबका यारा चंद्रशेखर पीवी अटल रहे जब एचडी देवा गुजराल रहे तब 

तब से अटल है देश हमारा मनमोहन मोदी का प्यारा



वफा नहीं ना हीं बेवफाई याद आई मुझे जब भी याद आई बस तेरी याद आई

 चंद कांटो से घिरे और फूल हो गए

हम दिल की गुफ्तगू में मशग़ूल हो गए 

उसने इस कदर पुकार महफिल में हमें 

हम बिना कुछ किये ही मशहूर हो गए


अभी सुकून है जिंदगी में मगर 

तेरा दर्द सहने को जी चाहता है 

बहुत दिन हो गए तन्हाई में रहते हुए 

अब तेरे संग रहने को जी चाहता है


झुकी पलकों से कहा था मुबारक हो 

इस मोहब्बत की अब ना कोई तिज़ारत हो 

मैं तो किनारा हूं मुझे छूटना है पीछे 

देखना आगे फिर ना कोई शरारत हो 


जब भी होगा तेरे सामने मोहब्बत का जिक्र 

तू हर बार मेरा नाम सोच कर रोएगी


बस एक बार उसे गले लगा कर देख लूँ  

मेरा दिल धड़कता कैसे हैं


खुद के सीने से अपना कान नहीं लगा सकता 

मैं सिर्फ तेरे होने का इमकान नहीं लगा सकता 

मुझे एक मौका तो दे अपने गले लगने का 

मैं दूर से अपनी धड़कनों का अनुमान नहीं लगा सकता


जख्म ए उल्फत का नजारा देखिए 

किस हाल में है ये बेचारा देखिए


ये बेहतर से बेहतरीन होने का सफर है 

ये जहां से जहीन होने का सफर है 

ये महत से महीन होने का सफर है 

ये ख्वाब से आमीन होने कासफर है


साथ में उलझनओं की बारातें लिए मैं 

उदासी भरी कई रातें लिए मैं 

कभी गिर के रोया कभी उठ हंसा मैं   

मगर ना रुका ना कभी फंसा मैं  

है नहीं इसमें सिर्फ त्याग की बस कहानी 

मेरे साथ लड़ी है मेरी हर कदम जवानी 

मैं भाई की चाहत का पैगाम लिखता 

जो कुछ मिला है उसका अंजाम लिखता 

लिखता कभी रात की कोई धून मैं  

कभी सुबह की चह चह भी लिखता 

 पर हारा नहीं हूं ना ही थका हूं 

अभी तो मैं बस कुछ ही कर सका हूं



मेरे इस दौर में जिंदगी की आस होते तो 

मैं इस कदर बेचैन ना होता अगर तुम पास होते तो


मिले अगर जख्म तो फिर मलहम की बात होनी चाहिए

अगर चमके ना कोई सितारा मगर रात होनी चाहिए


बहुत कुछ कह नहीं सकता जुबाने जंग करती हैं 

दिलों की बात करता हूं तो निगाहें तंग करती हैं 

मैं मुकम्मल हो नहीं सकता जिसका कहानी में नहीं हो तुम 

मैं उस दिन सो नहीं कर सकता जिस दिन नाराज हो तुम


हम ऐसे ही नहीं चल रहे उम्मीद के ज़वाल पर 

हमने ये  सफर शुरू किया है अपने कमल पर 


अपना भारत अपने राम सारे बोलो जय श्री राम 


पलकों को तीर आबरू को शमशीर कहा 

झूलती लटों को जिगर की जंजीर कहा


अपने आप को बदलकर मैं तुझे अच्छा लगूँ   

इससे अच्छा है कि मैं अच्छा ना लगूँ 


वफा नहीं ना हीं बेवफाई याद आई 

मुझे जब भी याद आई बस तेरी याद आई


संभल के लगा मेरी तलब खुद को 

मैं वो जायका हूं जो भुलाया नहीं जाएगा


दूर होकर भी किस्सा छोड़ गए हो  

तुम मुझमें कुछ हिस्सा छोड़ गए हो गया


कैसे कर लेते हैं लोग नफरत किसी से 

मैं तो अब भी तुझसे प्यार करता हूं 

हालांकि इस प्यार को करने के लिए कोई वजह नहीं है 

बस वजह एक ही है 

कि जब तक तू साथ थी चांदनी ठंडक थी  

रातों में शांति थी 

बातों में क्रांति थी 

हवाएं पास से गुजरती थी 

खुशबू हर लफ्जों से बात करती थी 

दीवारें सजीव लगती थी 

पानी में प्यास नहीं थी 

किसी से कोई आस नहीं थी 

अपने में खोए रहते थे 

तेरे ख्वाबों में सोये रहते थे 

तेरे छूने की याद थी मुझमे 

और कोई नहीं फरियाद थी मुझमे 

 अब तो वक्त का पता चलता है 

रात का होना बद्दुआ लगता है 

कुछ भी अच्छा नहीं लगता 

मैं हरकतों से बच्चा नहीं लगता 

लोग कहते हैं कि बड़ा हो गया हूं मैं 

अपने पैरों पर खड़ा हो गया हूं 

पर मुझे पता है टूट  गया हूं मैं 

हर-हर्फ़ से रूठ गया हूं मैं 

अब मुझे कोई मना नहीं सकता 

कोई कुछ भी कर ले बना नहीं सकता 

ये मिट्टी अब खराब हो गई है 

तेरी चिट्ठी और शराब हो गई है 

मैं इसमें तेरा चाहने वाला नहीं लिख सकता

जुल्म  सकता हूं पर इंसाफ नहीं लिख सकता 


जहाँ था सुकून वहां तुम लिख दिया  

आस पास फूलों की धुन लिख दिया 

और जहां था चिन्ह  प्रश्नवाचक लगा  

वहां अपनी हामी का हम्म लिख दिया 

और थी कुछ निचे इबादत की बातें 

साथ ही लिखी थी शहादत की बातें 

मैं बातों ही बातों में सब लिख दिया 

मैने तुझे अपना रब  लिख दिया


हम भारतीयों की एक कमी है कि 

हमें मोहब्बत करना आता है। 

हमें मोहब्बत बताना भी आता है। 

हमें मोहब्बत निभाना भी आता है। 

हमें मोहब्बत पढ़ना भी आता है। 

हमें मोहब्बत से लड़ना भी आता है। 

हमें मोहब्बत से झगड़ना भी आता है। 

हमें मोहब्बत समझना भी आता है। 

हमें मोहब्बत पे फिसलना भी आता है। 

हमें मोहब्बत से संभालना भी आता है, 

पर हमें नहीं आता तो सिर्फ मोहब्बत जताना 

बस यही एक कमी है हम सभी में


सहज हो तेरा निशा और जिंदगी बस खूब नजर आए। 

मैं जब भी नाम लूँ तेरा मुझे बस तू नजर आए।

फ़िज़ा की रँगतों में भी शामिल हो एक रंग तुम्हारा 

मैं जब भी आँख खोलू तो मुझे बस तू नजर आए।



मन की भावों को जिसने शब्दों का वरदान दिया हो 

ज्ञान के निर्गुण दीप को जिसने सगुणता का सम्मान दिया हो, 

जिसने दिया हो धमनियों में देश प्रेम का अतुलित बंधन 

और हमारी सोच में जलती बनकर विचारों का ईंधन ; 


हाँ हम उस माता के लाल हैं जिसके माथे पर एक बिंदी है। 

गर्व से कहो, हमारी भाषा प्यारी-प्यारी हिंदी है।


विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ।


सितम की आँख में तो सितारा हो नहीं सकता ;

जहाँ पर प्रेम हो वहाँ किनारा हो नहीं सकता।

दिलों की डोर है जो हम सभी को साथ रखती है ; 

यहाँ पर सिर्फ हमारा और तुम्हारा हो नहीं सकता ।।


सहज हरदीप की अपनी रवानी हो न पाती 

तुम्हारे बिन जीवन की कहानी हो न पाती।

महज सब किस्मत की रेखा से उलझते 

तुम्हारे बिन कोई और निशानी होना पाती!


हो कहीं जख्म तो दीदार करना चाहिए। 

मांगे कोई मोहलत तो इंतजार करना चाहिए।  

लौटकर गया है अभी साहिलों से दरिया मगर 

आने वाली लहरों से खबरदार रहना चाहिए।


गर्म हुए दूध को जैसे मलाई बॉंधती है, बहन उस तरह ही भाई की कलाई बाँधती है।






बुधवार, 30 अगस्त 2023

युद्ध में धर्म प्यार में त्याग सीखा

 


बनके तन्हाई कुरेद देता है 

मोहब्बती जख्म को कुरेद देता है 

मैं जैसे ही फूलने लगता हूँ उसको 

कोई यादों में उसकी तस्वीर उड़ेल देता है


हो कहीं जख्म तो दीदार रहना चाहिए। 

मांगे कोई मोहलत तो इंतजार रहना चाहिए।  

लौटकर गया है अभी साहिलों से दरिया मगर 

आने वाली लहरों से खबरदार रहना चाहिए।


रफ्ता रफ्ता हम जिंदगी की उस कहानी में गए 

जिस कहानी में कोई उम्मीद के बादल नहीं थे 

जिस कहानी में कोई सांझ के काजल नहीं थे 


नेहरू हुए गुलजार कभी तो कभी शास्त्री भी गुलजार हुए। 

इंदिरा जब जब मोर बनी तो चरणों में उनके वार हुए 

राजीव हुआ जब देश हमारा 

V P बढ़ गया सबका यारा 

चंद्रशेखर पीवी अटल रहे जब एचडी देवा गुजराल रहे तब 

तब से अटल है देश हमारा मनमोहन मोदी का प्यारा


देख लो ऐ जग के तारों हम तुम्हारे घर में हैं

 ख्वाब छोड़ो नींद तोड़ो हम तुम्हारे घर में हैं

 हमने तुमको खोजा निकला

 भेज नियति का प्रेम प्याला

 जग हमें कहता रहा

 तुच्छता का एक निवाला

 पर हमीं ने तप से अपने

 पर हमीं ने जप से अपने

 बना दिये चहू ओर शिवाला


 हमने तुमको खोजा निकला

 बेज नियति का प्रेम प्याला

 हां भाग्य की विधि मानते हैं पर कर्म करना जानते हैं।

अपने पौरुष की शिला पर जब नया प्रण ठानते हैं।

सहस्त्र वर्षों तक हमीने ज्ञान का उपदेश भेजा।

बुझ चुके जीवन में हमने ज्योति का संदेश भेजा।

अब हर एक चिन्मय अपना ही नया आनन दिखेगा

सोच की बंजर जमीं पर चहू ओर कानन दिखेगा



इतने दिन भी नमक खाकर भी गद्दारी नहीं गई 

और एक हम हैं कि हमारे खून से यारी नहीं गई।


गर्म हुए दूध को जैसे मलाई बॉंधती है, 

बहन उस तरह ही भाई की कलाई बाँधती है।


जब कोई तुमसे कहे कि नहीं आएगा और तुम्हें सुनाई दे की नहीं .. आएगा !! 

तो समझ लेना मोहब्बत हो गई।


दौलतों पर एतबार हो गया 

जब से मोहब्बत बेवफा निकल गई।


कौन देगा मेरे हौसलों की गवाही 

कौन मेरे साथ इम्तिहान में होगा 

तुम जिसकी धौंस से डर रहे हो 

उसका तीर मेरी कमान में होगा।


एक वक्त था कि हम दोनों साथ चलते थे 

दोनों की आंखों में इंतजार चलते थे 

पर ये क्या हुआ कि वक्त ने तमाशा कर दिया 

हम दोनों को जुदा बेतहाशा कर  दिया 


 युद्ध में धर्म प्यार में त्याग सीखा 

हमने अपने बुजुर्गों से ये बात सिखा। 


जब तक थे सफ़र में मंजिल की आस रखा 

जब मिल गई, मंजिल तो सफर की प्यास रखा।


बात रखते हैं मुख पर कभी चुगली नहीं करते। 

कैसी भी हो खाज मगर खुजली नहीं करते।


दिल और रूह की परछाई है दोस्ती   

आलस में उपजी हुई अंगड़ाई है दोस्ती   

दोस्ती जिंदगी के जरूरतों के वास्ते नहीं हैं 

दोस्ती उस मुकाम पर हैं जहां रास्ते नहीं है 

दोस्त है तो समंदर सा हौसला है हमने

दोस्त है तो जीवन का हर फैसला है हमने 

दोस्ती टूटे तो जैसे हम खुद ही टूट गए 

दोस्त रूठे तो जैसे हम खुद ही रूठ गए 

दोस्त हर रास्ते के कंधे 

दुख में मिलाप हैं दोस्ती  

जिंदगी के हर गाने के अलाप हैं दोस्ती

दोस्त है तो फलक में खुशबू है ज़हान की 

दोस्त है तो फिर क्या जरूरत है सम्मान की


लुत्फ होठों पर सिमट गया है तेरे

 बेबसी लफ्जों में नाच रही है मेरी 

आंखें रो रो कर कर रही है सबसे  

मुझको याद आ रही है तेरी।


आशायें यूँ शून्य न होती , 

विपदाओं का वार ना होता ।

भाग्य की पटरी पर देखो , 

चलता सिर्फ इंतजार ना होता ।


तो दूर तुम्हारा प्यार ना होता ।

दूर हमारा प्यार ना होता ।।


गई दिवस की बीत कहानी ,

कैसा राजा कैसी रानी ।

इन निर्मल आँखों से कोई ,

आँशू का व्यापार न होता ।


तो दूर तुम्हारा प्यार ना होता। 

दूर हमारा प्यार ना होता।। 


पँछी के तो भाग्य में देखो 

गगन की ऊंची वीरानी है। 

सागर की लहरों पर देखो, 

तटों की गहरी निगरानी है। 

ऐसी विवश कहानी में फिर 

संघर्षों का इंतजार ना होता। 


तो दूर तुम्हारा प्यार ना होता ।

दूर हमारा प्यार ना होता।।

मंगलवार, 15 अगस्त 2023

26 2023

 

सफलता ढलान है तो खुद को पानी बना लेना 

 सफलता बात है तो खुद को कहानी बना लेना 

सफलता रात है तो खुद को चांदनी बना लेना 

सफलता धुप है तो खुद को आंचल बना लेना 

सफलता सुराख है तो खुद को रोशनी बना लेना 

सफलता धूल है तो खुद को पाँव बना लेना

सफलता पेड़ है तो खुद को छाँव बना लेना 

सफलता सूर्य है तो खुद को light बना लेना 

सफलता IIT और NEET है तो खुद को BANSALite बना लेना


अगर शिक्षा सफलता का कारक है तो बंसल उसका अविष्कारक है।


सर्वप्रथम मैं अपनी बात प्रारंभ करूं उससे पहले 

हम सभी की आन बान शान मेरी जान तिरंगे को मैं प्रणाम करता हूं 

और एक बात कहता हूं कि 

दीवानगी जख्म को मलहम बना देती है 

किसी अनजान को भी हमदम बना देती है 

तुम इस तिरंगे की मासूमियत को तो देखो जरा 

इसकी एक झलक दिलों को मातरम बना देती है 


आज हम सभी बड़े धूमधाम के साथ आजादी के इस पर्व को मना रहे हैं और मां भारती के वीर सपूतों को याद कर रहे हैं जिनके त्याग और बलिदान से ये आजादी का दिन हम सभी को नसीब हुआ है 

और एक बात याद रखना ये आजादी हमें खैरात में नहीं मिली 

ये आजादी हमारे बुजुर्गों के संघर्ष उनके खून पसीने की कमाई है , और हम सभी जानते हैं कि..

मोहब्बत रेत को मोती बना देती है 

भूख घास को भी रोटी बना देती है 

और अगर जज्बा ना हो आजाद रहने का 

तो दुनिया हर शख्स को कैदी बना देती है


आज हम शारीरिक रूप से  गुलाम तो नहीं पर मानसिकता की गुलामी से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाए है 

हम आज भी अपने आप को छोटा समझने की भूल करते हैं 

हम आज भी अपने लोगों को कमजोर समझने की भूल करते हैं 

हम आज भी अपने संसाधनों पे विश्वास नहीं रखते , 

हम आज भी अपने आप से कोई आस नहीं रखते ,

हम आज भी अपने जीवन का लक्ष्य बताने से डरते हैं , 

हम आज भी दूसरों के बहकावें में मरते हैं , 


और इन सभी कमियों को दूर करने का सिर्फ एक ही उपचार है.. वो है शिक्षा 

 शिक्षा ऐसी जैसे rainbow हो जिसमे जीवन के हर एक पहलू का रंग समाया हो 

जिसमे निति हो, जिसमें नैतिकता हो, जिसमें नायक हो , जिसमें नेह हो , जिसमे नम्रता हो , जिसमे निर्णायकता और निर्मलता हो 


और मुझे ये कहते हुए ख़ुशी हो रही कि आपके इस विद्यालय में आपके इस स्कूल में जीवन के सभी मूल्यों का वरदान दिया जा रहा हैं 

और एक ऐसा ही संस्थान ,   एक ऐसा ही परिवार 

जिसको हम आदर से BANSAL CLASSES  के नाम से जानते हैं 

जिस परिवार का मैं  खुद भी हिस्सा हूँ 

वो दिन रात  (24x 7) बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने  के लिए शिक्षा का प्रकाश लिए विद्यार्थियों  साथ-साथ चल रहा हैं 

और मेरी एक बात याद रखना आप लोग 

" सफलता दौर से नही आती 

सफलता तौर से आती ; 

 उसको पाने का एक तरीका होता है और वो तरीका वही बता सकते है जिनको उसका अनुभव हो 

और अनुभव बंसल क्लासेज का ,   उस वक्त से है जब इस भारत भूमि पर 

कोचिंग नाम की चिड़िया उड़ती भी नहीं थी 

तब से श्रद्धेय बंसल जी ने अपनी मेहनत और लगन से कोटा को कोचिंग हब बना दिया था 

जिसकी आज अनेको नेक शाखाएँ पूरे भारत में इस शिक्षा और मार्गदर्शन देने का काम कर रहीं हैं .....

रविवार, 6 अगस्त 2023

वेद रिचा है गोपिका, हरि संग कियो विहार ।।

 


भोर भयौ जब पृथ्वी पर, तब हरि लियौ अवतार ।

वेद रिचा है गोपिका, हरि संग कियो विहार ।।

ब्रज में श्रीकृष्ण गोप रूप में ही अवतरित हुए हैं। कृष्ण यदि ईश्वर हैं तो गोपियों को क्या माना जाए, यह एक प्रश्न है ? गोपियाँ श्रीकृष्ण की शक्ति हैं। शक्ति जिससे आश्रय पाती हैं, उससे कभी अलग नहीं होतीं। इसलिए गोपियाँ और कृष्ण अनन्य हैं। उनमें एक अंगी है। दूसरा उसका अवयव है, एक गुणी है तो दूसरा गुण है। इसीलिए सूर ने लिखा है-

गोपी ग्वाल कान्ह दुई नाहीं ये कहुं नेक न न्यारे ।

एके देह बिहार करि राखे ग्वाल मुरारि ।।

अभिप्राय यह है कि गोप-गोपी और श्रीकृष्ण ये दो पृथक-पृथक नहीं हैं, इनमें परस्पर कोई अन्तर नहीं है। वे अद्वैत, अविछिन्न और अविभाज्य हैं। यदि इन्हें आध्यात्मिक दृष्टि से निहार कर देखा जाए तो कृष्ण आत्मा हैं और गोपियाँ उस आत्मत्व की वृत्तियाँ हैं। यही कारण है कि, सूर ने इन गोपियों को स्वामिनी के रूप में देखा है-

सूर की स्वामिनी नारि ब्रजभामिनी ।।

सूर-साहित्य का अवलोकन करने पर ऐसा लगता है कि आरम्भ में बाल-कृष्ण के सौन्दर्य पर वे मोहित होती हैं और जैसे ही वह यशोदा नन्दन को आँगन में खेलते हुए देखती हैं, वैसे ही अपनी सुधि-बुधि खो बैठती हैं-

जब तैं आँगन खेलत देख्यो मैं जसुदा कौ पूत री ।

तब तैं गृह सौं नातौ टूट्यौ, जैसे काचौं सूत री ।

अति बिसाल बारिज-दल लोचन, राजति-काजल रखे री ।

इच्छा सौं मकरन्द लेत मनु अलि गोलक के वेष री ।।

थोड़ा और सयाने होने पर कृष्ण नटखट, विनोदी और वाक्पटु हो जाते हैं, तब गोपियों को कृष्ण रिझाने लगते हैं, अर्थात बड़े होने पर वे ‘माखन चोर’ हो जाते हैं। माखन चोरी के माध्यम से श्रीकृष्ण जो क्रीड़ाएँ करते हैं और जिस चतुराई से पेश आते हैं उसे गोपियाँ अपेक्षाकृत अधिक पसन्द करती हैं। गोपियों के हृदय में स्थित स्नेह-प्रेम में परिवर्तित हो जाता है। उनके हृदय में कामना या काम (इच्छा) जागती है। इस कामना की जागृति के कारण उनकी यह अभिलाषा होती है कि कृष्ण उनके घर में आकर माखन चुराते तो अच्छा रहता-

ब्रज घर-घर प्रगटी यह बात।

दधि माखन चोरी करि लै हरि, ग्वाल सखा सँग खात ।।

ब्रज बनिता यह सुनि मन हरिषित, सदन हमारे आवैं ।

माखन खात अचानक पावैं, भुज धरि उरहि छुवावैं ।।

मनही मन अभिलाष करति सब हृदय धरति यह ध्यान ।

यही नहीं वे श्रीकृष्ण को अपने आलिंगनपाश में आबद्ध करने को उत्सुक हैं-

चली ब्रज घर-घरनि यह बात।

नंदसुत सँग सखा लीन्हें, चोरि माखन खात।।

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कोउ कहति मैं देख पाऊ, भरि धरौं अँकवारि ।

कोई कहति, मैं बाँधि राखों, को सकै निरबारि।।

ऐसी दशा में गोपियों का प्रेम श्रीकृष्ण के प्रति अत्यधिक सुदृढ़, तीव्रता और गम्भीर स्थिति में पहुँच जाता है। गोपियाँ सर्वश्रेष्ठ प्रेमिकायें हैं, जो अपने प्रिय श्रीकृष्ण के लिए अपने पिता, माता, भाई, पुत्र और पति सबकी प्रगाढ़ मोह-माया को तोड़ देती हैं। प्रेम ही उनके जीवन का महामन्त्र है। निश्चय ही वे ऐसी प्रेम-रूपा हैं जो समस्त लोक-लाज और मर्यादा का बन्धन तोड़ देती हैं। गोपियों के नेत्र श्रीकृष्ण-दर्शन के लिए लालायित हैं। उनके श्रवण कृष्ण के मधुर शब्दों को सुनने के लिए आतुर और उनकी जिह्वायें श्याम श्याम की रट लगाये रहती हैं-

पलक ओट नहिं होत कन्हाई ।

चर गुरुजन बहुते विधि त्रासत, लाज करावत लाज न आई।

नैन जहाँ दरसनि हरि अटकै, स्त्रवन थके सुनि वचन सुहाई।

रसना और नहीं कछु भाषति, स्याम-स्याम रट इहै लगाई ।।

चित चंचल संगहि संग डोलत लोक-लजा मरजाद मिटाई।

मन हरि लियौ सूर- प्रभु तबहीं, तन बपुरे को कहा बसाई ।।

सारी गोपियाँ सौन्दर्य और सुषमा की अवतार हैं। ये गोपियाँ बाह्य अलंकरण से अलंकृत होकर और भी मोहक और आकर्षक बन जाती हैं। सूर ने अपने पदों में उनकी सौन्दर्य और सुषमा का चित्रण किया है। वह सौन्दर्य वर्णन का प्रतिमान है-

बनी-ब्रज-नारि सोभा भारि ।

पगनि जेहरि लाल लहँगा, अंग पंच-रंग सारि ।।

किंकिनी कटि, धनित कंकन, कर चुरी झनकार ।

हृदय चौकी चमकि बैठी, सुभग मोतिन हार।

पनघट-लीला, दान-लीला, बसन्त, फाग, रासलीला के अवसर पर गोपियाँ अपनी प्रगल्भता, चंचलता और मुखरता को लेकर सामने आती हैं। कृष्ण के प्रति वे इतनी अनुरक्त हैं कि ‘आरज-पथ’ और ‘गृह व्यवहार’ को त्यागने में देर नहीं लगाती हैं-

जबहि वन मुरली स्त्रवन परी ।

चकित भँई गोप कन्या सब, काम-धाम बिसरी ।।

कुल मर्जाद बेद की आज्ञा, नैकहुँ नहीं डरी ।

स्याम-सिन्धु, सरिता- ललना-गन, जल की डरनि डरीं ।।

अंग- मरदन करिवै कौं लागी, उबटन तेल धरीं ।

जो जिहि भाँति चली सौं तैसेहि, निसि बन कौ जु खरी ।।

सुत-पति नेह, भवन-जन-संका, लज्जा नाहिं करी ।

सूरदास-प्रभु मन हरि लीन्हौं, नागर नवल हरी ।।

एक वियोग ही प्रेम का सच्चा निकष है। इस निकष पर भी गोपियाँ खरी उतरती हैं। कृष्ण जब ब्रज में थे तो उनसे संयुक्त होकर समस्त सुखों को लूटा पूरी तरह से गोपियों ने और उन्हीं गोपियों पर जब कृष्ण मथुरा चले गये तो वियोग का पर्वत फाट पड़ा और तब कृष्ण संयोग सुख का लाभ लूटने वाली गोपियों को वियोग-व्याधि के रूप में संयोग सुख का पूरमपूर मूल्य भी चुकाना पड़ा। यदि इनके संयोग सुख में इतनी सघनता और स्फीतता न होती तो इनका वियोग इतना सघन और स्फीत न होता। मगर वियोग के इस निकष पर ये गोपियाँ परम खरी उतरीं। उनकी विरह-वेदना भ्रमरगीत के बहाने इस कदर और इतनी उमड़ी है कि उसका कोई जवाब नहीं है। उदाहरण के लिए सूर का यह प्रसिद्ध पद देखा जा सकता है-

प्रीति करि दीन्हीं गरे छुरी।

जैसे बधिक चुगाइ कपट कन, पाछै करत बुरी।।

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प्रीति पतंग करी पावक सौ, आपै प्रान दह्यौ ।।

निसि दिन बरसत नैन हमारे।

सदा रहति पावस रितु हम पर, जब तैं स्याम सिधारे।।

गोपियों की प्रेम विषयक अनन्यता के विषय में डॉ० ब्रजेश्वर वर्मा का यह अभिमत सर्वथा युक्तिसंगत ही है-

“गोपियाँ तो अनन्य प्रेम की स्वयं ही ज्वलंत उदाहरण हैं। उनके अनन्य प्रेम की विशेषता यह है कि वे कृष्ण के अलौकिक व्यक्तित्व के कारण उनसे प्रेम नहीं करतीं, वरन् उनका प्रेम कृष्ण की रूप- माधुरी पर अवलम्बित है। यहीं नहीं, वे स्पष्ट रूप से कृष्ण के अलौकिक व्यक्तित्व की अवहेलना करती हैं। अनन्य भाव की चरम परिणति यही है, जिसमें प्रेमी किसी प्रलोभन के वश में प्रेम नहीं करता वरन् हृदय के सच्चे अनुराग की स्वाभाविक प्रवृत्ति से विवश होकर उसे प्रेम पात्र पर सर्वस्व निछावर करना पड़ता है।”

कृष्ण के गमन के पश्चात गोपियों का सारा जीवन वियोग भाराक्रान्त है। अन्त में, उन्हें कुरुक्षेत्र में, कृष्ण के दर्शन होते हैं। सूर ने गोपियों की पूरी संख्या १६ सहस्त्र मानी है, जिनमें से ललिता, चन्द्रावली, श्यामा और विशाखा आदि अनेकानेक गोपियों के नामों का उल्लेख सूरसागर में किया गया है-

मुरली ध्वनि करी वलवीर ।

गड़ सोलह सहस हरि पैं छाड़ि सुत पति नेह।।

एक पद में तो सूर ने गोपियों के अनेक नामों की गिनती करायी हैं-

स्यामा, , कामा, चतुरा, नवला, प्रमुदा, सुमुदा नारी।

सुषमा, शीला, अवधा, नन्दा, बून्दा, यमुना सारी ।

कमला, तारा, विमल, चन्द्रा, चन्द्रावलि सुकुमारी ।

अमला, अवला, कंजा, मुकुतारु, हीरा, नीला, प्यारी ।

सुमना, बहुला, चंपा, जुहिला, ज्ञाना, भाना, भाउ ।

प्रेमा, दामा, रूपा, हंसा, रँगा, हरषा, जाउ ।।

दुर्वा, रम्भा, कृस्ना, ध्याना, मैना, नैना, रूप ।

रत्ना, कुसुमा, मोहा, करुना, ललना, लोभानूप ।।

बुधवार, 26 जुलाई 2023

पर्यावरण

 स्कंद पुराण में एक सुंदर श्लोक है।


अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम्

न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।

कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च

पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।।


अश्वत्थः = पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)

पिचुमन्दः = नीम (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)

न्यग्रोधः = वटवृक्ष (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)

चिञ्चिणी = इमली (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)

कपित्थः = कविट (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)

बिल्वः = बेल (85% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)

आमलकः = आवला (74% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)

आम्रः = आम (70% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)

(उप्ति = पौधा लगाना)


अर्थात् - जो कोई इन वृक्षों के पौधो का रोपण करेगा, उनकी देखभाल करेगा उसे नरक के दर्शन नही करने पड़ेंगे।


पीपल नीम, वटवृक्ष और कवित बेल सब आम 

इमली आँँवल जे सिंचईं तेकर नहीं बिगड़े कोई काम।


मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णु शाखा शंकरमेवच।

पत्रे पत्रे सर्वदेवायाम् वृक्ष राज्ञो नमोस्तुते।।


भावार्थ -जिस वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा जी तने पर श्री हरि विष्णु जी एवं शाखाओं पर देव आदि देव महादेव भगवान शंकर जी का निवास है और उस वृक्ष के पत्ते, पत्ते पर सभी देवताओं का वास है ऐसे वृक्षों के राजा पीपल को नमस्कार है🙏


इस जीवन का फेम अलग है।

 हौसला दुख दर्द की कहानी से ज्यादा । 

आंसू की कीमत नहीं है पानी से ज्यादा।।


ये खून राजपूताना है जिसका हर कोई दीवाना है।


बुरा वक्त दरवाजा खटखटा के नहीं आता।


चाहे हो अब राह अकेली ;  

चाहें रुठे हर एक सहेली , 

पर मेहनत से ना इनकार करेंगे 

हम neet qualify इस बार करेंगे  


चाहे एक वक्त का खाना छूटे 

चाहे हमारा नहाना छूटे  

पर question से दो दो हाथ करेंगें 

हम neet qualify इस बार करेंगे


क्या teacher की बात मानी हमने 

क्या याद करली हर एक कहानी हमने 

क्या PYQ पर वार किया हैं 

हर question दो दो बार किया है ,

अगर नही किया तो , प्रण लो इस बार करेंगें , 

हम neet qualify इस बार करेंगे......


पापा का सपना मम्मी की बातें।

अपनी मेहनत की हर वो रातें।

ऐसे नहीं बर्बाद करेंगे। 

हम neet क्वालीफाई इस बार करेंगे।...


किस्मत क्या है, जादू है 

अपना हर लम्हे पर काबू है?

ऐसे बैठकर नहीं इंतजार करेंगे

हम neet qualify इस बार करेंगे......


कॉपी कलम से प्रेम अलग है। 

डॉक्टर वाला नेम अलग है। 

इस जीवन का फेम अलग है।

इसे ऐसे ही थोड़ी बेकार करेंगे।

हम neet qualify इस बार करेंगे......


मंगलवार, 25 जुलाई 2023

कोई ना दे साथ तो अपने साथ चलो भीड़ बहुत है जमाने की अपने पास चलो ...



ये हुनर तुम्हें सिखाना नहीं पड़ेगा, 

मोहब्बत है तो फिर बताना नहीं पड़ेगा। 

आंखें खुद ही देंगी जवाब सभी को 

तुम्हें बार-बार होठ हिलाना नहीं पड़ेगा।


कोई ना दे साथ तो अपने साथ चलो 

भीड़ बहुत है जमाने की अपने पास चलो 

हो रही है थकान लंबे रास्तों से तो 

करके कहीं दो पल इंतजार चलो।


तन्हाइयों का मौसम है जरा साथ चलो 

करके मेरा भी जरा इंतजार चलो। 

इतना तेज भी नही की साथ छूट जाए मेरा 

और इतना धीमा भी नहीं मेरे बाद चलो।


बहुत आ रही थी हिचकी पानी पी लिया तुमने 

मुझको करके यूं बर्बाद जिंदगी जी लिया तुमने 

मेरा तो चाक दामन है गरीबी झांकती जिससे 

पर सुना है मखमली कपड़े का दामन सी लिया तुमने 

यहाँ तो अब भी आंखों से वही धार बहती है 

पर सुना है मेरे हिस्से का आंसू पी लिया तुमने।

शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

दूर हमारा प्यार ना होता...

 आशायें यूँ शून्य न होती , 

विपदाओं का वार ना होता ।

भाग्य की पटरी पर देखो , 

चलता सिर्फ इंतजार ना होता ।


तो दूर तुम्हारा प्यार ना होता ।

दूर हमारा प्यार ना होता ।।


गई दिवस की बीत कहानी ,

कैसा राजा कैसी रानी ।

इन निर्मल आँखों से कोई ,

आँशू का व्यापार न होता ।


तो दूर तुम्हारा प्यार ना होता। 

दूर हमारा प्यार ना होता।। 


पँछी के तो भाग्य में देखो 

गगन की ऊंची वीरानी है। 

सागर की लहरों पर देखो, 

तटों की गहरी निगरानी है। 

ऐसी विवश कहानी में फिर 

संघर्षों का संसार ना होता। 


तो दूर तुम्हारा प्यार ना होता ।

दूर हमारा प्यार ना होता।।

शुक्रवार, 30 जून 2023

घर से बिछड़े हुए मुसाफिर

 


नए उजालों की दस्तकों  से उछल पड़ेंगे ख़्वाब सारे 

मैं दरमियां जब रो पडूंगा मचल पड़ेंगे आब सारे 

मेरी जवानी की जिंदगी में ये कैसे ख़्वाब  लिख रही हो 

मैं जिनसे हूँ दूर बैठा तुम उन्हें पास लिख रही हो 

घर से बिछड़े हुए मुसाफिर कभी न मंजिल पा सकेंगे 

होके दरमियाँ  की कहानी घर कभी ना जा सकेंगे


ये तिल तुम्हारे चेहरे पर इस तरह दिखता है 

जैसे गूगल मैप में मेरा अपना गांव।


दीवानों की उस गली को छोड़ कर 

मैं अपनी जिंदगी से मुंह मोड़ कर 

मैं मोहब्बत का हेतराम करने आया हूं। 

मैं आप सभी को राम-राम करने आया हूं।


जब से उतर गई है मेेरे पीठ पर से वो , 

तब से जिंदगी का वजन ज्यादा लग रहा है ।


लुत्फ होठों पर सिमट गया है तेरे 

बेबसी लफ्जों में नाच रही है मेरी 

आँखें रो रो कर कर रही है सबसे 

 मुझको याद आ रही है तेरी।


सितम की आँख में तो सितारा हो नहीं सकता ;

जहाँ पर प्रेम हो वहाँ किनारा हो नहीं सकता।

दिलों की डोर है जो हम सभी को साथ रखती है ; 

यहाँ पर सिर्फ हमारा और तुम्हारा हो नहीं सकता ।।


किनारे पर आकर डूबी है कश्ती मेरी लोग तालियां बजा रहे हैं हौसला देखकर।


नयन के दीप हैं उन बिन उजाला हो नहीं सकता।

जैसे शिव है वैसा जगत में कोई और निराला हो नहीं सकता।

प्रलय को गोद में ठाडे सृजन को साज करते हैं!

वो भोले ही तो है जो हमारे सारे काज करते हैं।


दो बातें क्या कर ली, मां से 

दुख उदास हो गए हैं।


ना हो ख्वाहिशों की तिजारत कभी तमन्नाएं पूरी हो सब अभी। 

मिले दिल सभी से दिलकशी हो जैसे।मिले साथ सबका हमनशी हो जैसे।



रविवार, 25 जून 2023

जख्म दर जख्म की मुझको कहानी होने दो।

 ये दहकता नूर जबसे नज़र की जुंबिश में आ गया

  तबसे उजालों से पनाह मांग रहा हूँ मैं


तू जो हो सामने तो पलकों को झपकने नहीं देता, 

साँसें पूछतीं हैं इशारों में मगर झूमने नहीं देता। 

हाँ देता हूँ धड़कनों को थोड़ी सी इजाजत 

फिर दिल को हौले से तेरा होने नहीं देता। 

मौसम है हिज्र का तो बरसने दो आँसू 

मैं आँखों को लबालब कभी होने नहीं देता। 

एक दिन मैंने देखा था तेरे हाथों में लहू ; 

तब से ही रगों में इसे दौड़ने नहीं देता।


जिसने फूल कभी कुदरत को भी नहीं चढ़ाएं। 

वो शख्स तेरे लिए गुलदस्ता लेकर खड़ा था। 

मेरी जिंदगी में मोहब्बत की लड़ाई अलग थी। 

मैं ज़माने से ज्यादा अपने आप से लड़ा था।



आंसुओं से भीग कर बुझ गई है सिगरेट मेरी।

तुम क्या जानोगे कैसी है रिग्रेट मेरी?



 कम खर्चे में जिंदगी जीने वाले 

जा तू हर मोड़ पर आबाद रहेगा। 

संजीदा चेहरा उलझी हुई दाढ़ी कम भौंहें,  

ये चेहरा देख तुझे याद रहेगा।



किसी मुकम्मल ख्वाब के जैसा 

मैं दिखता हूँ बिल्कुल आपके जैसा।


इस कदर झूठ का इंतजाम कर दिया है; 

भाई ने पैजामे को पैगाम कर दिया है । 

जिसे दी थी हमने सच को सम्भालने की जिम्मेदारी , 

उसी ने उसे नीलाम कर दिया है ।


जख्म दर जख्म की मुझको कहानी होने दो।

प्यास का क्या है मुझको तो बस पानी होने दो।


ये जो मिलकियत देकर गई हो तुम मेरी आँखों को

मैं इतनी बड़ी जागीर का हकदार तो नहीं

 तुम्हें देखकर लोग अब अकीदे पढ़ रहे हैं

 तुम्हें पा लेने का अब कोई हकदार तो नहीं


मेरी धड़कनों से रिश्ता है तेरा , 

 तेरी रूह का बयान हूँ मैं ; 

मेरी हथेलियों की रेखाएं कहती है। 

मोहब्बतों वाला इंसान हूँ मैं । 

मेरी आंखों में दस्तरस है जो , 

उसी सच का निजाम हूँ मैं ; 

तुम जिस दौर में जी रहे हो ना , 

 उसी दौर का अंजाम हूँ मैं।


मेरी तासीर उजालों जैसी है, 

मैं जहां भी रहूंगा, चमकता रहूंगा।


किसी दिन जिम्मेदारियों से हटकर 

जब वक्त की पीठ हौले से थपथपा कर बैठोगी 

तब बीते हुए वक्त के समुंदर से यादों की एक लहर 

तुम्हारे ज़हन से टकराएगी।

फिर तुम अपने दाएं हाथ की हथेली पर चेहरा रखकर 

उस वक्त को याद करोगी 

और अपने चेहरे पर बालों का बिखराव होने दोगी 

क्योंकि तुम्हें पता है। 

मुझे तुम्हारे चेहरे पर बिखरे हुए बाल अच्छे नहीं लगते। 

मैंने कितनी बार तुम्हारे बाल सही किए थे 

और तुमने कितनी बार उसे जान करके खराब 

और हां वो तुम्हारे होंठ जो तुम्हारे मन का दर्पण है। 

अगर वह आगे हैं तो नाराजगी 

पीछे हैं तो कटार 

बीच में है तो बातें 

मेरे पास है तो प्यार 

और भी तो होंगी कई बातें 

जिन्हें सोचने के लिए तुम्हारी मर्यादाएं इजाजत नहीं देंगी 

और ना ही तम्हारी धड़कन संगीत।


सोमवार, 5 जून 2023

जुनूँ के समुंदर से कहीं पार मिल, यार जब भी मिल पहली बार मिल

 


मिटाकर चेहरा आजाद कर दिया हूँ 

 वो लम्हा जो रूक गया था तेरी तस्वीर में 


इस मुंतशिर को जान से जाने नहीं देना 

तुम ख्वाब में भी मुझे कुछ पाने नहीं देना



उबलते हुए खून की भाप हैं आंखें 

इस दिल के समुंदर की नाप हैं आंखें 

वैसे तो मैं सब कुछ हूं अपने बदन का 

मगर मेरे बदन की आप हैं आंखें 


मरकर भी बदन के वो जिंदा रहेगा 

ये दिल है आशिक का ताबिंदा रहेगा 

तुम ढूंढ रही हो जिसे वो कब का मर गया 

तुम पा रही हो जिसे वो  शर्मिंदा रहेगा


होके रुसवा तेरी कहानी से नहीं जाना 

सूख जाना मगर रवानी से नहीं जाना 

तुम पुकारते हो जिसे दिद की दीवारों से 

उस शख़्स को उतर कर पानी से नहीं जाना


मेरी बातें सुनकर सहम जाने वालों 

मेरी ख्वाहिशों का दीदार क्या करोगे 

जिंदगी इतनी तेजी से बढ़ रही है आगे 

तुम रुक कर मेरा इंतजार क्या करोगे 


जुनूँ के समुंदर से कहीं पार मिल 

यार जब भी मिल पहली बार मिल

रविवार, 4 जून 2023

जाड़ा में आके घरवा में हमरे गट्टा बनावेला




जाड़ा में आके घरवा में हमरे गट्टा बनावेला 

सैंयाँ हमरा दिल्ली में जाके काला खट्टा बनावेला 

चार पहर की रात में सैंयाँ 

तीन में भिगो वेला चीनी हो 

एक पहर में बीन बजावे 

कितना लहर हम गिनी हो 


पूरा बदन में लिसा लपेटे जब गट्टा बना वेला 

सैंयाँ हमरा दिल्ली में जाके खट्टा बना वेला 


नई-नई जब आईनी हम गवने खूब भइल खातिरदारी हो 

 सैंयाँ हमका खूब लुभावें नाहीं करावें  बेगारी  हो 


एक-एक चुम्मा पे दस-दस चुम्मा आइसन रहे तैयारी हो 

सैंयाँ हम का खूब लुभावें का का बताई तेवारी हो।


चोली लियावईं लहंगा लियावईं बीता से नापईं रजाई हो 

पहिन के निकली जब हम बहरे जरईं सभई हरजाई हो

घरवा में हमरे पसंद के कितना चीज पडल बा सवाई हो 

सैंया हमारे दरद से पहले खूब लियावईं दवाई हो।






रविवार, 28 मई 2023

संसद




 लिखो हर आँख में सपनों की दुनिया 

बजे हर कान में जयघोष ध्वनियाँ  

तुम्हारी जीत का स्वर्णिम पल है अब तो 

उठो जागो यही कल है अब तो 

नहीं संकट का कोई वर है अब तो 

हमारे कल का नया घर है अब तो 


यहीं उम्मीद की कलियों पे फिर से बात होगी 

हर दीद में सुकून की फिर रात होगी 

हां उसी दर को ठिकाना मिल गया है 

हमारे संघर्ष को जमाना मिल गया है 


खेत की मेड़ों पर चलता हो जो कोई 

किसी बेचारगी में पलता हो जो कोई 

हर एक दीन के कंधे को बंधु मिल गया है 

हमारे मंथन को सिंधु मिल गया है 


ये ईंटों का नहीं त्यागो का भवन है 

ये सुभाषित भगत का बस चंद्र वन है 

इसी में पलके हम सब राम होंगे 

इसी में धन्य सारे काम होंगे 


देखो,  हर आँख में यही ख्वाब थे ना 

किसी ने तू बनाया पर सहज में आप थे ना

ये तुम्हारे पौरुष का ही तो फल है 

जो तुमने सोचा था वही तो कल है


जय हिंद जय भारत जय संसद







रविवार, 21 मई 2023

मौसम है हिज्र का तो बरसने दो आँसू ;

 


तू जो हो सामने तो पलकों को झपकने नहीं देता, 

साँसें पूछतीं हैं इशारों में मगर झूमने नहीं देता। 

हाँ देता हूँ धड़कनों को थोड़ी सी इजाजत 

फिर दिल को हौले से तेरा होने नहीं देता। 

मौसम है हिज्र का तो बरसने दो आँसू ; 

मैं आँखों को लबालब कभी होने नहीं देता। 

एक दिन मैंने देखा था तेरे हाथों में लहू ; 

तब से ही रगों में इसे दौड़ने नहीं देता।


इस बात पर हुई है जमानत मोहब्बत की;  

कि मैं जिंदगी भर रहूँगा अमानत मोहब्बत की।

तू रुठी है तो एक बार मनाने मोहब्बत जाए, 

मैं भी तो जरा देखूँ शयानत मोहब्बत की।


जख्म दर जख्म की मुझको कहानी होने दो।

प्यास का क्या है मुझको तो बस पानी होने दो।


पक्की मिट्टी से बने ईटों की कब्र में लोग 

ना जाने क्यों जिंदगी दफन कर रहे हैं?


स्त्रियां नदी की कोमल धाराएं जैसी होती हैं जो पुरुष के कठोर पत्थर जैसे मन पर।इतनी कोमलता से वार करती हैं कि पुरुष को पता ही नहीं चलता कि कब उसके बीच में एक प्रेम की धारा बहने का सही मार्ग बन गया?


एक छोटी आँख से रूह की दिवार तक।

आदमी मजदूर है मौत के दीदार तक।

जिंदगी के खराबे की मिशाल ये है की 

खुदखुशी में भी हमारे कभी खुशी नहीं रही


 अभी अभिशाप के बस शगुन हुए हैं

अभी दुर्दांत होनी है कहानी!

स्वार्थ की जिह्वा पर देखो, 

चुप है कई नितांत कहानी।

मानवीय मूल्यों को तुमने तोड़ करके 

जियो हो धर्म से मुंह मोड़ कर के।

भला क्या धर्म उसका साथ देगा 

जो जमाने भर को हरदम त्रास देगा?

 तुम्हें ना नर ना नारी में दिखा है।

ना फूलों भरी किसी क्यारी में दिखा है।

तुम्हें तो शोर करना है जहाँ में 

बस हर दम होड़ करना है जहाँ में।

शनिवार, 29 अप्रैल 2023

खून का कतरा

 एक दिन जमे हुए खून के कतरे से बात कर रहा था मैं 

बहुत खुश था बदन के थका देने वाले सफ़र से परे 

धूल की इस बेनाम दुनिया में आकर 

हालांकि अभी भी उसका पैतृक नाम जिंदा है उसमें  

पर वो नहीं चाहता कि कोई उसे उठाए और नाम लगी कांच की पट्टी पर चिपका दें

 वो तो अभी खून का कतरा भी नहीं रहना चाहता , सुबूत तो बहुत दूर की बात है |

 दुनिया की सारी चीखों  को पिघलाकर अगर एक शब्द बनाया जाए तो

उसका रूप हूबहू बेबसी से मिलेगा 

क्योंकि चीखें बेवजह के सितम की कोख से जन्म लेती हैं 

और इस दुनिया के कमजोर लोगों के बदन से चिपक जातीं है 

जो परिस्थितियों के मारे हैं 

जिन्हें वक्त ने अपनी नाव से नीचे उतार दिया है 

और वे बेबस है इस दुख के समुंदर में डूब जाने के लिए।… 




शनिवार, 22 अप्रैल 2023

अन्न ब्रह्म है...

 अन्नब्रह्मा रसोविष्णुः

भोक्ता देवो महेश्वरः।

एवम् ज्ञक्त्व तु यो भुन्क्ते

अन्न दोषो न लिप्यते॥

अन्नब्रह्मा रसोविष्णु:

भोक्ता देवो महेश्वर: ।

एवम ज्ञातत्व तू यो भुंक्तते

अन्न दोषो न लिप्यते..

अन्न ब्रह्म है, उसमें सार विष्णु है, और जो उसका उपभोग करता है (भोगता है) वह स्वयं महेश्वर है। अगर आप यह जान लें तो खाने में कोई भी अशुद्धता आपका हिस्सा नहीं बनेगी।

अन्नपूर्णा

विवरण

खाने से पहले की जाने वाली प्रार्थना या आह्वान। भोजन ग्रहण करने की क्रिया को यज्ञ (यज्ञ) माना जाता है और यह प्रसाद जटाराग्नि नामक दैवीय अधिकार को जाता है, जो पेट में पाचक अग्नि है। यह वह सिद्धांत है जो खाए गए भोजन को एक ऐसे रूप में तोड़ता है जिसे पूरे शरीर के लिए रक्त के माध्यम से आपूर्ति की जा सकती है। अन्न (अन्नम) में जो रचनात्मक ऊर्जा है वह ब्रह्म है। शरीर में पोषक ऊर्जा (रस) विष्णु हैं। भोजन का शुद्ध चेतना में परिवर्तन ही शिव है। यदि आप यह जानते हैं, तो आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन में कोई भी अशुद्धता कभी भी आपका हिस्सा नहीं बनेगी।

इस श्लोक का उच्चारण भोजन करने से पहले किया जाता है ताकि भोजन करते समय भी हमारा ध्यान भोजन पर केन्द्रित रहे और हम भोजन के महत्व को समझकर ही भोजन करें।


अपना भोजन करते समय, हमें "अन्नम ब्रह्म" (भोजन ईश्वर है) शब्दों का उच्चारण करना चाहिए; रासो विष्णुहु (अन्न का सार विष्णु है)। अन्न ईश्वर है। यह शरीर में जाकर शरीर के सभी अंगों को अपना सार प्रदान करता है। यह वास्तव में रक्त और ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। भोक्तोदेवो महेश्वरः (अन्न ग्रहण करने वाला महेश्वरः है)। यह सिद्धांत पूरे विश्व को ज्ञान सिखाता है। अन्नं ब्रह्म, रासो विष्णुहु, भोक्तोदेवो महेश्वरः- ये तीनों क्रमशः शरीर, मन और कर्म के अनुरूप हैं।

मनस्येक वाचस्येकम कर्मण्येकम महात्मानाम

(जिनके विचार, शब्द और कर्म पूर्ण सामंजस्य में हैं, वे महान हैं।)

विचार, वचन और कर्म की एकता रीथम है ।

वे ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर की त्रिमूर्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। अत: इन तीनों की पवित्रता के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए।


भगवान को भोग लगाकर भोजन को शुद्ध करें।

अन्नम ब्रह्म । अन्न को ही ब्रह्म का रूप समझो।

रासो विष्णुहु। आपके शरीर के सभी भागों में फैलने वाले भोजन का सार विष्णु स्वरूप है।

भोक्ता देवो महेश्वरः। भोजन का भागी शिव सिद्धांत का अवतार है। जब मनुष्य ऐसी पवित्र भावनाओं को विकसित करता है, तो वह स्वयं शिव बन जाता है -   


ॐ सहनाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवाव है।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषाव है।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।।

भावार्थ:
ओम!
हे परमेश्वर!
हम छात्र और शिक्षक दोनों की एक साथ रक्षा करें,
हम छात्र और शिक्षक दोनों का एक साथ-साथ पोषण करें,
हम दोनों साथ मिलकर महान ऊर्जा और शक्ति के साथ कार्य करें एवं विद्या प्राप्ति का सामर्थ्य प्राप्त करें,
हमारी बुद्धि तेज हो,
हम एक दूसरे से ईर्ष्या न करें।


ओम सहाना वावतु यजुर्वेद से से लिया गया एक मंत्र है। यह एक शांति मंत्र है। इस मंत्र को हमेशा योग सत्रों की शुरुआत से पहले या स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना के रूप में भक्ति के साथ पढ़ने की परंपरा हैं।



अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे!।

ज्ञान वैराग्य-शिद्ध्‌यर्थं भिक्षां देहिं च पार्वति॥11॥


Annapurne sada purne shankr pranavallabhe |

gyan veragya shiddhayartham bhiksham dehi cha parvati ‖ 11 ‖


अर्थ:- हे अन्नपूर्णे! तुम्हीं सर्वदा पूर्ण रूप से हो, तुम्हीं महादेव की प्राणों के समान प्रियपत्नी हो। हे पार्वति! तुम्हीं ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के निमित्त भिक्षा प्रदान करो, जिसके द्वारा मैं संसार से प्रीति त्याग कर मुक्ति प्राप्त कर सकूं, मुझको यही भिक्षा प्रदान करो।


ॐ ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। 

ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्म समाधिना।। 4.24।।


brahmarpanam brahm havira brahmagno brahamnahutam

brahmev ten gantavyam brahmkarm samadhinaam


अर्थ:- अर्पण (करना) ब्रह्म है, हवि (हवन में प्रयोग होने वाला द्रव्य) ब्रह्म है, अग्नि ब्रह्म है, हवि देने वाला भी ब्रह्म है .. (इस प्रकार जानते हुये) जो ब्रह्म में रचा-बसा रहते हुये (मन में रखते हुये) कर्म करता है वह ब्रह्म को जाता है

'युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु। युक्तस्वप्नाव बोधस्य योगो भवति दु:ख।।

युक्त आहार -

यह संतुलित भोजन से जुड़ा है। ऐसी बैलेंस डाइट जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, मिनरल्स, विटामिन और पानी जैसे छह तत्व होते हैं। हालांकि खानपान में इन पोषक तत्वों को शामिल करना या नहीं करना व मात्रा व्यक्ति विशेष के किसी रोग से पीड़ित होने पर निर्भर करती है। यदि किसी को डायबिटीज है तो उसे कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें चीनी, आलू आदि खाने से मना किया जाता है और अगर यूरिक एसिड ज्यादा है तो प्रोटीन डाइट जैसे पनीर, दूध आदि से परहेज करना होता है।


युक्त विहार -

इसका तात्पर्य संतुलित व्यायाम से है। इसके अनुसार व्यक्ति को सुबह खाली पेट 40 मिनट और रात के भोजन के बाद 20 मिनट टहलना चाहिए। साथ ही विशेषज्ञ की सलाहानुसार योगासन और प्राणायाम करना चाहिए।

सामान्य युक्त आहार -

मोटे आटे की रोटी, उबली हुई सब्जियां (जिसमें नमक, मिर्च-मसाले बेहद कम मात्रा में हों), अंकुरित अनाज, सलाद, छाछ या दही। लेकिन इस आहार के साथ चिकनाई, खटाई मैदे से बनी चीजें, ठंडी चीजें, अधिक मात्रा में मसालों के प्रयोग से परहेज करें।

पानी : प्रत्येक व्यक्ति को रोजाना कम से कम सवा तीन लीटर (८-10 गिलास) पानी जरूर पीना चाहिए।




रविवार, 16 अप्रैल 2023

प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें

 प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें   


किसी दिन वक्त जब मिलाएगा तुमको 

तब मैं पूछूंगा तुमसे 

प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी 

जितनी की साँसें   

जितनी की भूख 

जितनी की माया 

जितनी की समाज की छाया 

क्यों मोहब्बत इन सभी की कतारों में सबसे पीछे खड़ी है 

जहाँ तक की सिर्फ इंतजार ही जा सकता है 

मिलन का उपहार नहीं 

क्यों मन पर किसी और का और तन पर किसी और का नाम लिखा है 

क्यों मोहब्बत के हिस्से में बस शाम लिखा है 

क्यों मोहब्बत के हिस्से में सिर्फ इंतजार लिखा है 

क्यों यादों का उपहार देने वाला खुद नहीं मिल जाता 

क्यों मन को प्यार देने वाला खुद नहीं मिल जाता 

किसी दिन वक्त जब मिलाएगा तमसे 

तब मैं पूछूंगा,  प्रेम क्यों नहीं है इतना जरूरी जितनी की है साँसें   





शुक्रवार, 14 अप्रैल 2023

मुबहम बातें


मैं बैठा चुपचाप यहाँ तेरी याद में खोया हूँ। 

तेरी मुबहम बातों में बिन जागा बिन सोया हूँ।


 इस दुनिया में मर्जी की बातें और कभी तुम कर लेना, 

 पहले बताओ इस दिल के बदले में क्या पाया क्या खोया हूँ?




अपनी किस्मत पर कभी ऐतबार नहीं करते। 

हम जमाने में किसी से एतराज नहीं करते।


कोई आ जाए तो खुशामद में लग जाते हैं।

कोई ना आए तो कभी इंतजार नहीं करते।


कभी लगता है कि करते हैं तुमसे प्यार 

कभी लगता है यार!!!! नहीं करते।





इश्क की बारिश में डूबकर मर गए। 

हम तुम्हारी याद में ऊबकर मर गए।


क्या दौर है जमाने में मोहब्बत का 

हम अपनी ही जात से जूझकर मर गए?






शनिवार, 18 मार्च 2023

गुलामी की हर सोच से मुक्ति

 


वयसराय गया छोड़कर पर राय हमारी वही रही 

आजादी हर नाम में थी पर हाय गुलामी वही रही 


वही रंग और भेद  दिलों में 

वही द्वेष  का खेल जिलों में 

वहीं जहां में वही जहन में 

ये कैसा अंतर है बहन में  


अपनी मिट्टी अपनी काया 

अपना सूरज अपनी छाया 

अपने में ही जप्त रहे हम 

अपने से ही तृप्त रहे हम  


कहा उन्होंने छुद्र हमी हैं 

कहा उन्होंने कायार है 

कहां है हमें ज्ञान की बातें 

कहां हममें शायर हैं 

उनकी हर क गाली पर

हमने चुप की हांमी दे दी 

अपनी जहन को देखो हमने 

सोच की गुलामी दे दी 


हाँ माना ये सब दोष हमारे 

अज्ञानता के हैं सहारे 

पर यही समय है 

यहीं युक्ति होगी 

गुलामी की हर सोच से मुक्ति होगी 


नहीं बनेगा राजा कोई 

नहीं किसी का हक खाएगा 

जो जितना अच्छा कर्म करेगा 

उतना अच्छा फल पाएगा 





मोहब्बत रेत को मोति बना देती है

भूख घांस को भी रोटी बना देती है 

अगर जज्बा ना हो आजाद रहने का 

तो दुनिया हर शख्स को कैदी बना देती है 



और पत्थरों से नहीं फूलों से बनेगी 

हमारी कहानी उसूलों से बनेगी

गुरुवार, 9 मार्च 2023

देते हैं इम्तिहान दिल मगर फेल नहीं होते...

 


लफ्जों की सड़क से कहीं दूर आ मिले। 

आ सांसो की दहक से कहीं दूर आ मिले। 

आ मिले वहां की जहां जुदाई के खेल नहीं होते। 

देते हैं इम्तिहान दिल मगर फेल नहीं होते।

जहां रूह पर पर्दे की चमक नहीं होती, 

उजाले में अंधेरों की धमक नहीं होती 

नहीं होती निगाहों से बाहर की दुनिया 

नहीं होती जहां शहादत की दुनिया 

जहां झूठ के कोई जादू नहीं होते। 

जुल्म के मजबूत बाजू नहीं होता। 

आ मिले वहां जहां झरने निकलते हैं 

आ मिले वहां जहां लम्हे संभालते हैं।


भर दिया है कान हवाओं का गूलों ने 

अब हर जगह फैल जाएगा अफसाना प्यार का।

तू इस तरह न देख किसी चेहरे की याद को 

बुरा मान जाएगा हर लम्हा इंतजार का।।




मंगलवार, 7 मार्च 2023

अपने रँग में मिला दो मोहन

सुख और दुख का भेद नहीं हो

लगे जो मन पे तो खेद नहीं हो 

वैसा रंग लगे मेरे मोहन 

जैसा लगा है मीरा को जग में 

जैसा चेतक के था हर पग में 

जैसा राम का भूमि में है 

जैसा शंकर का धूमी में है

हो इतना चटक की सूरज जैसे 

हो इतना सहज की मूरत जैसे 

हो इतना अच्छा की राम लिखा हो 

हो इतना सच्चा की धाम लिखा हो 

हो इतना गूढ़ की शाम हो जैसे 

हो इतना सरल की आम हो जैसे

जिसमें द्वंद नहीं हो कोई 

जिसमें रंज नहीं हो कोई 

वैसा रंग लगा दो मोहन 

अपने रँग में मिला दो मोहन 



रविवार, 5 मार्च 2023

धर्मों के सुलझे किस्से

 धर्मों के सुलझे किस्से अब 

पहेली बन सर पर छाये हैं   

जिनको धर्म का पता नहीं वो 

सबको धर्म सिखाने आए हैं 

ममतामयी प्रणाम ही है वो 

जो सब धर्मों का मूल मन्त्र है 

मातृ-पितृ ही सब पंथों में 

सबसे ऊँचे मूल मन्त्र है 


खुद के शौक शखावन खातिर 

निज उर तक को बेंच दिए हैं 

हमने इस जीवन को कितने 

आड़े तिरछे पेंच दिए हैं 


सहज नहीं जीवन का मोति 

सहज नहीं यश का ये मोति 

हमको इतना भान हुआ है 

डरकर जीने वालों का कब 

इस जग में सम्मान हुआ है  


किस्मत पर ही आ टिकी सारे कर्मों की रेस  

अपना नाम फकीर था हम जाते किस देश


ना तो किसी से चाहिए गम का तराजू 

ना तो किसी से खुशी का बाट चाहिए 

बस एक ही ख्वाहिश है मेरी जमाने में 

मुझे बस आप सभी का साथ चाहिए

शुक्रवार, 3 मार्च 2023

दिल वाले सांचे में स्याही चल नहीं पाई।

हजारों गम में होते हम अगर इजहार ना होता। 

अभी तक मर गए होते अगर इकरार ना होता ; 

जुबाँ की शाख से तितली कब की उड़ गई होती। 

अगर इस जीभ पर हर वक्त तेरा नाम ना होता ।


अब और किसी दिए की जरूरत क्या है !

एक चेहरा बहुत है कमरे में रोशनी के लिए।


दिल वाले सांचे में स्याही चल नहीं पाई। 

जहां लिखना था उसे किसी और का नाम संग तेरे।


तू कुछ भी कर ले मगर आदत छूट नहीं सकती 

जो रस्सी समा गई तने में कभी टूट नहीं सकते।


इसके साथ ही बँट रहा है तेरी बेवफाई का सबूत , 

 ये कार्ड सिर्फ तेरी शादी का नहीं है।


लफ्जों को तमीज का जामा लगा कर भेज 

जहां लिखा है तूने हम तुम वहां कॉमा लगा कर भेज 

अब मैं वो नहीं जो तेरी हसरतों पर कर्जदार हो जाऊं 

तू घड़ी भर बिना देखे तो मैं बेजार हो जाऊं। 

मोहब्बत इस रास्ते तक ले आई है मुझे 

मैं एक कदम भी आगे रखूँ तो बेकार हो जाऊं।


हाँ माना मैं रिश्ते में तेरा कुछ नहीं लगता 

मगर फिर भी मेरे बगैर तेरा मन क्यों नहीं लगता?


आओ तुम्हारे साथ जमाना देखें। 

अब क्या कहती हो, बहाना देखें।


चूमना इस दुनिया की सबसे नाजुक कला है।


नजर के सामने धूपों का घर है 

मगर मन में तो बस सूपों का घर है। 

हमारे वक्त की दुनिया यही है। 

यहाँ नजर में बस रूपों का घर है।